चीन सीमा पर 30 हजार श्रद्धालु, 33 दिनों में टूटा रिकॉर्ड, आदि कैलाश दर्शन के लिए उमड़ा सैलाब
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा चरम पर है. 33 दिनों में 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं. रिपोर्ट - किरणकांत शर्मा.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 3, 2026 at 8:32 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा इस वर्ष अलग ही पहचान हासिल करती दिखाई दे रही है. यात्रा शुरू होने के महज 33 दिनों के भीतर 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इनर लाइन परमिट जारी किए जाने का आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देशभर में इस दिव्य धाम के प्रति लोगों की आस्था और आकर्षण लगातार बढ़ रहा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 जून 2026 तक कुल 30,016 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं. केवल एक दिन में 1,178 परमिट जारी होना इस बात का प्रमाण है कि यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है. सीमांत क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने यात्रा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. यही कारण है कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारें इस क्षेत्र में विकास के लिए योजना लेकर आ रही है.
पार्वती कुंड से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा ने खींचा देशभर का ध्यान: आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा का विधिवत शुभारंभ 1 मई 2026 को जोलिंगकोंग स्थित पवित्र पार्वती कुंड के समीप भगवान शिव के मंदिर के कपाट खुलने के साथ हुआ था.

कपाट खुलने के बाद से ही देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं, पर्यटकों, पर्वत प्रेमियों और प्रकृति के बीच आध्यात्मिक शांति तलाशने वाले लोगों का लगातार आगमन बना हुआ है. हिमालय की गोद में स्थित यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, बल्कि अपनी प्राकृतिक भव्यता, शांत वातावरण और सांस्कृतिक विरासत के कारण भी लोगों को आकर्षित कर रहा है. यही वजह है कि यात्रा सीजन के शुरुआती दिनों से ही यहां आने वालों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है.
पिछले वर्षों के आंकड़े भी पीछे छूटने की ओर: यात्रा के मौजूदा आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. वर्ष 2024 में पूरे यात्रा सत्र के दौरान कुल 29,352 इनर लाइन परमिट जारी किए गए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 36,526 तक पहुंची थी, लेकिन वर्ष 2026 में यात्रा शुरू होने के केवल 33 दिनों के भीतर ही 30 हजार से अधिक परमिट जारी हो चुके हैं. यही रफ्तार बनी रही तो इस वर्ष यात्रा अपने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकती है.

मई महीने में ही दिखा श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व उत्साह: पिथौरागढ़ जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाईं का मानना है कि इस बार यात्रा सीजन समाप्त होने तक श्रद्धालुओं की संख्या अब तक के सभी वर्षों से अधिक रहने की संभावना है. जिलाधिकारी के अनुसार, 1 से 31 मई 2026 के बीच लगभग 28 हजार श्रद्धालु व पर्यटक आदि कैलाश और ओम पर्वत पहुंच चुके हैं. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 150 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाता है.
उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर आदि कैलाश अब तेजी से एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है. चारधाम यात्रा के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु अब सीमांत क्षेत्र के इस दिव्य धाम को भी अपनी यात्रा सूची में शामिल कर रहे हैं. इससे क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है.
- आशीष कुमार भटगाईं, पिथौरागढ़ जिलाधिकारी -
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दौरे के बाद बढ़ा राष्ट्रीय आकर्षण: आदि कैलाश और ओम पर्वत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दौरे महत्वपूर्ण साबित हुए हैं. अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश व ओम पर्वत भ्रमण ने पूरे देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया था.

इसके बाद जून 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आदि कैलाश में योग साधना करने की तस्वीरें और वीडियो भी व्यापक चर्चा का विषय बने. इन विजिट ने न केवल धार्मिक दृष्टि से इस क्षेत्र का महत्व बढ़ाया, बल्कि देशभर के लोगों में यहां आने की उत्सुकता भी पैदा की. उसका असर यह है कि लगातार बढ़ती पर्यटक और श्रद्धालु संख्या आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है.
सीमांत गांवों के लिए वरदान बनी यात्रा: आदि कैलाश यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी नई उम्मीद बनकर उभरी है. जिलाधिकारी आशीष भटगाईं के अनुसार यात्रा से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं.

| इस यात्रा से होम स्टे, होटल, टैक्सी सेवाएं, स्थानीय उत्पादों की बिक्री, घोड़ा-खच्चर संचालन और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है. भारत-चीन और भारत-नेपाल सीमा से लगे गांवों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से युवाओं को अपने गांवों में ही रोजगार मिलने लगा है, जिससे पलायन की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है. |
आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास का मजबूत माध्यम बनती जा रही है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ सड़क, संचार, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं में भी तेजी से सुधार हो रहा है. इससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है. धार्मिक पर्यटन के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह यात्रा एक सफल मॉडल के रूप में उभर रही है.
- आशीष कुमार भटगाईं, पिथौरागढ़ जिलाधिकारी -
प्रशासन की अपील: जिला प्रशासन का कहना है कि प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है. यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि,
- वे यात्रा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें.
- मौसम की जानकारी प्राप्त करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.
- उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलता है. इसलिए सुरक्षा संबंधी सभी सावधानियों का पालन करना आवश्यक है.
कैसे पहुंचे आदि कैलाश? अगर आप दिल्ली या देहरादून या अन्य शहरों से ट्रेन से आ रहे हैं तो आपको नैनीताल के काठगोदाम तक ट्रेन की सुविधा मिल जाएगी. जहां से आपको पिथौरागढ़ पहुंचना होगा. वहीं, हवाई मार्ग की बात करें तो पंतनगर एयरपोर्ट या नैनी सैनी एयरपोर्ट पिथौरागढ़ पहुंच सकते हैं. इसके बाद सड़क मार्ग से आगे जाना होता है.
सड़क मार्ग से काठगोदाम/हल्द्वानी फिर पिथौरागढ़ पहुंचना होता है. यहां से धारचूला फिर गुंजी से कुटी गांव पहुंचा जाता है, फिर आदि कैलाश आता है. धारचूला से आगे का रास्ता पहाड़ी और संवेदनशील है. जिस वजह से यह यात्रा एडवेंचर भी भरा हो सकता है. यात्रा के लिए शेयर टैक्सी या जीप धारचूला से मिल जाती है.
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