बिहार का हिलता-डुलता और बढ़ता शिवलिंग, जो हर साल बदल लेता है अपना स्थान!
गया में निरंजना नदी के बीच स्थित चमत्कारी शिवलिंग हर साल 1 इंच खिसकता है. ये सदियों से जुड़ी आस्था, मनोकामना पूर्ति का केंद्र है.

Published : February 15, 2026 at 4:53 PM IST
- रिपोर्ट: रत्नेश कुमार
गया: बिहार के गया जिले में स्थित एक अद्भुत शिवलिंग भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह शिवलिंग निरंजना नदी के बीचों-बीच स्थापित है और सदियों से चमत्कारों से जुड़ा हुआ माना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार, यह शिवलिंग स्वयंभू रूप में प्रकट हुआ था और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. इसे मनोकामना महादेव, चतुर्भुज महादेव और बुढ़वा महादेव के नाम से भी जाना जाता है.
नदी के बीच में स्थित अद्भुत शिवलिंग: गया शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर लाडू डेमा गांव में निरंजना नदी के किनारे यह शिवलिंग स्थित है. नदी के बीच में पानी के बहाव के बीच यह शिवलिंग खड़ा है, जो बाढ़ के समय डूब जाता है लेकिन फिर भी पूजा-अर्चना जारी रहती है. ग्रामीणों के अनुसार, सैकड़ों वर्षों से यहां पूजा होती आ रही है और यह शिवलिंग पूर्वजों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है.
हर साल 1 इंच खिसकने की मान्यता: इस शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जाती है कि यह हर साल लगभग 1 इंच उत्तर दिशा की ओर खिसकता है. ग्रामीणों का कहना है कि अब तक यह सैकड़ों मीटर खिसक चुका है. 60-70 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग जैसे किशोरी तमोली और बालमुकुंद प्रसाद बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों से इसे 5 फीट से अधिक खिसकते देखा है. नदी किनारे एक स्थाई पत्थर (शिला) से गज से मापकर इसकी दूरी की जांच की जाती है, जो खिसकाव को प्रमाणित करती है.
"बाबा भोलेनाथ का यह आपरुपी शिवलिंग काफी चमत्कारी है. शिवलिंग खिसकने की बात बहुत पुरानी है, जो लोग कहते आ रहे हैं, लेकिन हम लोग इसे प्रमाणित भी करते हैं."-किशोरी तमोली, ग्रामीण
विष्णुपद मंदिर तक पहुंचने की कथा: पूर्वजों की मान्यता है कि यह शिवलिंग धीरे-धीरे खिसकते हुए गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर तक पहुंच जाएगा, जहां यह स्थाई रूप से विराजमान हो जाएगा. ग्रामीण जैसे किशोरी तमोली और अंकुश कुमार सिंह कहते हैं कि अब यह तिरछा हो गया है और उत्तर की ओर बढ़ रहा है, जो पूर्वजों की बात को सही साबित कर रहा है. यह आस्था की ऐसी कहानी है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है.

मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास: भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस शिवलिंग के दर्शन और पूजा से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता. संतान सुख की प्राप्ति, नौकरी लगना, असाध्य बीमारियों से मुक्ति, ग्रह दोष दूर होना और महामृत्युंजय मंत्र के जाप से संकट टलना जैसी कई मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं.
विशेष अवसरों पर उमड़ता श्रद्धालुओं का सैलाब: विशेष पर्वों जैसे महाशिवरात्रि, सावन आदि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. पुजारी रोजाना पूजा-अर्चना करते हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है. ग्रामीण बताते हैं कि गांव में बीमारी या आपदा आने पर यहां पूजा करने से वह टल जाती है, जो इस शिवलिंग की महिमा को और बढ़ाता है.

चमत्कारी घटनाओं की लोक कथाएं: एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, कई वर्ष पहले बाढ़ में पूजा करते समय एक पुजारी डूब गए थे. परिजनों ने शव न मिलने पर अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन 25 दिन बाद वे शिवलिंग के पास नदी से जीवित निकले, हाथ में चंदन, शंख आदि लेकर. यह घटना आज भी गांव में चर्चित है और शिवलिंग की चमत्कारी शक्ति का प्रमाण मानी जाती है.
ग्रामीणों की जीवंत गवाही: डेमा पंचायत के पूर्व वार्ड सदस्य 70 वर्षीय किशोरी तमोली बताते हैं कि स्थाई शिला से मापने पर शिवलिंग अब पहले से काफी निकट आ गया है. बालमुकुंद प्रसाद भी कहते हैं कि पिछले कुछ समय में दूरी 136 मीटर से घटकर 50-60 मीटर रह गई है. युवा अंकुश कुमार सिंह और अनिल कुमार सिंह भी पूर्वजों की बातों को सही ठहराते हुए कहते हैं कि यह चतुर्भुज स्वरूप चमत्कारी है.
"शिवलिंग नदी के बीचों बीच में है. यह शिवलिंग हर साल एक इंच खिसकता है. पूर्वजों ने बताया है, कि विष्णुपद को यह शिवलिंग जाएगा और वही स्थाई हो जाएगा. हमारे बाप-दादा, छरदादा एक दूसरे से यह बातें करते रहे हैं. हम लोग भी पूर्वजों से इस महिमा को सुनते रहे हैं."-बालमुकुंद प्रसाद, ग्रामीण
आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण: यह शिवलिंग न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि बिहार की लोक संस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है. जहां विज्ञान शायद इसे प्राकृतिक कारणों से जोड़े, वहीं भक्त इसे भगवान की लीला मानते हैं. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी जीवित है और नई पीढ़ी को जोड़े रखती है.

दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु: रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं. नदी में होने के कारण पहुंच थोड़ी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भक्त बाढ़ के दौरान भी गज से मापकर पूजा करते हैं. यह स्थान गया की आध्यात्मिक यात्रा का एक अनोखा हिस्सा बन चुका है.
बिहार की धरोहर- चमत्कार और विश्वास: बिहार में कई चमत्कारी शिवलिंग हैं, लेकिन डेमा का यह 'खिसकता' शिवलिंग अपनी अनोखी मान्यता के कारण विशेष है. यह आस्था, परंपरा और चमत्कार का संगम है, जो भक्तों को भोलेनाथ की अपार कृपा का अनुभव कराता है. हर हर महादेव की जयकारों के बीच यह शिवलिंग अपनी यात्रा जारी रखे हुए है.
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