ETV Bharat / bharat

झारखंड में मानसून ने बढ़ाई चिंता, मलेरिया-डेंगू के मामले तेजी से बढ़े, रेड जोन में पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम

झारखंड में मानसून ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. डेंगू-मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं. रांची से उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.

DENGUE MALARIA IN JHARKHAND
डिजाइन इमेज (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : July 25, 2026 at 1:02 PM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

रांची: मानसून के दौरान झारखंड में मलेरिया के साथ-साथ डेंगू और चिकनगुनिया के मामले भी बढ़ जाते हैं. राज्य में इस वर्ष मानसून के मौसम में मलेरिया और डेंगू के मामले काफी बढ़ गए हैं. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक राज्य में कुल 16,728 मलेरिया संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 77 डेंगू के कन्फर्म केस मिल चुके हैं.

पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया के सर्वाधिक मामले

राज्य में मलेरिया के सबसे अधिक मामले पूर्वी सिंहभूम जिले में दर्ज किए गए हैं, जहां 6,527 मरीज मिल चुके हैं. पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 कन्फर्म मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम में 5,260 मलेरिया के मामले मिले, जबकि पूर्वी सिंहभूम में 6,527 केस दर्ज हुए. पश्चिमी सिंहभूम में कुल 6,172 केस हैं. गोड्डा जिले में 1,404 मलेरिया के केस मिले हैं.

डॉ. बीके सिंह का बयान (ETV Bharat)

पूर्वी सिंहभूम से सटे सरायकेला-खरसावां में 723, साहिबगंज में 356, सिमडेगा में 118, हजारीबाग में 61, गिरिडीह में 56, गढ़वा में 23, दुमका में 42 और रांची में 42 मलेरिया के केस मिले हैं.

DENGUE MALARIA IN JHARKHAND
झारखंड में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप (ETV Bharat)

60-70% मलेरिया केस खतरनाक प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम (Pf) के

झारखंड स्वास्थ्य विभाग के वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के नोडल अधिकारी डॉ बीके सिंह ने बताया कि राज्य में मलेरिया और डेंगू संक्रमण के मामले बढ़े हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है.

डॉ. सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में 60-70% मलेरिया के मामले प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम (Pf) के हैं, जो एडवांस स्टेज में ब्रेन मलेरिया का कारण बन जाता है.

68.57% मलेरिया संक्रमित खतरनाक प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम के

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी से जून 2026 तक मिले कुल 16,728 मलेरिया केस में से 11,472 केस (68.57%) प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम के हैं. 4,608 केस (27.54%) प्लाज्मोडियम विवैक्स (Pv) के तथा 648 केस (3.87%) ऐसे हैं जिनमें दोनों परजीवियों का मिश्रित संक्रमण पाया गया.

रांची में डेंगू के सबसे अधिक मामले

डॉ. बीके सिंह ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक राज्य में 76 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक 27 मामले रांची जिले के हैं. डेंगू के केस कुल 20 जिलों में फैले हुए हैं.

छह जिलों में जापानी इंसेफ्लाइटिस के 11 मामले

डॉ. बी.के. सिंह ने कहा कि छह जिलों से जापानी इंसेफ्लाइटिस (JE) के 11 मामले भी सामने आए हैं.

DENGUE MALARIA IN JHARKHAND
डेंगू और मलेरिया के लक्षण (ETV Bharat)

मलेरिया संक्रमण के लक्षण

रिम्स के मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं फिजिशियन डॉ. संजय सिंह ने बताया कि झारखंड की जंगल-झाड़ और प्राकृतिक बनावट के कारण कई पॉकेट्स हैं जहां मलेरिया की संभावना बढ़ जाती है. संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 दिनों बाद लक्षण दिखते हैं. मलेरिया के मुख्य लक्षण तेज बुखार, ठंड लगना और कंपकंपी हैं. ये लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 दिन बाद शुरू होते हैं.

संक्रमित मच्छर के काटने के लगभग 4 से 10 दिन बाद शरीर में इसके लक्षण दिखाई देते हैं. रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह ने बताया कि एडीज मच्छर के काटने से होने वाले डेंगू में तेज बुखार, पूरे शरीर में तेज दर्द, आंखों का लाल होना और बहुत कमजोरी महसूस होती है. गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स कम होने से शरीर पर चकत्ते पड़ सकते हैं और इंटरनल हेमरेज (रक्तस्राव) की आशंका बढ़ जाती है. डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि डेंगू में बिना योग्य चिकित्सक के सलाह के कभी भी दवा न लें.

DENGUE MALARIA IN JHARKHAND
स्थिति नियंत्रित रखने के लिए सरकार के उपाय (ETV Bharat)

रोकथाम के लिए उठाए गए कदम

डॉ. बीके सिंह ने कहा कि वेक्टर बोर्न डिजीज के रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव हो रहा है. सभी सिविल सर्जनों को दवाओं की उपलब्धता और जांच व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग के साथ समन्वित योजना बनाकर मलेरिया-डेंगू के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

जिलावार मलेरिया-डेंगू के मामले (1 जनवरी से 30 जून 2026 तक)

जिलावार मलेरिया-डेंगू के मामले (1 जनवरी से 30 जून 2026 तक)
जिलामलेरिया केसडेंगू केस
बोकारो270
चतरा81
देवघर80
धनबाद43
दुमका422
पूर्वी सिंहभूम65271
गढ़वा233
गिरिडीह563
गोड्डा14042
गुमला113
हजारीबाग619
जामताड़ा80
खूंटी8131
कोडरमा111
लातेहार291
लोहरदगा111
पाकुड़2371
पलामू271
रामगढ़105
रांची4227
साहेबगंज3566
सरायकेला7231
सिमडेगा1180
पश्चिमी सिंहभूम61725

भारत में जल्द डेंगू के लिए वैक्सीन होगा उपलब्ध

देश में पहली बार डेंगू की वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है. ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने जापान की दवा कंपनी टाकेडा की डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा (Qdenga) को बाजार में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. टाकेडा कंपनी के अनुसार, यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक के लोगों को दी जा सकेगी. इसे डेंगू संक्रमण हो चुका हो या नहीं, इसके बावजूद लगाया जा सकता है.

वैक्सीन लगवाने से पहले किसी प्रकार का टेस्ट कराने की भी जरूरत नहीं है. 0.5 मिलीलीटर की दो डोज त्वचा के नीचे दी जाती हैं. दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है. कंपनी ने बताया कि 2022 में लॉन्च होने के बाद से क्यूडेंगा को अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और विश्व स्तर पर 3.2 करोड़ से ज्यादा डोज वितरित की जा चुकी हैं.

भारत में इस वैक्सीन को मिली मंजूरी को डेंगू रोकथाम की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. डेंगू मच्छरों से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जो दुनिया के 125 से अधिक देशों में फैली हुई है और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है. टाकेडा के मुताबिक, विश्वभर में होने वाले कुल डेंगू मामलों में लगभग एक तिहाई मामले भारत में आते हैं.

डॉक्टरों की सलाह, साफ-सफाई और सतर्कता जरूरी

डॉ. बीके सिंह ने अपील की कि घर और आस-पास साफ-सुथरा रखें, कहीं भी साफ पानी जमा न होने दें. डेंगू फैलाने के लिए एडीज मच्छर मुख्य जिम्मेदार होता है. इस मच्छर की खासियत यह है कि इसका लार्वा साफ और लंबे समय तक जमा रहे पानी में ही पनपता है. इसलिए घर और आसपास कूलर, पुराने टायर, खाली डिब्बों या किसी भी जगह पानी जमा न होने दें. एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहता है, इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाव बरतना बेहद जरूरी है. पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. बीमार होने पर हेल्पलाइन नंबर 104 पर कॉल करें या निकटतम सरकारी अस्पताल में संपर्क करें. डॉ. संजय सिंह ने भी मच्छरों से बचाव और स्वास्थ्य के प्रति तत्परता बरतने की सलाह दी.

ये भी पढ़ें:

रांची शहरी क्षेत्र में डेंगू-चिकुनगुनिया की रोकथाम की पहल, स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी, जापान की बायोफार्मास्युटिकल कंपनी का टीका