विधवाओं का गांव बना ढोढराही! टीबी ने छीन ली 20 से अधिक जिंदगी, गांव में नजर आते हैं महिला और बच्चे
पलामू के ढोढराही गांव में टीबी से पुरुषों की मौत हो रही है. यह गांव विधवाओं का गांव बन गया है. नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Published : June 11, 2026 at 2:11 PM IST
|Updated : June 11, 2026 at 8:55 PM IST
पलामू: झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड में स्थित ढोढराही गांव विधवाओं का गांव बनकर रह गया है. टीबी ने गांव की 20 से अधिक महिलाओं को विधवा बना दिया है. आलम यह है कि गांव में सिर्फ महिला और बच्चे ही नजर आते हैं.
दरअसल, ढोढराही पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है. यह रामगढ़ प्रखंड के हुंटार पंचायत के अंतर्गत आता है. अनुसूचित जाति बहुल इस गांव में करीब 25 परिवार रहते हैं, जिसमें से 20 अधिक परिवार में विधवा महिलाएं हैं. इन परिवारों में कोई भी व्यस्क पुरुष नहीं है. गांव में मौजूद एक व्यक्ति अभी भी टीबी की बीमारी से जूझ रहा है.
अपने पति की मौत के बाद कई महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ गांव छोड़ दिया है. उनके घर के दरवाजों पर ताला लटका है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछ्ले एक दशक से एक-एक कर के लोगों की मौत हुई है और सभी की मौत टीबी की बीमारी से हुई है.
स्टोन माइंस में मजदूरी करने जाते थे गांव के लोग
ढोढराही गांव के अधिकतर पुरुष बिहार के रोहतास के करवंदिया में स्टोन माइंस में मजदूरी के लिए जाते थे. वहीं कई लोग बीमार हो गए. बाद में उनकी मौत हो गई. 2013-14 से करवंदिया के इलाके में गांव के लोगों का पलायन शुरू हुआ था. फिर 2016-17 से टीबी की बीमारी से लोगों की मौत होनी शुरू हो गई. गौर करने वाली बात यह है कि ढोढराही में टीबी से सिर्फ पुरूषों की ही मौत हुई है, महिलाओं और बच्चों के टीबी से ग्रसित होने की पुष्टि नहीं हुई है. पुरुषों की मौत के बाद फिलहाल गांव की महिलाएं मजदूरी करती हैं और ईंट भट्ठों में कार्य करती हैं. कई बच्चे भी मजदूरी कर रहे हैं.

केस स्टडी 01
ढोढराही गांव की रहने वाली लीलावती देवी के पति की चार वर्ष पहले बीमारी से मौत हुई थी. उनके एक बेटे की भी बीमारी से मौत हुई है. लीलावती देवी और उनकी बहू मिलकर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. लीलावती देवी बताती हैं कि उनके पति करवंदिया में मजदूरी करने गए थे. बाद में बीमार हो गए. कोई रोजगार नहीं था तो क्या करते, पत्थर तोड़ने गए थे.

उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी से चार पांच वर्ष पहले उनकी मौत हो गई. इलाज करवाया लेकिन ठीक नहीं हुए. गांव में जहां तक देखिए विधवा ही विधवा नजर आएंगी, गांव के लोगों की मौत टीबी से हुई है. गांव में लोगो को टीबी क्यों हो रही है, इसकी जांच नहीं हो रही है.
केस स्टडी 02
बचनी देवी नामक महिला के पति की मौत 2017 में टीबी के बीमारी से हुई थी. बचनी देवी के छह बच्चे हैं. वह महुआ चुनकर और मजदूरी कर के सभी का पालन पोषण कर रही हैं. बचनी देवी ने ईटीवी भारत को बताया कि 2017 में टीबी की बीमारी से उनके पति की मौत हो गई थी, वह गांव में जहां रहती हैं, वहां दो महिलाएं विधवा हैं, बाकि दूसरे टोला में भी अधिकतर महिलाएं विधवा हैं. मजदूरी कर और महुआ चुनकर वह बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं.
केस स्टडी 03
बतिया कुअंर के भी पति की मौत टीबी की बीमारी से हुई है. वह बताती हैं कि उनके पति मजदूरी करने गए थे, लौटने के बाद बीमारी पड़ गए और उनकी मौत हो गई. गांव में कोई रोजगार का साधन नहीं है, गांव की कई महिलाएं विधवा हो गई हैं. वह कहती हैं

वहीं तेतरी कुंअर कहती हैं कि टीबी की बीमारी से पुरुषों की मौत हो रही है, जवान होते ही लोग मर जा रहे हैं. महिलाएं इधर-उधर काम कर रही हैं, किसी तरह परिवार को संभाल रही हैं. बच्चों को छोड़कर जाना पड़ता है. बच्चे किसी तरह जीवन बसर कर रहे हैं. लोग आगे नहीं पढ़ पा रहे हैं, जवान होते ही मौत हो जा रही है.
कई परिवारों ने छोड़ दिया है गांव
ढोढराही गांव में मौत के बाद कई परिवार पलायन कर गए हैं. गांव से करीब दो किलोमीटर दूर सरकारी स्कूल है जबकि तीन किलोमीटर दूर स्वास्थ्य केंद्र है. गांव के बगल से नदी गुजरती है, जबकि गांव के अगल बगल में ईंट भट्ठे हैं, जहां महिलाएं मजदूरी के लिए जाती हैं.

गांव की शिला देवी ने बताया कि टीबी की बीमारी से लोगों की मौत हो रही है. गांव की अधिकतर महिलाएं विधवा हो गई हैं. करवंदिया में काम करने वाले लोगों की मौत हो गई. उनके पड़ोस में रहने वाले भोदा भुईयां की टीबी से मौत हुई थी. मौत के बाद भोदा भुईयां की पत्नी उषा देवी गांव छोड़ कर चली गई हैं. पुरुषों की मौत के बाद परिवार बेसहारा हो जा रहा है, गांव के लोग काफी परेशान हैं. पिछले कुछ वर्षों में गांव में टीबी की बीमारी से बीरेंद्र भुईयां, बितन भुईयां, सुकन भुईयां, रामराज भुईयां, बंशी भुईयां, भिखारी भुईयां, परमेश्वर भुईयां, भोदा भुईयां, श्रवण भुईयां, पचू भुईयां समेत कई ग्रामीणों की मौत हुई है.

2022 में हुए सर्वे में मिले थे टीबी के तीन मरीज
ढोढराही गांव में 2022 में ग्रामीणों की टीबी की जांच करवाई गई थी. उस दौरान में गांव में तीन टीबी के मरीज मिले थे. पुरुषों की मौत के बाद उनकी विधवाओं और बच्चों को मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए और उनके पुनर्वास के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए. 2022 के बाद से गांव में कोई भी मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया और ना ही किसी की भी टीबी की जांच की गई है. इलाके में बड़ी संख्या में ग्रामीण शराब का भी सेवन करते हैं.

स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच
ढोढराही गांव में टीबी से हो रही पुरुषों की मौत को लेकर सिविल सर्जन से सवाल पूछा गया. जिसमें उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ढोढराही के इलाके में स्पेशल मेडिकल कैंप लगाएगा और एक्स-रे मशीन लेकर जाएगा. सभी ग्रामीणों की जांच की जाएगी और उनकी मेडिकल स्क्रीनिंग की जाएगी.
पलामू के सिविल सर्जन डॉक्टर अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गांव के लोगों की कैसे मौत हुई है, इसकी जांच की जाएगी. टीबी के अलावा किसी और बीमारी से तो लोगों की मौत नहीं हुई है, इसकी भी जांच की जाएगी. सवाल यह उठ रहा है कि टीबी सिर्फ पुरुषों को ही क्यों हो रही है, महिलाओं या बच्चों को क्यों नहीं? इस विषय पर भी जांच की जाएगी. सर्वे के दौरान सिर्फ तीन मामले ही टीबी के मिले थे.
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