वाकई खास है बांस से बनी राखी, जिसमें मिथिला पेंटिंग की खूबसूरती
आर्टिफिशियल नहीं, भाई के हाथों पर सजेगी बांस की बनी राखी, जिसपर दिखेगी बिहार की संस्कृति. रिपोर्ट- अमित कुमार

Published : August 27, 2026 at 9:00 PM IST
समस्तीपुर : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा था, ''काम करो कुछ काम करो, जग में रहकर कुछ नाम करो''. राष्ट्रकवि की इस पंक्ति को बिहार के समस्तीपुर निवासी कुंदन कुमार राय बखूबी निभा रहे हैं. जरा सोचिए जो व्यक्ति बचपन से कल ब्लांइनेस के शिकार हों और वह चंटक रंगों से पेंटिंग बनाते हों तो क्या कहेंगे?
राखी पर मिथिला पेंटिंग : भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षा बंधन. वैसे तो इस पर्व को लेकर अलग-अलग डिजाइन और आधुनिक शैली की राखियों से बाजार सजी दिखी. वहीं समस्तीपुर के कलाकार व खास मिथिला पेंटिंग के जरिये देश में अपनी खास पहचान बनाने वाले कुंदन कुमार की राखी की खूब चर्चा है.
बांस की बनी राखी : दरअसल, आर्टिफिशियल व प्लास्टिक आदि से बनी राखियों के बीच कुंदन की बांस की बनी राखी व उसपर उकेरी गई मिथिलांचल की खास कला लोगों को खूब आकर्षित किया. यही नहीं जब यह राखी भाईयों के कलाई पर बंधेगा तो सिर्फ महंगे धागे व जरी की सजावट नहीं, बिहार व मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान को दिखायेगा.

बांस शुभ और समृद्धि का प्रतीक : पहले भी अपने खास कला के कारण चर्चित कलाकार कुंदन ने इस खास तरह के राखी को लेकर ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि भारतीय संस्कृति में बांस को शुभता, समृद्धि और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसी परंपरा को आधुनिक सोच से जोड़ते हुए बांस की पतली लकड़ी पर आकर्षक राखियां तैयार की गयी है.

इन राखियों पर पारंपरिक मिथिला पेंटिंग की प्रसिद्ध शैली को बेहद बारीकी से उकेरा गया है. कुंदन कुमार ने बताया कि देश के कई राज्यों से बिहार की इस संस्कृति को समेटे इन राखियों की मांग आने लगी. पहली बार समस्तीपुर में बनी बांस की इन खास राखियों के अलावे दूसरे राखियों पर सियासी व विभिन सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के लोगो से सजी राखी भी आकर्षण का केंद्र बना है.

''खासतौर पर बीजेपी के चिह्न से सजी राखियों की इस साल खूब मांग रही. वहीं कई सरकारी बैंक व पोस्टल विभाग ने भी अपने संस्थान के लोगो से सजी राखियां ली है.''- कुंदन कुमार राय, कलाकार, मिथिला पेंटिंग

कुंदन कुमार राय ने बताया कि पहली बार इन्होंने इसे बनाया है, जिसे बनाने में कुछ संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं ने साथ दिया. इस बार उन्होंने 500 के करीब राखियां बनायी थीं, जो सभी बिक गए. बांस की राखियों की कीमत उन्होंने 130-140 रुपये रखा था. ज्यादातर राखियां ऑन लाइन खरीदी गई. वहीं अन्य राखियां सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं के तरफ से लगे स्टॉल में ही बेची गयी. उन्होंने बाजार में इसे उपलब्ध नहीं कराया.
''एक राखी बनाने में करीब 2 घंटे का वक्त लगा. वहीं बांस की राखी को पूरी तरह तैयार करने, रंगरोगन व अन्य प्रक्रिया में तीन दिनों का वक्त लगा. इस बार बांस की राखी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सेना के तीनों सेनाध्यक्ष को भेजी है.''- कुंदन कुमार राय, कलाकार, मिथिला पेंटिंग

चटक रंगों का इस्तेमाल : कुंदन कुमार राय बचपन से ही कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं. यानी उन्हें सफेद और काले रंग के अलावा और कोई कलर की पहचान नहीं है. इसके बावजूद कुंदन पेंटिंग में विभिन्न चटक रंगों का इस्तेमाल करते हैं. यह उनकी प्रतिभा को और भी निखारता है. इस कार्य में उनकी पत्नी काफी साथ निभाती हैं.

मिल चुके हैं कई अवार्ड : कुंदन राय को भारत लीडरशिप अवार्ड, बिहार गौरव सम्मान, समस्तीपुर रत्न, पर्यावरण योद्धा सम्मान 2018, भारतश्री 2018, यूथ आइकॉन अवार्ड-2018, विजनरी ऑफ इंडिया अवार्ड-2018, ओरेटर ऑफ द मंथ व यंग इंडिया चेंजमेकर पिपुल्स च्वाइस अवार्ड समेत अन्य सम्मान मिल चुके हैं. कुंदन जिले के स्वीप आइकॉन भी रह चुके हैं.

मछली पर पेंटिंग में माहिर : मिथिला संस्कृति में मछली को शुभता, समृद्धि और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए कुंदन की कई प्रमुख पेंटिंग में इसका स्केच जरूर होता है. जैसे सुनीता विलियम्स की स्पेस से सुरक्षित वापसी से सम्बंधित पेंटिंग में उन्होंने मछली की तस्वीर में इसे दर्शाया था.
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