मंडी शिवरात्रि महोत्सव: अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परेड में दिखा वैश्विक लोक संस्कृतियों का संगम, 11 देशों की टीम ने बिखेरा जलवा
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में कल्चरल परेड में देश-विदेश के 35 सांस्कृतिक दलों ने शहर को रंग, संगीत और लोक परंपराओं से सराबोर कर दिया.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 11:55 AM IST
मंडी: अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव 2026 में लगातार सांस्कृतिक कार्यक्रम का दौर जारी है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के तहत आयोजित भव्य अंतरराष्ट्रीय कल्चरल परेड में 35 सांस्कृतिक दलों ने भाग लेकर शहर को रंग, संगीत और लोक परंपराओं से सराबोर कर दिया. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने उपायुक्त कार्यालय परिसर से परेड को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. परेड सेरी मंच से होते हुए इंदिरा मार्केट परिसर तक पहुंची, जहां मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों ने इस अद्भुत सांस्कृतिक झांकी का स्वागत किया.
शिवरात्रि महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परेड
कल्चलर परेड में सबसे आगे भारत का तिरंगा ध्वज लहराता हुआ चल रहा था, उसके पीछे देश-विदेश से आए कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे थे. परेड के अंत में मधुर धुनों के साथ होमगार्ड का बैंड आकर्षण का केंद्र बना रहा. दर्शकों ने इन आकर्षक दृश्यों को अपने मोबाइल फोन में कैद किया और पूरे मार्ग में उत्सव जैसा माहौल बना रहा.
11 अंतरराष्ट्रीय दलों ने दिखाई सांस्कृतिक विविधता
मंडी जिला उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया, "अंतरराष्ट्रीय दलों में अर्जेंटीना, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, श्रीलंका के दो दल, रूस, अफ्रीका कॉन्टिनेंट (तंजानिया, नाइजीरिया, घाना, जिम्बाब्वे, लाइबेरिया, स्वाजीलैंड, लेसोथो, कैमरून और साउथ अफ्रीका), वेनेजुएला, नेपाल, कजाकिस्तान और कंबोडिया के कलाकार शामिल रहे. इन दलों ने पारंपरिक लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं. अर्जेंटीना के कलाकारों ने फायर डांस से रोमांच पैदा किया, जबकि रूस से आए कलाकारों ने एलईडी डांस के माध्यम से आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया."
क्यों खास है अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव?
वहीं, उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि, अंतरराष्ट्रीय कल्चरल परेड में 35 सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया. मंडी शिवरात्रि अपने 500 वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. सबसे खास बात यह है कि इस साल इस परेड में 11 अंतरराष्ट्रीय दलों ने भाग लिया है. इस परेड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के लिए हर देश की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में देव ध्वनि पर थिरकने लगता है शहर!
माधव राय मंदिर के पुजारी हर्ष कुमार कहते हैं, "देवलुओं की नृत्य एवं देव ध्वनि से मंडी शहर एक तरह से थिरकने लगता है. देवी देवताओं के मिलन का यह नजारा देखते ही बनता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके मंडी के शिवरात्रि महोत्सव का मंडी के राजपरिवार से गहरा नाता है. अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त कर चुका मंडी शिवरात्रि महोत्सव अब राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. यह उत्सव भारतीय परंपरा की उस विरासत को दर्शाता है, जहां आस्था, इतिहास और लोक संस्कृति एक साथ जीवित रहती हैं."

इतिहासकार डॉ. दिनेश धर्मपाल बताते हैं, "छोटी काशी मंडी प्राचीन काल से शिवभूमि रही है. एक मान्यता के अनुसार, 16वीं शताब्दी में बाबा भूतनाथ मंदिर के निर्माण के बाद इस उत्सव की शुरुआत हुई. दूसरी दंतकथा के अनुसार मंडी रियासत के राजा ईश्वरीय सेन की युद्ध विजय के बाद शिवरात्रि के अवसर पर मनाया गया उत्सव ही आगे चलकर महोत्सव में परिवर्तित हुआ. मान्यता है कि राजा बान सेन और बाद में राजा सूरज सेन के काल में इस पर्व को संगठित रूप मिला और इसे राजकीय संरक्षण प्राप्त हुआ."

राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय दलों की दमदार भागीदारी
देश के 7 राष्ट्रीय दलों में राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब के दो दल, असम और मणिपुर के कलाकार शामिल रहे. प्रदेश के 7 जिलों शिमला, हमीरपुर, लाहौल-स्पिति, कुल्लू, चंबा, किन्नौर और सिरमौर के सांस्कृतिक दलों ने भी अपनी लोक परंपराओं की छटा बिखेरी. इसके अलावा मंडी जिले के 5 स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने भी परेड में भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत मंडव शो भी आकर्षण का विशेष केंद्र रहा. रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर धुन और पारंपरिक नृत्य शैलियों ने पूरे शहर को उत्सवमय बना दिया. यह परेड अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बनी.

महाशिवरात्रि महोत्सव सांस्कृतिक एकता और वैश्विक भाईचारे का प्रतीक
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि, "अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और वैश्विक भाईचारे का भी प्रतीक है. विभिन्न देशों और राज्यों से आए कलाकारों की भागीदारी हिमाचल की 'अतिथि देवो भवः' की परंपरा को सुदृढ़ करती है और मंडी को विश्व पटल पर नई पहचान देती है."

कल्चरल परेड में पहुंचे देश-विदेश के कलाकार
कल्चरल परेड में पहुंचे देश-विदेश के कलाकारों ने कहा कि, हिमाचल प्रदेश के मंडी आना और यहां पर इस तरह की प्रतिभा दिखाना उनके उनके लिए एक बेहतर अनुभव रहा. इस वैश्विक मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए यादगार बन गया. कलाकारों ने उम्मीद जताई है कि उन्हें यहां अगले वर्ष आने का मौका भी जरूर मिलेगा.
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