ETV Bharat / bharat

हिमाचल में इग्लू टूरिज्म पर संकट! मौसम की बेरुखी ने छीनी कारोबारियों की मुस्कान

मौसम में आए बदलाव से इग्लू पर्यटन पर गहरा असर पड़ा है. इससे जुड़े कारोबारियों के लिए ये एक चिंता का विषय है.

MANALI IGLOO
हिमाचल में इग्लू टूरिज्म (ETV Bharat GFX)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 8, 2026 at 9:16 PM IST

8 Min Read
Choose ETV Bharat

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में बदलते मौसम का असर सिर्फ खेती और बागवानी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब पर्यटन पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कुल्लू जिले की पर्यटन नगरी मनाली में हर साल सर्दियों के मौसम में बर्फ से बने इग्लू पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहते हैं. लेकिन इस बार बर्फबारी देर से होने के कारण इग्लू पर्यटन को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. नवंबर-दिसंबर में बर्फबारी के साथ शुरू होने वाला यह कारोबार अब सिमटकर केवल एक से डेढ़ महीने तक ही रह गया है. इस वजह से इग्लू संचालक मयूस नजर आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अच्छे कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन इस बार सीजन काफी मंदा चल रहा है.

इग्लू टूरिज्म पर मौसम की मार

मनाली में इग्लू बनाने वाले ताशी दोरजे ने बताया कि पहले जब दिसंबर में बर्फबारी होती थी, तब नवंबर से ही इग्लू की बुकिंग शुरू हो जाती थी. दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च तक अच्छा कारोबार चलता था. इस दौरान देश-विदेश से पर्यटक यहां रुकने आते थे और इग्लू हमेशा फुल रहते थे. इस बार दिसंबर-जनवरी में बर्फ नहीं गिरी. ऐसे में तय समय पर इग्लू तैयार नहीं हो पाए. नतीजा यह हुआ कि चार महीने का कारोबार सिमटकर सिर्फ एक से डेढ़ महीने तक सीमित रह गया.

हिमाचल में इग्लू टूरिज्म पर मौसम की मार (ETV BHARAT)

इग्लू संचालक विकास बताते हैं, "इस साल बड़ी संख्या में बुकिंग कैंसिल हुई हैं. लोगों ने सर्दियों की छुट्टियों का प्लान पहले ही बना लिया था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि बर्फ नहीं है, तो उन्होंने मनाली का प्लान टाल दिया."

इस बार दिसंबर और जनवरी में आने वाले सैलानियों को बर्फ के घरों (इग्लू) के बीच रहने का रोमांच नहीं मिल पाया, जबकि यही अनुभव इग्लू पर्यटन की सबसे बड़ी खासियत है. इसका सीधा असर मनाली के विंटर टूरिज्म पर भी पड़ा है. पर्यटन कारोबारी विकास ने बताया कि पूरे टूरिस्ट सीजन के दौरान बर्फबारी नहीं हुई. अब जब बर्फबारी हुई है, तब बच्चों की परीक्षाएं नजदीक होने के कारण कई सैलानी चाहकर भी पर्यटन स्थलों की ओर नहीं आ पा रहे हैं. इस वजह से इग्लू कारोबारियों में मायूसी छाई हुई है.

MANALI IGLOO
सेथन गांव में इग्लू बनाते स्थानीय लोग (ETV BHARAT)

आखिर क्या होते हैं इग्लू?

इग्लू बर्फ से बने घर होते हैं, जिन्हें बेहद ठंडे इलाकों में बनाया जाता है जहां तापमान शून्य से भी काफी नीचे (माइनस) रहता है. चूंकि इग्लू आकार में छोटे होते हैं और इनका प्रवेश द्वार बहुत संकरा होता है, इसलिए इनमें झुककर या रेंगकर ही प्रवेश करना पड़ता है.

इग्लू संचालक ताशी दोरजे बताते हैं, "इग्लू बनाना आसान काम नहीं है. इसके लिए अच्छी और लगातार बर्फबारी जरूरी होती है. एक इग्लू तैयार करने में कम से कम दो से तीन दिन लग जाते हैं. यह काम माइनस तापमान में किया जाता है. जितनी ज्यादा बर्फ होती है, इग्लू उतना ही मजबूत बनता है. प्रत्येक इग्लू का व्यास करीब 9 फीट और ऊंचाई लगभग 5 फीट होती है. अंदर रहने वालों के लिए फोम गद्दा, ऊनी चादरें, इलेक्ट्रिक कंबल, लाइट और मोबाइल चार्जिंग की सुविधा दी जाती है. इग्लू के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में ज्यादा गर्म रहता है, जिससे पर्यटक ठंड में भी आराम से रात बिता सकते हैं."

MANALI IGLOO
इग्लू में गद्दे-कंबल की पूरी व्यवस्था मिलती है (ETV BHARAT)

सेथन गांव में एक रात इग्लू में रुकने का किराया 5,500 रुपये से शुरू होता है. इस पैकेज में पर्यटकों के लिए रात का खाना, नाश्ता, चाय-कॉफी और शाम का बोनफायर शामिल होता है. बड़े ग्रुप के लिए छूट भी दी जाती है. इस बार यहां कुल 9 इग्लू बनाए गए हैं. इग्लू कारोबारी पवन ने बताया कि पहले इग्लू सीजन करीब 120 दिन का होता था और एक इग्लू से औसतन 10 से 12 लाख रुपये की कमाई हो जाती थी. हालांकि, इस बार बर्फबारी देरी से होने के कारण सीजन लगभग डेढ़ महीने का ही रह गया है. इससे इग्लू संचालकों की आमदनी पर काफी असर पड़ रहा है.

'इग्लू विलेज' के नाम से मशहूर है ये गांव

मनाली के हामटा की पहाड़ियों में स्थित सेथन गांव को आज "इग्लू विलेज" के नाम से जाना जाता है. हिमाचल प्रदेश में यह एकमात्र स्थान है, जहां हर साल बर्फ के घर यानी इग्लू तैयार किए जाते हैं. आमतौर पर दिसंबर के मध्य तक यहां इग्लू बनकर तैयार हो जाते हैं और मार्च मध्य तक पर्यटकों के लिए खुले रहते हैं. सेथन गांव में साल 2016 में दो स्थानीय युवाओं ताशी दोरजे और विकास ने इग्लू पर्यटन की शुरुआत की थी. इससे पहले वे करीब चार साल तक अपने दोस्तों के साथ बर्फ के घरों में रहने का अनुभव लेते रहे. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि इग्लू को पर्यटकों के लिए कैसे सुरक्षित, आरामदायक और आकर्षक बनाया जा सकता है.

MANALI IGLOO
बर्फ के बीच मस्ती करते पर्यटक (ETV BHARAT)

पर्यटकों को कैंसिल करनी पड़ी बुकिंग

दिल्ली से आई सैलानी सानिया ने बताया, "मैंने जनवरी में ही इग्लू की बुकिंग करवाई थी, लेकिन उस समय मनाली में बर्फबारी नहीं होने के कारण बुकिंग कैंसिल हो गई थी. फिर जब मनाली में बर्फबारी हुई तो मैंने फिर से बुकिंग करवाई. माइनस तापमान में बर्फ के घर में अपने परिवार के साथ रहना मेरे लिए एक अलग और रोमांचक अनुभव है."

एक ही जगह स्की और इग्लू का रोमांच

हरियाणा से आए सैलानी सचिन प्रभाकर ने बताया कि, सेथन गांव में अब बर्फ से बने इग्लू पूरी तरह तैयार हो चुके हैं. उन्होंने ऑनलाइन इसकी बुकिंग कराई है. उनके दोस्तों ने पहले इग्लू में रहकर इस अनोखे पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी दी थी. यहां इग्लू में रहने के साथ-साथ स्की और अन्य बर्फीली गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है, जिससे पर्यटकों को एक ही जगह कई अनुभव मिलते हैं.

जालंधर के रहने वाले सैलानी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि, वह पहले भी सेथन गांव में इग्लू में रह चुके हैं. इस साल जनवरी में मनाली आने का प्लान था, लेकिन बर्फबारी नहीं होने के कारण उन्होंने योजना रद्द कर दी थी. अब बर्फबारी होने के बाद उन्होंने फिर से प्लान बनाया और ऑनलाइन बुकिंग कर ली. इससे पहले उन्होंने अंटार्कटिका और अन्य देशों में ही इस कॉन्सेप्ट के बारे में सुना और पढ़ा था, लेकिन अब मनाली में भी उन्हें बर्फ के घर में रहने का अवसर मिल रहा है.

MANALI IGLOO
मनाली में बर्फबारी के बाद का दृश्य (ETV BHARAT)

मध्य मार्च तक ही टिक पाएंगे इग्लू

मनाली में 23 जनवरी के बाद बर्फबारी हुई, जिसके चलते फरवरी में इग्लू तैयार किए जा सके. अब ये इग्लू मार्च के पहले हफ्ते या मध्य तक ही टिक पाएंगे. जैसे ही तापमान बढ़ेगा, बर्फ पिघलना शुरू हो जाएगी. सेथन गांव के निवासी पवन नेगी का कहना है कि, इस साल समय पर बर्फ नहीं गिरने से कारोबार प्रभावित हुआ है. फिर भी उन्हें उम्मीद है कि मार्च तक आने वाले पर्यटक विंटर टूरिज्म को कुछ हद तक संभाल लेंगे. इग्लू पर्यटन शुरू होने से पहले हामटा क्षेत्र केवल गर्मियों की ट्रैकिंग के लिए जाना जाता था, लेकिन इग्लू बनने के बाद यहां विंटर टूरिज्म भी बढ़ा है. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है.

हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह का कहना है, "हिमाचल में मौसम का यह बदलाव ग्लोबल वार्मिंग का संकेत है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में पर्यटन, कृषि और बागवानी सभी पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है."

मौसम में आए बदलाव से मनाली के इग्लू पर्यटन पर गहरा असर पड़ा है. जो कारोबार कभी चार महीने तक चलता था, वह अब सिमटकर एक से डेढ़ महीने का रह गया है. इससे न केवल स्थानीय युवाओं की आमदनी प्रभावित हुई है, बल्कि हिमाचल के विंटर टूरिज्म की रफ्तार भी धीमी पड़ती नजर आ रही है.

अगर इग्लू देखने जाना हो तो कैसे जाएं?

सेथन गांव मनाली से करीब 14 किलोमीटर दूर है. मनाली से टैक्सी या लोकल वाहन के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. सर्दियों में जाने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. वहीं, अगर आप इग्लू में रहना चाहते हैं, तो इसकी ऑनलाइन बुकिंग करवाई जा सकती है.

ये भी पढ़ें: विदेशी परिंदों की चहचहाहट से गूंजी रामसर साइट, पौंग बांध में 1.24 लाख पक्षियों का रिकॉर्ड आगमन