ETV Bharat / bharat

मोदी सरकार ने अपने ही मंत्री के खास अधिकारियों को हटाया, कांग्रेस ने बताया गंभीर मामला

'प्रधानमंत्री चंदा दो, धंधा लो', कांग्रेस ने लगाए आरोप, विवाद बढ़ने पर भूपेंद्र यादव के अधिकारियों पर गिरी गाज.

Bhupendra Yadav
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव (IANS)
author img

By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 7, 2026 at 5:10 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्ली : राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर अभी मामला थमा भी नहीं कि मोदी सरकार के एक और मंत्री विवाद में घिर चुके हैं. इस बार पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम सामने आया है. केंद्र सरकार ने वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटा दिया है. ये तीनों मंत्री भूपेंद्र यादव की टीम का हिस्सा थे.

कांग्रेस ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के ऑफिस से उनके खास सहयोगियों को हटाए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा. पार्टी ने पूछा कि क्या यह "प्रधानमंत्री चंदा दो, धंधा लो" स्कीम के गलत साबित होने का मामला हो सकता है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यादव के स्टाफ के चार सदस्यों को हटाए जाने की खबर चौंकाने वाली है.विपक्षी पार्टी का यह बयान तब आया जब पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यादव के ऑफिस से प्राइवेट सेक्रेटरी और तीन एडिशनल सेक्रेटरी को उनके काम से मुक्त कर दिया.

रमेश ने 'एक्स' पर पूछा, "यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि मोदी सरकार में ऐसी नियुक्तियां कैसे होती हैं. बिना आग के धुआं नहीं उठता. क्या यह 'प्रधानमंत्री चंदा दो, धंधा लो' स्कीम के गड़बड़ाने का मामला हो सकता है ?"जहां प्राइवेट सेक्रेटरी अमर सिंह को "प्रशासनिक आधार" पर हटाया गया, वहीं एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी आयुष सरन की नियुक्ति खत्म कर दी गई और एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी शैलेश कुमार सिंह को "समय से पहले उनके मूल कैडर, यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग में वापस भेज दिया गया."

यह फैसला तीन अलग-अलग आदेशों के जरिए लिया गया - और ये सभी 3 जुलाई के थे.कांग्रेस ने पहले भी 'चंदा दो, धंधा लो' का जिक्र करते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के तहत चंदा इकट्ठा किया और बदले में सरकारी टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट देने का वादा किया.

आपको बता दें कि किसी मंत्री के सहयोगियों का बड़े पैमाने पर तबादला या उन्हें नौकरी से निकालना अक्सर नहीं होता है. सूत्रों का कहना है कि तीन अन्य मंत्रियों के सहयोगियों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की तैयारी चल रही है.

इन बदलावों को लागू करने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तीन जुलाई को तीन अलग-अलग ऑफिस ऑर्डर जारी किए. पहले ऑर्डर में यादव के एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी आयुष सरन की नियुक्ति को "तत्काल प्रभाव से खत्म" कर दिया गया. दूसरे ऑर्डर में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस के अधिकारी शैलेश कुमार सिंह को उनके मूल कैडर (डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग) में वापस भेज दिया गया. ऑर्डर में इसे "एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ" पीरियड बताया गया.

ये भी पढ़ें : भारत के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई मॉडर्न बातचीत का एजेंडा नहीं, बल्कि सभ्यता का सिद्धांत है: मंत्री भूपेंद्र यादव