पर्यटकों को भा रहा हिमाचल का ट्यूलिप गार्डन, मनमोहक फूलों का दीदार करने अब तक पहुंचे 70 हजार सैलानी
हिमाचल में पालमपुर की वादियां रंग-बिरंगे ट्यूलिप फूलों से महक रही हैं, इस साल 50 हजार खिले हैं .

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 23, 2026 at 8:37 PM IST
पालमपुर: हिमाचल की खूबसूरत वादियों के साथ-साथ अब प्रदेश रंग-बिरंगे फूलों के लिए भी मशहूर हो रहा है. धौलाधार की वादियों में खूबसूरत रंग-बिरंगे फूलों के साथ सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT) पालमपुर का ट्यूलिप गार्डन देश-विदेश में अपनी खास पहचान बना रहा है. इस साल 10 फरवरी को जनता के समर्पित होने के बाद इस ट्यूलिप गार्डन में सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.
ट्यूलिप गार्डन को देखने वालों का आंकड़ा 70 हजार पार
सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर का ट्यूलिप गार्डन, जो अब अपने चौथे वर्ष में है, एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है और देश के कोने-कोने से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है. सीएसआईआर हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर की ओर से स्थापित, हिमाचल प्रदेश का यह पहला ट्यूलिप गार्डन है. अभी तक 70,000 से अधिक पर्यटक इस गार्डन का दीदार कर चुके हैं. पिछले वर्षों में यह संख्या एक लाख से अधिक रही है. इस बार डेढ़ लाख तक आगंतुकों की चौंका देने वाली आमद होने की आशा है. -डॉ. सुदेश कुमार यादव, निदेशक, सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान
ट्यूलिप गार्डन देखने कई राज्यों में हिमाचल आ रहे सैलानी
पंजाब से ट्यूलिप गार्डन देखने आई सैलानी ने कहा कि, उन्हें यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है. पहले ट्यूलिप गार्डन देखने के लिए जम्मू-कश्मीर जाना पड़ता था, लेकिन हिमाचल के पालमपुर में ट्यूलिप गार्डन खुलने से अब आसानी से रंग-बिरंगे फूलों के दीदार संभव हो पा रहे हैं. संस्थान के द्वारा बहुत सरहनीय कार्य किया गया है.

ट्यूलिप गार्डन में पंजाब से आए मनमीत ने बताया कि, पालमपुर में बना यह ट्यूलिप गार्डन बहुत सुंदर है और उनको पालमपुर बहुत पसंद आया है. हसीन वादियों से रंग-बिरंगी फूलों के बीच घूमना एक अलग ही तरह का एहसास है. इसे आनंद को शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है.

वहीं, तमिलनाडु से आए पर्यटक चिन्मय कहते हैं, "मैंने तमिलनाडु में ट्यूलिप फूल देखा लेकिन गआर्डन में इस तरह से पहली बार ट्यूलिप देख रहा हूं. ट्यूलिप गार्डन देखर बहुत ही अच्छा लग रहा है. कश्मीर जाने का अभी तक मौका नहीं मिला था, लेकिन पालमपुर का ट्यूलिप गार्डन देखकर बहुत ही अच्छा लगा. भी पालमपुर के ट्यूलिप गार्डन की सराहना की ओर कहा कि ट्यूलिप गार्डन में खिले फूल बहुत मनमोहक है."

वहीं, स्थानीय निवासी डॉ. नवीन दत्त ने कहा कि, इस ट्यूलिप गार्डन में हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. इसमें अलग-अलग किस्मों के ट्यूलिप फूल खिले हैं. साल-दर-साल ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती बढ़ती ही जा रही है. यही वजह है कि हिमाचल ही नहीं बल्कि हिमाचल के बाहर से भी पर्यटक ट्यूलिप गार्डन देखने हिमाचल आ रहे हैं.

2018 में हॉलैंड से लाए गए ट्यूलिप के बल्ब
पालमपुर में ट्यूलिप की खेती की यात्रा 2018 में हॉलैंड से लाए बल्बों के आयात के साथ शुरू हुई, इसके बाद संस्थान में स्थानीय उत्पादन के लिए व्यापक परीक्षण किए गए. ट्यूलिप की किस्मों की देखभाल के साथ, संस्थान ने फूल और बल्ब उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, व्यावसायिक खेती की संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रयोगात्मक उपक्रम शुरू किए. कश्मीर के बाद पालमपुर में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन सीएसआईआर आईएचबीटी संस्थान पालमपुर में विकसित किया गया है. यह ट्यूलिप गार्डन पूरी तरह से स्वदेशी ट्यूलिप पौधों से विकसित किया गया है.

हिमाचल में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन
CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि, "जम्मू-कश्मीर के बाद देश का दूसरा और हिमाचल प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ साल पहले कांगड़ा जिले के पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. इसमें ट्यूलिप की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है. ये गार्डन हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन को बढ़ावा देता है. पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान, केंद्र सरकार और CSIR द्वारा 2022 में शुरू किए गए फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत फूलोत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है. इससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ कर उनकी आय को दोगुना करने की योजना पर काम किया जा रहा है."

बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा संस्थान
डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि, "फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत संस्थान का यह कदम इस क्षेत्र के बहुत ही लाभकारी रहा है. ये ट्यूलिप गार्डन न सिर्फ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा, बल्कि जो विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाएं हैं उन्हें भी एक्सप्लोर करने की एक नई दिशा प्रदान करेगा. संस्थान कुछ कंपनियों के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा है. साथ ही ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही और इस क्षेत्र विभिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं."
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