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स्टेथोस्कोप से लेकर भारत की टॉप इंटेलिजेंस भूमिका तक, जानें कौन हैं नए IB चीफ महेश दीक्षित

महेश दीक्षित मंगलवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए निदेशक का पदभार संभालेंगे. गौतम देबरॉय की रिपोर्ट.

Senior IPS officer Mahesh Dixit appointed new IB chief
सीनियर IPS ऑफिसर महेश दीक्षित नए IB चीफ बने (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 29, 2026 at 4:23 PM IST

6 Min Read
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नई दिल्ली: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी महेश दीक्षित इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के नये प्रमुख होंगे. दीक्षित मंगलवार को नए आईबी निदेशक के तौर पर पदभार संभालेंगे.

आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी दीक्षित आईबी निदेशक के रूप में तपन कुमार डेका की जगह लेंगे. डेका ने आईबी में चार साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है.

महेश दीक्षित देश की सबसे बड़ी आंतरिक खुफिया एजेंसी में ऑपरेशनल अनुभव, रणनीतिक योजना और भारत के कुछ सबसे संवेदनशील सुरक्षा सिक्योरिटी थिएटर में दशकों के काम का एक अनोखा मेल लेकर आएंगे. कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दीक्षित को दो साल के लिए नियुक्त किया है. अपनी पदोन्नति से पहले, वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. साथ ही कई जरूरी ऑपरेशनल सेक्टर की देखरेख भी कर रहे थे.

क्या बोले जम्मू कश्मीर के पूर्व डायरेक्टर जनरल वैद
सोमवार को ईटीवी भारत से बात करते हुए, जम्मू कश्मीर के पूर्व डायरेक्टर जनरल, डॉ. शेष पॉल वैद ने कहा कि महेश दीक्षित आईबी चीफ के तौर पर सबसे अच्छे पसंद हैं. वैद ने कहा कि, महेश दीक्षित का आईबी चीफ के तौर पर चुना जाना सरकार का सबसे अच्छा फैसला है. दीक्षित ने जम्मू कश्मीर में बेहतरीन काम किया है.

वैद ने कहा कि, जब केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया, तो दीक्षित जॉइंट डायरेक्टर थे. वे उन्हें बहुत अच्छे से जानते हैं. वैद ने कहा कि, आठ साल पहले जब वह जम्मू कश्मीर में डीजी थे, तो महेश दीक्षित नई दिल्ली से जम्मू कश्मीर को संभाल रहे थे.

कई सीनियर पुलिस अधिकारियों के उलट, दीक्षित के करियर ने एक अलग रास्ता अपनाया. भारतीय पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने मेडिकल डॉक्टर के तौर पर ट्रेनिंग ली थी, लेकिन सार्वजनिक सेवा के लिए उन्होंने मेडिसिन छोड़ दी और जल्द ही इंटेलिजेंस के काम की तरफ मुड़ गए.

विशाखापत्तनम जिले में पुलिस अधीक्षक के तौर पर अपना पुलिस में करियर शुरू करने के बाद, वह अपने करियर की शुरुआत में ही इंटेलिजेंस ब्यूरो में शामिल हो गए, जहां उन्होंने 26 साल से ज्यादा समय तक भारत की कुछ सबसे मुश्किल आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को संभाला.

उनके काम उन्हें देश भर में ले गए
नगालैंड के कोहिमा से लेकर बिहार के पटना तक, पहले के आंध्र प्रदेश के हैदराबाद तक, नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो हेडक्वार्टर तक, और जम्मू-कश्मीर में कई बार उन्होंने अपने काम का लोहा मनवाया. इन पोस्टिंग ने उन्हें अलग-अलग सुरक्षा खतरों का सामना कराया, जिसमें बगावत और आतंकवाद से लेकर वामपंथी उग्रवाद और क्रॉस-बॉर्डर घुसपैठ तक शामिल थे.

दीक्षित का सबसे लंबा और शायद सबसे अहम काम जम्मू-कश्मीर में रहा, जहां उन्होंने दो मुश्किल दौर में काम किया. 2009 और 2012 के बीच, जब घाटी में लगातार आतंकी हमले, हिंसक विरोध प्रदर्शन और बड़े पैमाने पर पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, उस दौरान भी दीक्षित ने सराहनीय कार्य किया. उसके बाद फिर 2020 से 2025 तक आर्टिकल 370 हटने के बाद हुए संवैधानिक बदलावों के बाद के समय में भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया.

उन्हें इंटेलिजेंस एजेंसियों को इलाके में स्थिरता बनाए रखते हुए आम लोगों, कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने वाले हाइब्रिड आतंकवादियों से पैदा होने वाले बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ा. इन सालों में उनके काम की वजह से उन्हें खुफिया समुदाय में पहचान मिली. उन्होंने ग्राउंड-लेवल इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम किया.

कश्मीर के अलावा, दीक्षित ने इंटेलिजेंस ब्यूरो में कई रणनीतिक रूप से जरूरी काम संभाले, जिसमें नॉर्थईस्ट में ऑपरेशन, लद्दाख में हर एक गतिविधियों पर नजर रखना और एंटी-नक्सल डेस्क की देखरेख करना शामिल था. इन कामों के लिए सेंट्रल एजेंसियों, राज्य पुलिस बलों और सशस्त्र बलों के बीच तालमेल की जरूरत थी, जिससे एक साथ कई आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में भारत की मदद मिली.

सिर्फ काम पर फोकस
दीक्षित बेहद साधारण रहना पसंद करते थे और सार्वजनिक ध्यान से दूर रहते थे. वह दिखावा करने के बजाय अपने कार्य क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देना पसंद करते थे. उनकी ख्याति बहुत ध्यान से इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, ऑपरेशनल प्लानिंग और मजबूत संस्थागत तालमेल बनाने पर टिकी हैं और उनकी यह विशेषता आधुनिक खुफिया ऑपरेशन में बहुत जरूरी मानी जाती हैं.

जैसे ही उन्होंने ऑफिस संभाला, दीक्षित को एक तेजी से मुश्किल होते सुरक्षा माहौल का सामना करना पड़ा. इंटेलिजेंस ब्यूरो से उम्मीद की जाती है कि वह आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और साइबर-सक्षम कट्टरपंथ से लेकर जासूसी, नई तकनीक और समन्वित आंतरिक सुरक्षा खतरों तक की चुनौतियों से निपटेगा. एजेंसियों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करना और प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस के लिए तकनीक का फायदा उठाना भी एजेंडा में सबसे ऊपर रहने की उम्मीद है.

दीक्षित की नियुक्ति इंटेलिजेंस ब्यूरो में गहरी ऑपरेशनल जानकारी वाले अनुभवी फील्ड अधिकारियों पर जोर देने की निरंतरता का संकेत देता है. अपनी लगभग पूरी पेशेवर जीवन संवेदनशील इलाकों में खुफिया से जुड़े कार्यों में बिताने के बाद अब वह भारत सबसे पुराने खुफिया संगठन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने ऐसे समय आईबी के निदेशक के तौर पर कार्यभार संभालेंगे, जब देश की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली तेजी से बदलते खतरों का सामना कर रहा है.

नॉर्थईस्ट, जम्मू और कश्मीर, एंटी-नक्सल ऑपरेशन और खुफिया विभाग में बेहतरीन कार्य दीक्षित को इस पद के लिए अनुभवी खुफिया पेशेवरों में से एक बनाता है. उनके पद संभालने के बाद उनका ऑपरेशनल बैकग्राउंड भारत के घरेलू सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को और मजबूत करने में मदद करेगा.

आईबी चीफ बनने की घोषणा के बाद भाजपा -वडोदरा शहर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय शाह ने कहा, "स्टेथोस्कोप से लेकर भारत की टॉप इंटेलिजेंस भूमिका तक.... 1993 बैच के एमडी से आईपीएस अधिकारी बने डॉ. महेश दीक्षित को भारत की प्रमुख घरेलू खुफिया एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया डायरेक्टर नियुक्त किया गया है.

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