मोदी-दीदी की साठगांठ से टाटा नैनो प्रोजेक्ट सिंगूर से गुजरात गया: CPM नेता सलीम
बंगाल का सिंगूर फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में है. पीएम मोदी की रैली से पहले टाटा नैनो प्रोजेक्ट विवाद ताजा हो गया है.

Published : January 11, 2026 at 8:04 PM IST
कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल के सिंगूर में होने वाली जनसभा से पहले, टाटा नैनो कार प्रोजेक्ट पर लंबे समय से दबा हुआ विवाद फिर से राजनीतिक सुर्खियों में आ गया है. CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए उन पर 'पूर्वी भारत के औद्योगिक भविष्य के साथ धोखा' करने और गुजरात को एक इंडस्ट्रियल हब के तौर पर उभरने में मदद करने का आरोप लगाया.
पूर्व सांसद सलीम ने आरोप लगाया कि 2008 में टाटा मोटर्स का सिंगूर से बाहर निकलना—जिसे इंडस्ट्री के लोग बंगाल में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ा झटका मानते थे—तब की विपक्षी नेता ममता बनर्जी और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक गुप्त समझौते का नतीजा था. उनके अनुसार, इसी 'मिलीभगत' की वजह से नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात के साणंद में शिफ्ट किया गया था.

पीएम मोदी के आगामी सिंगूर दौरे का जिक्र करते हुए सलीम ने कहा कि प्रधानमंत्री को सबसे पहले 'ममता बनर्जी से मिलने के बहाने' कालीघाट काली मंदिर जाना चाहिए और कार फैक्ट्री को गुजरात भेजने में मदद करने के लिए उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए. उन्होंने दावा किया, "ममता बनर्जी ने BJP के बढ़ावा देने पर कार फैक्ट्री को साणंद भेजा."
सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता सलीम ने आगे कहा कि गुजरात के औद्योगिक विकास में ममता बनर्जी की भूमिका अहम थी. उन्होंने पूछा, "मोदी मोदी बन गया, गुजरात गुजरात बन गया—इसके पीछे भी ममता की सहमति थी. क्या प्रधानमंत्री इस सच को मानेंगे?" उन्होंने भाजपा नेतृत्व को सिंगूर मामले के पीछे के राजनीतिक इतिहास को मानने की चुनौती दी.
सिंगूर आंदोलन के दौरान BJP की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि पार्टी को उस समय अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "तब BJP की क्या भूमिका थी? वे सच नहीं बताएंगे. हमें करना होगा, आपको—पुरालेखों को सामने लाना होगा. इतिहास इतनी आसानी से मिटाया नहीं जा सकता."
CPI(M) नेता ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर पूर्वी भारत की औद्योगित संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि पश्चिमी भारत की इंडस्ट्रियल लॉबी की मदद कर रही हैं. सलीम ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग में तेज वृद्धि में पूर्वी भारत का कोई निशान नहीं है. यह सब पश्चिमी भारत में ही है. हम सिर्फ उपभोक्ता बनकर रह गए हैं."
उन्होंने पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी भारत से पूरब की ओर जाने वाली गाड़ियों से भरे हाईवे की ओर इशारा किया.
जगत सेठ, उमीचंद और मीर जाफर से ममता की तुलना
ममता बनर्जी की तुलना औपनिवेशिक काल में धोखा देने वाले लोगों से करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, "जैसे जगत सेठ, उमीचंद और मीर जाफर ने ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए दलाल का काम किया, वैसे ही ममता बनर्जी ने 'वेस्ट इंडिया कंपनी' के लिए किया है."
सलीम ने यह भी याद किया कि 2006 में तृणमूल कांग्रेस NDA का हिस्सा थी, और सिंगूर आंदोलन के दौरान, भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ममता बनर्जी को उनकी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए मनाने के लिए मंच पर आए थे. उन्होंने कहा कि वाम दलों ने हमेशा सिंगूर से टाटा मोटर्स के बाहर निकलने के लिए भाजपा को बराबर का जिम्मेदार ठहराया है.
कांग्रेस ने भी भाजपा की आलोचना की
वहीं, इस मुद्दे पर बंगाल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी अब अनजान बनने का नाटक नहीं कर सकती. उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस BJP से प्रेरणा लेकर बनी है. दोनों ने RSS से पढ़ाई की है—BJP थोड़ी ज्यादा, तृणमूल थोड़ी कम."
कांग्रेस नेता ने BJP पर पहले ममता बनर्जी के कामों का समर्थन करने और अब अफसोस जताने का आरोप लगाया. सुमन चौधरी ने कहा कि बंगाल में औद्योगिक विकास होना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उसे इससे दूर रखा गया है. उन्होंने लोगों को सचेत किया कि, "BJP पूरी तरह से झूठी राजनीतिक पार्टी है, जो सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति से चलती है. बंगाल के लोगों को उनसे सावधान रहना चाहिए."
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