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केंद्र सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वार्ताकार नियुक्त किए, सीएम ममता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जानें क्या कहा?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोहराया कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र पूरी तरह से पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है.

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (ANI फाइल फोटो)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 17, 2025 at 5:48 PM IST

3 Min Read
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग पहाड़ियों को लेकर केंद्र सरकार के ताजा कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है. दरअसल, गृह मंत्रालय ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में गोरखा-संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक रिटायर आईपीएस अधिकारी को बातचीत नियुक्त किया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक कड़े शब्दों में एक पत्र लिखा है.

17 नवंबर को लिखे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने केंद्र पर राज्य सरकार से बिना किसी परामर्श के एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया. सीएम ने बताया कि उन्होंने 18 अक्टूबर को ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस कदम पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था. हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनके पत्र का संज्ञान लिया और कहा कि गृह मंत्री इस मामले की जांच करेंगे, लेकिन राज्य को आगे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

उन्होंने बताया कि इसके बजाय 10 नवंबर को गृह मंत्रालय ने सूचित किया कि कार्यालय ने काम करना शुरू कर दिया है. इस व्यवहार को आश्चर्यजनक और बेहद चिंताजनक बताते हुए बनर्जी ने कहा कि यह बुनियादी प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है.

Mamata
ममता ने लिखा लेटर (ETV Bharat)

'प्रशासनिक शक्तियां राज्य सरकार के अधीन'
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र पूरी तरह से पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने लिखा कि दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग पश्चिम बंगाल के अविभाज्य अंग हैं और गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (GTA) अधिनियम, 2011 स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र की सभी प्रशासनिक शक्तियों को राज्य सरकार के अधीन रखता है.

उन्होंने जोर देकर कहा, "इस अधिनियम के तहत'सरकार' शब्द स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल सरकार को संदर्भित करता है. इसलिए, केंद्र के पास पर्वतीय क्षेत्र के लिए किसी मध्यस्थ की नियुक्ति करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है."

'सत्ता का दुरुपयोग'
बनर्जी ने केंद्र के फैसले को अवैध, असंवैधानिक और सत्ता का दुरुपयोग बताया. उनके अनुसार, यह कदम भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची का उल्लंघन करता है, जहां कानून-व्यवस्था, स्थानीय शासन और क्षेत्रीय प्रशासन जैसे मामले राज्य के विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यह कार्रवाई न केवल संवैधानिक ढांचे को तोड़ती है, बल्कि दार्जिलिंग पहाड़ियों की कड़ी मेहनत से अर्जित शांति और स्थिरता को भी भंग कर सकती है. उन्होंने दावा किया कि 2011 से राज्य सरकार की निरंतर पहल के कारण यह क्षेत्र शांतिपूर्ण बना हुआ है और आरोप लगाया कि केंद्र का अचानक हस्तक्षेप राजनीति से प्रेरित हो सकता है. उन्होंने लिखा, "यह राजनीतिक लाभ के लिए पहाड़ियों में शांति और विकास को बाधित करने का एक प्रयास प्रतीत होता है."

अपने पत्र के अंतिम भाग में बनर्जी ने प्रधानमंत्री से इस एकतरफा और असंवैधानिक फैसले को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया. इस मामले पर हुए सभी पूर्व पत्राचार भी पत्र के साथ लिंक किए गए हैं. अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है, क्योंकि राजनीतिक ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री की कड़ी आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया देती है.

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