'मातृभाषा की रक्षा करना हर घर की जिम्मेदारी', तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन में एमडी चेरुकुरी शैलजा किरण का आह्वान
तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन में अपने संबोधन में एमडी चेरुकुरी शैलजा किरण ने तेलुगु कवियों के साथ-साथ रामोजी राव के योगदान को याद किया.

Published : March 2, 2026 at 2:59 PM IST
अमलापुरम (आंध प्रदेश): "संस्कृति तभी बच सकती है जब तेलुगु बचेगी. समाज तभी खड़ा रह सकता है जब संस्कृति खड़ी रहे. तेलुगु हमारा आत्म-सम्मान है, हमारी भावना है." मार्गदर्शी चिट फंड (Margadarsi Chit Fund) की मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) चेरुकुरी शैलजा किरण ने डॉ. बीआर अंबेडकर कोनासीमा जिले के अमलापुरम में हुए तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन में यह आह्वान किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हम अपनी मातृभाषा की रक्षा करने में नाकाम रहे तो भविष्य हमें माफ नहीं करेगा.
कोनासीमा में विश्व तेलुगु सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ. गोदावरी ग्लोबल यूनिवर्सिटी के चांसलर और कोनासीमा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) के चेयरमैन केवीवी सत्यनारायण राजू (चैतन्य राजू) की अध्यक्षता में यह सम्मेलन हुआ. इसमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं.
तेलुगु भाषा को समृद्ध बनाने वाले महान लोगों की मूर्तियां सम्मेलन का मुख्य आकर्षण थीं, जिन्हें देखकर बड़ी संख्या में युवा सेल्फी लेने के लिए उत्सुक थे. छात्रों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने तेलुगु परंपराओं और विरासत का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया.
सम्मेलन में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल जस्टिस (रिटायर्ड) अब्दुल नजीर, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, तेलंगाना हाई कोर्ट के कई जज, सांसद, विधायक, DRDO के पूर्व चेयरमैन सतीश रेड्डी और मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर आरपी पटनायक शामिल हुए.
आरपी पटनायक ने 'तेलुगु भाषा कम्मदानम' और 'वन…वन…नीलकशमलोना' जैसे लोकप्रिय गाने गाकर लोगों का मन मोह लिया. इससे पहले, उन्होंने चैतन्य राजू के साथ तेलुगु महासभा के पोस्टल स्टैम्प का अनावरण किया. अलग-अलग प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार बांटे गए.
विश्व तेलुगु सम्मेलन के दूसरे दिन समारोह में आए लोगों को संबोधित करते हुए, शैलजा किरण ने जोर दिया कि तेलुगु को बचाना सिर्फ विद्वानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर तेलुगु घर की जिम्मेदारी है. उन्होंने परिवारों से घर पर तेलुगु बोलने और बच्चों को उनकी मातृभाषा में परवरिश करने की अपील की. उन्होंने कहा कि अध्ययनों से पता चलता है कि जिन बच्चों की अपनी मातृभाषा में मजबूत पकड़ होती है, वे दूसरी भाषाएं तेजी से सीखते हैं और आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हैं.
एमडी शैलजा ने अपने संबोधन में तेलुगु कवि नन्नया, तिक्कन सोमयाजी, एर्राना (Erranna), श्री कृष्णदेवराय, कंदुकुरी वीरेशलिंगम, नंदमुरी तारक रामा राव और रामोजी ग्रुप के संस्थापक रामोजी राव के योगदान को याद किया. उन्होंने पुराने ग्रंथों को डिजिटाइज करने, लेखकों, कवियों और कलाकारों को बढ़ावा देने और शोध में युवाओं को शामिल करने पर जोर दिया.
शैलजा किरण ने सम्मेलन में रामोजी राव प्लेटफॉर्म पर छात्रों के साथ बातचीत में हिस्सा लिया और उनके सवालों के जवाब दिए. उन्होंने छात्रों को बहुमूल्य सुझाव भी दिए.
सवाल: पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें?
शैलजा किरण: "छात्र जीवन में हर मिनट कीमती होता है. आपको प्लान के हिसाब से कड़ी मेहनत करनी होती है. लक्ष्य हासिल करने के लिए अनुशासन, कड़ी मेहनत और उससे भी ज्यादा निरंतरता की जरूरत होती है. तभी सफलता मुमकिन है."
सवाल: परिवार और करियर में तालमेल कैसे बिठाएं?
शैलजा किरण: समाज में, चाहे पुरुष हो या महिला, स्वार्थ (Selfishness) छोड़ देना चाहिए. आज की पीढ़ी में यह स्वभाव आम है. हमें यह भी सोचना चाहिए कि हम समाज को क्या दे रहे हैं. हमें तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन करना चाहिए. अगर हममें परिस्थितियों के अनुकूल होने की क्षमता है, तो हम अच्छे तालमेल से आगे बढ़ सकते हैं."
सवाल: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनने के बाद भी अपराध क्यों नहीं रुक रहे?
शैलजा किरण: सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए. अकेले गैर-जरूरी जगहों पर न जाएं. हमें कॉम्बैट स्पोर्ट्स और मार्शल आर्ट्स सीखना चाहिए. हर कोई अच्छा है, बस कुछ ही अपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं."
उन्होंने सभी को यह शपथ दिलाते हुए बातचीत सत्र का समापन किया: "आइए हम तेलुगु से प्रेम करें, तेलुगु का अभ्यास करें और गर्व से तेलुगु को आगे बढ़ाएं."
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