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भारत ने अमेरिका के दावों को गलत बताया, 500 फीसदी टैरिफ पर भी दिया दो टूक जवाब

व्यापार समझौते पर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री की टिप्पणी गलत, भारत का हित सबसे ऊपर, बोला विदेश मंत्रालय.

MEA Spokesperson
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 9, 2026 at 7:19 PM IST

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Updated : January 9, 2026 at 7:30 PM IST

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नई दिल्ली : भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक की इस टिप्पणी को गलत बताया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता इसलिए सफल नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात नहीं की थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने उनकी टिप्पणियों को देखा है. वह गलत है. भारत और अमेरिका दोनों लगातार बातचीत करते रहे हैं. पिछले साल 13 फरवरी को भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध थे. उससे पहले भी हमने कई दौर की बातचीत की तथा नई दिल्ली इसे अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है." उन्होंने कहा कि समझौता दोनों के लिए लाभकारी हो, यह भारत का स्टैंड रहा है और हम इसे पूरा करने के लिए तत्पर हैं.

मीडिया से बात करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि संयोगवश, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 के दौरान आठ बार फोन पर बातचीत की, जिसमें हमारी व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई.

यहां आपको बता दें कि अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी लुटनिक ने दावा किया था कि क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत नहीं की, इसलिए डील नहीं पूरी हो सकती है. लुटनिक ने यह भी कहा कि उन्होंने डील को लेकर फाइनल किया था, लेकिन शर्त यही थी कि पीएम मोदी को पहले कॉल करना पड़ेगा. आज भारत ने लुटनिक के दावों को पूरी तरह से नकार दिया.

इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि आप अमेरिका के प्रस्तावित बिल पर क्या कहना चाहेंगे, जिसमें उन्होंने रूस से तेल खरीदने वालों पर 500 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम भारत के हितों का ध्यान रखकर फैसला लेते है. उन्होंने कहा कि हां, मुझे भी इस बिल की जानकारी है. बिल को लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है

गौरतलब है कि रूसी तेल के सबसे बड़े ग्राहक चीन और भारत हैं. अगर अमेरिका में यह बिल पारित हो गया, तो इन देशों पर टैरिफ बढ़ जाएगा. उससे भी बड़ी बात ये है कि इस बिल में प्रावधान रखा गया है कि टैरिफ बढ़ाने का पावर राष्ट्रपति के पास होगा, यानि उन्हें इसके लिए कांग्रेस से इजाजत नहीं लेनी होगी.

विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि ऊर्ज स्रोतों को लेकर भारत ने जो रूख बरकरार रखा है, वह आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि हम बदलती हुई परिस्थिति और बदले हुए डायनामिक्स के अनुसार फैसले लेते हैं. हम 1.4 अरब भारतीय लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स से सस्ती एनर्जी हासिल करने की जरूरत से गाइड होते हैं और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे.

प्रवक्ता ने साफ कर दिया कि किसी के भी दबाव में भारत अपना फैसला नहीं बदलेगा और हमारा ध्यान लोगों को सस्ती ऊर्जा मुहैया करवाने पर है. हम दुनिया भर के बाजारों पर नजर बनाए रखते हैं.

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Last Updated : January 9, 2026 at 7:30 PM IST