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भाजपा-एआईएमआईएम का गठबंधन, भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन, क्या यह मुमकिन है ? भड़का शीर्ष नेतृत्व

शिवसेना को दनकिनार कर भाजपा-कांग्रेस साथ-साथ, भड़का शीर्ष नेतृत्व, लिया एक्शन.

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कॉन्सेप्ट फोटो (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 7, 2026 at 6:29 PM IST

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मुंबई : महाराष्ट्र के ठाणे और अकोला में कुछ ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, जिसको लेकर भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां शर्मसार हैं. यहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने आपस में समझौता कर लिया, ताकि एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना को बहुमत नहीं मिल सके.

ठाणे के अंबरनाथ नगरपालिका परिषद में शिवसेना (एकनाथ शिंदे) 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. यहां पर बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत है. कुल 60 सीटें हैं. भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी को चार और एक निर्दलीय उम्मीदवारों ने आपस में बैठक कर गठबंधन (अंबरनाथ विकास आघाड़ी) बनाया. उसके बाद उन्होंने इस बाबत एक पत्र जिला अधिकारी को सौंप दिया. भाजपा की तेजश्री करंजुले ने मेयर पद हासिल कर लिया. उन्होंने एकनाथ शिंदे की शिवसेना के मनीषा वालेकर को हराया. भाजपा के 16 उम्मीदवारों को जीत मिली थी. गठबंधन करने के बाद इन नेताओं ने कहा कि उन्होंने यह कदम शहर को बचाने और स्थिर प्रशासन के पक्ष में किया है.

कांग्रेस ने बुधवार को महाराष्ट्र की अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के लिए निर्वाचित अपने 12 पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन करने के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया. पार्टी ने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर पूरी यूनिट को भी भंग कर दी.

कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, "स्थानीय स्तर पर शिवसेना के कथित भ्रष्टाचार का विरोध करने के लिए निर्दलीय पार्षदों सहित कई पार्षदों ने पार्टी चिह्नों और संबद्धताओं को दरकिनार करते हुए अंबरनाथ विकास मोर्चा (अंबरनाथ विकास अघाड़ी) का गठन किया है. कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है. लेकिन समर्थन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं."

भाजपा ने भी अपने स्थानीय यूनिट पर कार्रवाई की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस गठबंधन को कभी भी स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है, इसलिए हमने इसे तोड़ दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) हमारी सहयोगी पार्टी है और उनके साथ गठबंधन बना रहेगा.

अंबरनाथ की तरह ही अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी ऐसा ही हुआ. यहां पर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम और कुछ अन्य दलों के साथ समझौता कर लिया. फडणवीस ने कहा कि यहां पर भी किसी भी गठबंधन को मंजूरी नहीं दी जा सकती है. यह पार्टी अनुशासन के खिलाफ है.

फडणवीस ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा, "मैं साफ कहना चाहता हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा. अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी तरफ से ऐसा फैसला लिया है, तो वह अनुशासन के खिलाफ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

उद्धव गुट के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने भाजपा पर निशाना साधा है. राउत ने कहा कि अंबरनाथ और अकोट की घटनाएं दिखाती हैं कि सत्ता के लिए भाजपा किसी से भी हाथ मिला सकती है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी ने इस गठबंधन को मौकापरस्त बताया है. उनके विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे गठबंधन धर्म से विश्वासघात करार दिया और कहा कि यह भाजपा के "कांग्रेस-मुक्त भारत" नारे के भी खिलाफ है. हालांकि, भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल ने कहा कि हमने जो भी कुछ किया, वह अंबरनाथ को करप्शन और फीयर से मुक्त करने के लिए किया.

इस पर शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, "जिन पार्टियों के खिलाफ हम चुनाव लड़ते हैं, उनसे हाथ मिलाना ठीक नहीं है. अगर कुछ लोग सिर्फ सत्ता पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए. जिन लोगों के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, उन्हीं से हाथ मिलाना स्वार्थी कदम है. कुछ लोगों को समझना चाहिए कि सत्ता ही सब कुछ नहीं होती."

अंबरनाथ की तरह ही भाजपा के बागी नेताओं ने अकोट में अकोट विकास मंच बनाया. इसमें उन्होंने एआईएमआईएम का साथ लिया. यहां पर भाजपा को कुल 35 सीटों में से 11 पर जीत मिली. एआईएमआईएम को दो सीटों मिली थीं. भाजपा ने गठबंधन कर अपनी सीटें 25 कर लीं. यहां पर भाजपा की माया धुले महापौर बनीं.

दिलचस्प ये है कि एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने भी अपने नेताओं के खिलाफ एक्शन की बात कही है. उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी प्राप्त की जा रही है. यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने भाजपा का साथ नहीं दिया. कांग्रेस को छह सीटें और वंचित बहुजन अघाड़ी को दो सीटें मिली हैं. हालांकि, भाजपा विधायक रंधीर सावकर ने कहा कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने अकोट विकास मंच में शामिल होने का निर्णय खुद लिया. उनके अनुसार वे भाजपा के सिद्धान्तों से भी सहमत हैं. फिलहाल, 29 नगर निगमों के चुनाव इस महीने की 15 तारीख को होने वाले हैं. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि ये गठबंधन इन चुनावों के नतीजों पर भी असर डाल सकते हैं.

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