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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल फोन पर लगेगा बैन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयारी तेज

उत्तराखंड के प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान पर्यटक नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल फोन, जानिए क्यों लिया जा रहा यह फैसला

CORBETT TIGER SAFARI
कॉर्बेट पार्क में सफारी (फाइल फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 8, 2026 at 5:30 PM IST

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रामनगर: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के सभी पर्यटन जोनों में अब सफारी के दौरान पर्यटकों को मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी. यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद लिया जा रहा है. फोन पर प्रतिबंध के कई कारण बताए गए हैं. ऐसे में अब फोन को गेट पर ही जमा कराना होगा. अगर कोई फोन ले जाता है तो उस पर कार्रवाई भी की जाएगी.

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टाइगर रिजर्व के कोर हैबिटेट और पर्यटन क्षेत्रों में सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाए. ताकि, वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और प्राकृतिक वातावरण में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप रोका जा सके.

कॉर्बेट में सफारी के दौरान पर्यटक नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल फोन (वीडियो- ETV Bharat)

"सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि सफारी के दौरान स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. हालांकि, पर्यटक प्रॉपर कैमरा जैसे डीएसएलआर कैमरा अपने साथ ले जा सकेंगे. पार्क प्रशासन कोर्ट के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए आवश्यक गाइडलाइन तैयार की जा रही है. जल्द ही सफारी के दौरान मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए जाएंगे. पर्यटकों को प्रवेश द्वार पर ही फोन जमा करना होगा."- राहुल मिश्रा, उप निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व

फोन पर प्रतिबंध के लगाने के कई कारण: वहीं, वन्यजीव प्रेमी एवं नेचर गाइड संजय छिम्वाल का कहना है कि पूर्व में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनके बाद न्यायालय ने मोबाइल फोन पर प्रतिबंध का निर्णय लिया था. कई टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है. उन्होंने फोन पर प्रतिबंध के कई कारण भी साझा किए.

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कॉर्बेट में बाघ (फाइल फोटो- ETV Bharat)

"मोबाइल फोन से वीडियो या फोटो लेने के दौरान कई बार पर्यटक या गाइड वन्यजीवों के काफी नजदीक चले जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है. वन्यजीव भी तनाव में आ जाते हैं. इसके अलावा कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों में नेटवर्क उपलब्ध होने के कारण पार्क के भीतर जानवरों की मूवमेंट की जानकारी आपस में साझा की जाती है, जिससे किसी विशेष स्थान पर जिप्सियों की भीड़ बढ़ जाती है. यह स्थिति न केवल वन्यजीवों बल्कि, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी जोखिमपूर्ण है. इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए कॉर्बेट प्रशासन की ओर से यह कवायद की जा रही है."- संजय छिम्वाल, नेचर गाइड

पार्क के भीतर प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को फोन रखने की नहीं होगी अनुमति: प्रस्तावित व्यवस्था के तहत देश-विदेश से आने वाले पर्यटक, पंजीकृत टूर गाइड, जिप्सी एवं सफारी वाहन चालक, नेचरलिस्ट, कोर जोन में कार्यरत होटल एवं लॉज संचालक और पार्क के भीतर प्रवेश करने वाला कोई भी स्टाफ मोबाइल फोन अपने पास नहीं रख सकेगा. नियम का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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कॉर्बेट में हिरण (फाइल फोटो- ETV Bharat)

बता दें कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में ढिकाला, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सोनानदी, दुर्गा देवी, पाखरो, मुंडिया पानी, तराई पश्चिमी का फाटो जोन समेत रामनगर वन प्रभाग के सितावनी, पवलगढ़ और कॉर्बेट हेरिटेज सफारी जोन शामिल हैं, जहां डे सफारी और नाइट स्टे की सुविधा उपलब्ध है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन सभी पर्यटन जोनों में सफारी के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल पर जल्द पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाएगा.

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