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2025 में समुद्री घटनाओं में नाविकों की मौतें 40 प्रतिशत बढ़ीं, DGS की रिपोर्ट

2025 में समुद्री घटनाओं में मौतें 40 प्रतिशत बढ़ी हैं और 104 घटनाओं में से 77 खुले समुद्र में हुईं. गौतम देबरॉय की रिपोर्ट...

Marine casualties rise in 2025, occupational accidents continue to endanger Indian seafarers
प्रतीकात्मक तस्वीर (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 7, 2026 at 7:29 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली: भारत के समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में 2025 में चिंताजनक गिरावट देखी गई. जहाजरानी महानिदेशालय (DGS) के मुताबिक 104 समुद्री घटनाओं में 31 मौतें हुई और 83 अन्य घायल हुए, जबकि 2024 में 22 मौतें और 46 घायलों की रिपोर्ट की गई थी. ताजा आंकड़े समुद्री संचालन की मानवीय लागत में तेजी से वृद्धि का संकेत देते हैं.

DGS के विश्लेषण से पता चलता है कि 2025 में 104 घटनाओं में से 77 खुले समुद्र (High seas) में हुईं, जिससे तट से दूर काम करने वाले भारतीय नाविकों के सामने आने वाले खतरों का पता चलता है, जहां इमरजेंसी मेडिकल मदद और बचाव के काम में अक्सर देरी होती है.

खुले समुद्र, समुद्र के वे हिस्से हैं जो किसी भी देश के प्रादेशिक जलक्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZs) से बाहर होते हैं. समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि (UNCLOS) के तहत, खुले समुद्र को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र माना जाता है और यह किसी एक देश की संप्रभुता के तहत नहीं आता है.

मरीन एक्सपर्ट श्रीमंत चटर्जी ने ईटीवी भारत से कहा, "खुले समुद्र में होने वाले हादसे खास तौर पर इसलिए गंभीर होते हैं क्योंकि जहाज सबसे पास के समुद्र तट से सैकड़ों नॉटिकल मील दूर चलते हैं, जहां तुरंत बचाव, चिकित्सा निकासी और बाहरी आपातकालीन मदद अक्सर नहीं मिल पाती. ऐसी स्थिति में, चालक दल को हादसे के बाद शुरुआती अहम घंटों में पूरी तरह से जहाज पर मौजूद संसाधनों, ट्रेनिंग और इमरजेंसी तैयारियों पर निर्भर रहना पड़ता है. सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी से मौत का खतरा काफी बढ़ सकता है, खासकर आग, बाढ़, मशीनरी एक्सीडेंट या मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में."

चटर्जी के अनुसार, समुद्र में होने वाली हर घटना, कड़े सेफ्टी प्रोटोकॉल, नियमित ड्रिल, प्रभावी संचार प्रणाली और काम से जुड़ी सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने की अहमियत बताती है.

खास बात यह है कि दो साल के समुद्री हादसों का डेटा एक परेशान करने वाला ट्रेंड दिखाता है. 2024 में मरने वालों की संख्या 22 से बढ़कर 2025 में 31 हो गई, जो लगभग 41 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि घायलों की संख्या 46 से बढ़कर 83 हो गई, जो 80 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है. आंकड़ों से पता चलता है कि सुरक्षा नियमों और ट्रेनिंग में सुधार के बावजूद, जहाज पर जोखिम अभी भी बहुत ज्यादा हैं.

2024 की मरीन सेफ्टी इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में पहले ही काम से जुड़ी घटनाओं को हादसों का मुख्य कारण बताया गया था, जिसमें 47 मामले शामिल थे, जिनमें 7 मौतें और 43 घायल हुए थे. ताजा 2025 विश्लेषण में फिर से रूटीन वर्कप्लेस एक्सीडेंट को समुद्री दुर्घटनाओं में मौतों का सबसे बड़ा योगदान देने वाला बताया गया है.

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