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'समाज में महिलाओं को देखने का नजरिया बदलना जरूरी': चेरुकुरी शैलजा किरण

मार्गदर्शी चिटफंड की एमडी ने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में स्थित इफ्काई विश्वविद्यालय में आयोजित 'वीमेन 5.0' सम्मेलन को संबोधित किया.

Margdarshi MD Shailaja Kiron
मार्गदर्शी चिटफंड की एमडी शैलजा किरण. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : December 12, 2025 at 1:14 PM IST

4 Min Read
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हैदराबाद: मार्गदर्शी की प्रबंध निदेशक (MD) चेरुकुरी शैलजा किरण ने कहा कि समाज में महिलाओं को देखने का नजरिया बदलना चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिलाएं सशक्त हो रही हैं, सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और अग्रणी बन रही हैं. गुरुवार को शकरपल्ली, रंगारेड्डी जिले में स्थित इफ्काई विश्वविद्यालय में आयोजित 'वीमेन 5.0 (पावर.. प्रोग्रेस.. पॉसिबिलिटीज)' सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहीं थीं.

"महिलाओं को देखने के नजरिए में बदलाव की जरूरत है. समान अवसर, सम्मान और समानता आवश्यक है. मैं परिवार द्वारा दिए गए साहस के कारण इस स्तर तक पहुंची हूं."- चेरुकुरी शैलजा किरण, मार्गदर्शी की प्रबंध निदेशक

शैलजा किरण के मुख्य विचार:

उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ-साथ महिलाओं की सोच भी बदल रही है और वे पुरुषों के बराबर काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सहानुभूति की नहीं, बल्कि पहचान की जरूरत है. महिलाओं के लिए सम्मान और सुरक्षा कानूनों से नहीं मिलती... वे केवल घर, परिवार और समाज के नजरिए में बदलाव से ही संभव हैं.

उन्होंने समझाया कि यदि परिवार में पिता, पति और बच्चे उनके साथ खड़े रहें, तो महिलाओं में जबरदस्त आत्मविश्वास पैदा होगा और वे साहस के साथ दुनिया का सामना करेंगी.

शैलजा किरण ने कहा कि वह अपने परिवार द्वारा दिए गए साहस के कारण ही इस स्तर तक पहुंची हैं. उन्होंने बताया कि मार्गदर्शी चिट फंड अब 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर पहुंच गया है. चार राज्यों में 129 शाखाएं संचालित कर रहा है.

प्रेरणादायक और रचनात्मक हस्तियांः

शैलजा किरण ने कहा कि इतिहास बदलने वाली और इतिहास बनाने वाली महिलाओं के साथ-साथ कई प्रेरणादायक हस्तियां भी हैं. उन्होंने याद किया कि सावित्रीबाई फुले ने 1846 में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया था, यह दूरदृष्टि रखते हुए कि शिक्षा से सब कुछ हासिल किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि सुधा मूर्ति, जिन्होंने पुरुष-प्रधान समाज में टेल्को में एक महिला इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया, अब इंफोसिस की रीढ़ बन गई हैं. मिसाइलों के निर्माण में अपनी पहचान बनाने वाली डॉ. टेसी थॉमस के जीवन को उन्होंने प्रेरणादायक बताया. उन्होंने कहा कि भविष्य में राजनीति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका बढ़ेगी और वे नीतिगत निर्णय लेने के स्तर तक पहुंचेंगी.

शैलजा किरण ने कहा कि युवतियां न केवल स्वयं आगे बढ़ रही हैं, बल्कि व्यावसायिक क्षेत्र में दूसरों का मार्गदर्शन करने के लिए नए रास्ते भी बना रही हैं. उन्होंने कहा कि फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से कम से कम 10 प्रतिशत में महिलाएं सीईओ हैं.

नई कंपनियां शुरू करने वाली महिलाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. 50 साल की उम्र में नायका (Nykaa) कंपनी की स्थापना करने वाली फाल्गुनी नायर और युवा उद्यमी रोशनी नाडर मल्होत्रा इसके नवीनतम उदाहरण हैं.

मार्गदर्शी की एमडी ने कहा कि अगर महिलाएं नेतृत्व करेंगी, तो समाज आगे बढ़ेगा, अगर वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी, तो उद्योग बढ़ेंगे, और अगर वे अधिक सफलताएं हासिल करेंगी, तो देश आगे बढ़ेगा.

अन्य वक्ताओं ने क्या कहाः

सम्मेलन में बोलते हुए, आईआईटी हैदराबाद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर राज्यलक्ष्मी ने प्रौद्योगिकी में बदलाव के साथ आने वाले उन्नत परिवर्तनों में महिलाओं की भूमिका के बारे में बताया.

इक्फाई विश्वविद्यालय की डीन सुनीथारानी ने कहा कि समाज में महिलाओं की प्रगति के बावजूद, अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं. प्रभारी कुलपति कोटिरेड्डी ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यबल में उनकी सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है.

रजिस्ट्रार एस. विजयलक्ष्मी ने स्वागत भाषण दिया. हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर वीमेन स्टडीज की प्रोफेसर दीपा श्रीनिवास और अन्य ने भी इसमें भाग लिया.

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