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मार्गदर्शी की MD शैलजा किरण को 'महिला नेतृत्व पुरस्कार', 30 की उम्र में संभाली थी 100 करोड़ की कंपनी

मार्गदर्शी चिट फंड की एमडी शैलजा किरन को बेंगलुरु में प्रतिष्ठित 'प्रोफेसर जे. फिलिप महिला नेतृत्व पुरस्कार' से सम्मानित किया गया.

Margadarsi MD Sailaja Kiron
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करतीं मार्गदर्शी की MD शैलजा किरण. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 29, 2026 at 9:34 PM IST

6 Min Read
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बेंगलुरु: मार्गदर्शी चिट फंड प्राइवेट लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) शैलजा किरण को शनिवार को यहां आयोजित एक समारोह में उनकी व्यावसायिक उपलब्धियों के लिए 'प्रोफेसर जे. फिलिप महिला नेतृत्व पुरस्कार' (Professor J. Philip Women Leadership Award) से सम्मानित किया गया. उन्होंने इस पुरस्कार को अपने सहयोगियों, कर्मचारियों और परिवार को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि हर उपलब्धि सामूहिक प्रयास का ही परिणाम होती है.

बेंगलुरु के जाइम (XIME) में आयोजित 'एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैनेजमेंट स्कूल्स' (AIMS) के 37वें स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए शैलजा किरण ने कहा, "यह पुरस्कार विशेष रूप से बेहद मायने रखता है क्योंकि इसमें प्रोफेसर जे. फिलिप का नाम जुड़ा है- एक ऐसे शिक्षाविद् जो मानते थे कि संस्थानों को ऐसी प्रतिभाएं तैयार करनी चाहिए जो योग्यता, चरित्र और करुणा से भरपूर लीडर बनें."

मार्गदर्शी की MD शैलजा किरण को 'महिला नेतृत्व पुरस्कार' से सम्मानित किया गया. (ETV Bharat)

'मैनेजमेंट एजुकेशन के भविष्य के लिए दूरदर्शी नेतृत्व की भूमिका' थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में शिक्षाविद्, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और छात्र एक साथ जुटे. समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट की शिक्षा को अब पारंपरिक क्लासरूम और किताबों से आगे बढ़ना होगा, ताकि छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी के दौर में तेजी से बदलती दुनिया के लिए तैयार किया जा सके.

शैलजा किरण ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थान केवल अपनी पिछली उपलब्धियों के भरोसे नहीं बैठ सकते, बल्कि उन्हें लगातार वैश्विक जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना होगा. उन्होंने रेखांकित किया कि सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल बदलाव और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स में निवेश करना बेहद जरूरी है.

उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी को इंसानों को सशक्त बनाना चाहिए, न कि उनकी जगह लेनी चाहिए. मैनेजमेंट संस्थानों को टेक्नोलॉजी को अपनाने के साथ-साथ सहानुभूति, ईमानदारी और जिम्मेदारी जैसे मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करना होगा."

महज 30 साल की उम्र में 12 शाखाओं और 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के अपने अनुभव को याद करते हुए उन्होंने साझा किया कि कल्पनाशीलता लीडर्स को वहां भी विकास के अवसर देखने की क्षमता देती है, जहां दूसरों को सिर्फ सीमाएं नजर आती हैं.

उन्होंने आगे कहा, "मैनेजमेंट शिक्षा का मुख्य उद्देश्य नैतिक निर्णय लेने वाले, इनोवेटिव विचारक, समस्याओं को सुलझाने वाले, उद्यमी और राष्ट्र निर्माता तैयार करना होना चाहिए. आज के छात्र ही कल के लीडर बनेंगे, और संस्थान उन्हें एक सही आकार देने की यह बड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं."

मार्गदर्शी की एमडी ने यह भी रेखांकित किया कि दूरदर्शी नेतृत्व का मतलब सिर्फ किसी बड़े पद पर होना नहीं है. उन्होंने कहा, "इसके लिए संभावनाओं को पहचानने, स्थापित तौर-तरीकों पर सवाल उठाने और भविष्य की चुनौतियों का डटकर सामना करने के साहस की जरूरत होती है."

शैलजा किरण ने आगे कहा कि आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए हर जानकारी आसानी से उपलब्ध है, तब शिक्षकों को छात्रों को यह सिखाना चाहिए कि कैसे सोचें, विश्लेषण करें, सवाल उठाएं, नए प्रयोग करें और नैतिक फैसले लें. उन्होंने बढ़ते पर्यावरणीय संकटों के बीच धरती की रक्षा के लिए गहन रिसर्च और ठोस कदम उठाने की भी अपील की.

क्लासरूम की पढ़ाई और उद्योग जगत की उम्मीदों के बीच के अंतर की ओर इशारा करते हुए, शैलजा किरण ने शिक्षण संस्थानों से इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री मेंटॉरिंग को बढ़ाने का आग्रह किया. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के स्टार्टअप अभियान ने यह साबित कर दिया है कि कैसे हमारे युवा साधारण से विचारों को बड़े सामाजिक मूल्य वाले उद्योगों में बदल सकते हैं.

ओंकार सिंह बत्रा, सैम सांगी और अद्वैत ठाकुर जैसे युवा इनोवेटर्स का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि साहस, विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता और रचनात्मकता ही उद्यमिता की बुनियाद हैं. उन्होंने विनीषा उमाशंकर का भी जिक्र किया, जिन्होंने कोयले वाली इस्त्री का इस्तेमाल करने वाले धोबियों की स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन करने के बाद सौर ऊर्जा से चलने वाली मोबाइल इस्त्री गाड़ी (आयरनिंग व्हीकल) विकसित की थी.

शैलजा किरण ने कहा, "जब छात्रों को बारीकी से देखने, सवाल उठाने और नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो छोटी-छोटी समस्याएं भी बड़े समाधानों और पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस मॉडल्स का रास्ता खोल देती हैं." नैतिक नेतृत्व पर जोर देते हुए शैलजा किरण ने कहा कि नैतिकता के बिना मिलने वाली सफलता बहुत कम समय के लिए होती है. ईमानदारी से विश्वास पैदा होता है, विश्वास से रिश्ते बनते हैं और यही रिश्ते आगे चलकर बड़े संस्थानों और राष्ट्र का निर्माण करते हैं.

उन्होंने आगे जोड़ा कि नेतृत्व को इस बात से नहीं मापा जाता कि कितने लोग आपके नीचे काम करते हैं, बल्कि इससे मापा जाता है कि आपकी वजह से कितने लोगों का विकास हुआ है. महान लीडर्स नए लीडर्स तैयार करते हैं, न कि सिर्फ अपने फॉलोअर्स. छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने आग्रह किया कि वे निडर होकर सपने देखें, ईमानदारी से काम करें, लगातार सीखते रहें और अपने माता-पिता व शिक्षकों का सम्मान करें.

इस अवसर पर राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव, और चंद्रा ग्रुप व जीआरजी ट्रस्ट की मैनेजिंग डायरेक्टर व संस्थापक ट्रस्टी, और सीआईआई (CII) ग्लोबल लीडरशिप काउंसिल व सीआईआई हायर एजुकेशन काउंसिल की को-चेयरपर्सन नंदिनी रंगास्वामी भी मौजूद थीं.

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