10 साल में पहली बार हायर एजुकेशन में 4.5 करोड़ नामांकन; लड़कियों की भागीदारी 42.2% बढ़ी
Enrolment and Colleges distribution: शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) रिपोर्ट, OBC-SC के सबसे ज्यादा स्टूडेंट एनरोल.

Published : July 9, 2026 at 5:07 PM IST
|Updated : July 9, 2026 at 5:15 PM IST
India Higher Education Survey : यूनेस्को की ओर से इसी साल मई में भारत समेत 150 देशों के हायर एजुकेशन पर रिपोर्ट जारी की गई थी. इसमें बताया गया था कि दुनिया में हायर एजुकेशन का क्रेज बढ़ रहा है. साल 2024 में उच्च शिक्षा लेने वालों की संख्या 26.9 करोड़ तक पहुंच गई. हाल ही में देश के शिक्षा मंत्रालय ने भी उच्च शिक्षा पर रिपोर्ट जारी है. इसके अनुसार 10 साल में पहली बार हायर एजुकेशन में 4.5 करोड़ छात्र-छात्राओं के नामांकन हुए हैं. लड़कियों की संख्या 42.2% तक बढ़ी है. OBC-SC के सबसे ज्यादा स्टूडेंट एनरोल हुए हैं.
ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के नाम से जारी शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में साल 2023-24 का डेटा शामिल किया गया है. स्टडी में देश के कुल 1 हजार 289 विश्वविद्यालय स्तर के संस्थान, 48 हजार 246 कॉलेज, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद जैसे निकायों से अटैच 15 हजार 221 अन्य संस्थान भी शामिल थे. इनमें 18 ऐसी यूनिवर्सिटी भी शामिल थीं, जिनमें केवल छात्राएं पढ़ाई कर रहीं थीं. सर्वे में शामिल सभी संस्थानों ने AISHE पोर्टल पर डेटा जमा किया.
ओबीसी और एससी की भागीदारी ज्यादा : रिपोर्ट के मुताबिक अपने देश में 2023-24 में रजिस्टर्ड कॉलेजों की संख्या 48 हजार 246 रही. जबकि 2014-15 में यह संख्या 38 हजार 498 थी. यानी 9 हजार 748 कॉलेज देश में बढ़ गए. देश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले कुल स्टूडेंट में से 15.5% अनुसूचित जाति (SC) के हैं. 6.4% अनुसूचित जनजाति (ST) के हैं. जबकि 40.1% अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं. इसके अलावा अन्य 38.0% स्टूडेंट्स दूसरे समुदायों से हैं. डेटा से स्पष्ट है कि हायर एजुकेशन में ओबीसी वर्ग और एससी की भागादीरी ज्यादा है. जबकि अन्य जातियों की कम है.

पिछले 5 सालों में एससी के नामांकन में इजाफा : रिपोर्ट के अनुसार साल 2022-23 में हायर एजुकेशन के लिए एसी वर्ग के 69.1 लाख छात्र-छात्राओं ने नामांकन कराए थे. साल 2023-24 में यह बढ़कर 69.7 लाख हो गया है. पिछले 5 सालों में अनुसूचित जाति के नामांकन में 23.2% की बढ़ोतरी हुई है. 2014-15 के डेटा के लिहाज से देखें तो मौजूदा समय इसमें करीब 51.4% का इजाफा हुआ है. यानी उच्च शिक्षा लेने के लिए एससी वर्ग के लोग आगे आ रहे हैं. छात्राएं भी अपनी बेहतर मौजूदगी दर्ज करा रहीं हैं. साल 2022-23 से छात्राओं का नामांकन 33.9 लाख से बढ़कर 35.1 लाख हो गया है. पिछले 5 साल में छात्राओं की कुल बढ़ोतरी 25.2% जबकि 2014-15 से 66.9% ज्यादा है.
उच्च शिक्षा के नामांकन में 7 राज्य आगे : रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा के लिए देशभर के कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी है. हालांकि 7 राज्य नामांकन में सबसे आगे रहे. इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और राजस्थान शामिल हैं. देश में जितने नामांकन हुए उनमें इन राज्यों के स्टूडेंट की कुल हिस्सेदारी 59.0% है. 18 से 23 साल के युवाओं की बात करें तो इस ऐज ग्रुप के प्रत्येक 100 में से 30 युवा किसी न किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला ले रहे हैं. जबकि साल 2014-15 में प्रत्येक 100 में से करीब 23 से 24 स्टूडेंट ही कॉलेज पहुंच पाते थे.
7 साल से लड़कों से आगे चल रहीं लड़कियां : रिपोर्ट के अनुसार पिछले 7 साल से उच्च शिक्षा के लिए कदम बढ़ाने में लड़कों की तुलना में लड़कियां आगे चल रहीं हैं. मौजूदा समय 18 से 23 साल की प्रत्येक 100 में से 31 से ज्यादा लड़कियां उच्च शिक्षा ले रहीं है. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह 31.2% है. करीब 10 साल पहले यानी 2014-15 में 100 में से केवल 22-23 लड़कियां ही कॉलेज पहुंच रहीं थीं. वहीं आदिवासी समाज की बेटियां भी बढ़त बनाए हुए हैं. साल 2014-15 में अनुसूचित जनजाति (ST) की प्रत्येक 100 में से 12 लड़कियां ही कॉलेज जाती थीं. जबकि यह संख्या अब हर 100 में से 24 है. हालांकि साल 2022-23 की तुलना में साल 2023-24 में इनके नामांकन में थोड़ी गिरावट आई है.

ग्रेजुएशन करने वाले 76.8%, पीजी करने वाले 12.9% : रिपोर्ट बताती है कि देश के अलग-अलग संस्थानों में ग्रेजुएशन करने वाले स्टूडेंट की संख्या लगभग 76.8% है. जबकि पीजी यानी पोस्ट ग्रेजुएशन करने वालों की संख्या महज 12.9% है. अंडरग्रेजुएट (UG) में नामांकन करा चुके स्टूडेंट की संख्या ज्यादा है. वहीं विषयों में रुचि की बात करें तो कला संकाय में नामांकन कराने वाले स्टूडेंट 32.1% है. यह सबसे ज्यादा है. दूसरे नंबर पर विज्ञान है. इसमें करीब 13.5% स्टूडेंट ने नामांकन कराया. वहीं इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में 12.9% स्टूडेंट जबकि कॉमर्स में 12.0% ने नामांकन कराया.
पीजी में साइंस को चुन रहे ज्यादा स्टूडेंट : रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पीजी में स्टूडेंट किन विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसके अनुसार 18.6% स्टूडेंट सोशल साइंस में रुचि दिखा रहे हैं. करीब 18.2% मैनेजमेंट विषय चुन रहे हैं. विज्ञान-तकनीक (STEM-Science Technology Engineering Mathematics) में करीब एक करोड़ से अधिक स्टूडेंट ने दाखिला लिया. विज्ञान में लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा हैं. सरकारी विश्वविद्यालयों में करीब 68.1% छात्रों के नामांकन हैं, जबकि निजी विश्वविद्यालयों में यह 31.9% है.
अमेरिका के भी छात्र अपने देश में कर रहे पढ़ाई : रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में सबसे ज्यादा नेपाल के स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं. इनकी संख्या करीब 24.1% है. वहीं UAE के स्टूडेंट की संख्या 7.0%, यूनाइटेड स्टेट्स की 5.9%, बांग्लादेश की 5.9%, नाइजीरिया की 5.5%, जबकि जिम्बाब्वे के स्टूडेंट की संख्या साल 2023-24 में 4.0% रही. अहम बात ये है कि भारत में जितने भी विदेश के स्टूडेंट पढ़ाई के लिए आते हैं, उनमें से करीब 63.8% स्टूडेंट केवल 10 देशों के हैं. बाकी देशों के स्टूडेंट की संख्या इसकी तुलना में कम ही है.

जिला स्तर पर बेंगलुरु में सबसे ज्यादा कॉलेज : रिपोर्ट बताती है कि देश के हर जिले में काफी कॉलेज हैं. देश के टॉप 10 जिलों में कुल कॉलेजों की 29.9% संख्या मौजूद है. यानी इन जिलों में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सबसे ज्यादा कॉलेज हैं. बेंगलुरु जिले में सबसे ज्यादा 1148 कॉलेज हैं. इसी तरह जयपुर में 742, पुणे में 517, हैदराबाद में 465, प्रयागराज में 408, नागपुर में 354, रंगा रेड्डी में 338, भोपाल में 327 कॉलेज हैं. वहीं देश के 138 जिले ऐसे भी हैं जहां कॉलेजों की संख्या एवरेज में है. यानी न अधिक और न ही कम. ऐसे प्रत्येक जिले में 100 से लेकर 299 कॉलेज हैं.
प्रत्येक एक लाख की आबादी पर देश में 32 कॉलेज : देश में 18 से 23 साल वाली प्रत्येक एक लाख की आबादी पर करीब 32 कॉलेज हैं. स्टेट के आधार पर इतनी ही आबादी पर कॉलेजों की संख्या देखी जाए तो कर्नाटक में 69, तेलंगाना में 56, आंध्र प्रदेश में 51, हिमाचल प्रदेश में 51, केरलम में 50, राजस्थान में 47 जबकि तमिलनाडु में 43 कॉलेज हैं. प्रत्येक एक लाख की आबादी के हिसाब से यहां कॉलेजों की संख्या ज्यादा है. वहीं देशभर में कुल कॉलेजों की संख्या की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कॉलेज हैं. यूपी में 8,625, महाराष्ट्र में 5,380, कर्नाटक में 4,529, राजस्थान में 4,344, तमिलनाडु में 2,983, मध्य प्रदेश में 2,713, आंध्र प्रदेश में 2,587, गुजरात में 2,521, तेलंगाना में 2,160 और पश्चिम बंगाल में 1,588 कॉलेज हैं.
टीचर्स की संख्या 17.3 लाख, क्या पढ़ रहे विदेशी स्टूडेंट? : रिपोर्ट के अनुसार साल 2023-24 में टीचर्स की कुल संख्या 17.3 लाख थी. वहीं नॉन-टीचिंग स्टाफ की संख्या 15 लाख 82 हजार 279 थी. इसमें लगभग 58.6% पुरुष जबकि 41.4% महिलाएं थी. नॉन-टीचिंग स्टाफ में प्रति 100 पुरुषों पर महिलाओं की औसत संख्या 71 थी. वहीं जो भी विेदेशी स्टूडेंट अपने देश में पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ग्रेजुएशन करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा 73.6% है. पीजी करने वालों की संख्या 16.8% है. बाकी के स्टूडेंट डिप्लोमा सर्टिफिकेट समेत अन्य कोर्स कर रहे हैं.

पीजी लेवल पर किस फैकल्टी में कितने स्टूडेंट? : रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर साल 2023-24 में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) में 7.5 लाख स्टूडेंट ने नामांकन करा रखा था. इसी तरह मास्टर ऑफ साइंस (MSc) में 3.6 लाख, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) में 2.8 लाख और मास्टर ऑफ कॉमर्स (MCom) में 1.8 लाख स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे थे. सर्वे बताता है कि हायर एजुकेशन लेने के लिए पहले की तुलना में युवा अब खुलकर आगे आने लगे हैं. Census of India के अनुसार 1970 के दशक में अपने देश में 10 में से एक से भी कम भारतीय स्नातक थे. जबकि साल 2024 में यह प्रत्येक 10 में से एक हो गया. फ्रांस में 25 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों में प्रत्येक 4 में से एक शख्स स्नातक है.
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