प्रसिद्ध नंदा राजजात यात्रा का महापंचायत ने बदला नाम, इसी साल आयोजित करने की कही बात
'नंदा देवी राजजात यात्रा' अब 'नंदा की बड़ी जात' या 'बड़ी जात यात्रा' के नाम से जाना जाएगा. यह फैसला महापंचायत में लिया गया.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 19, 2026 at 9:56 PM IST
चमोली: विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा को लेकर नंदानगर में महापंचायत का आयोजन किया गया. जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि साल 2026 में यात्रा हर हाल में आयोजित की जाएगी. साथ ही ये भी तय किया गया कि अब यह यात्रा 'नंदा राजजात' नहीं, बल्कि 'नंदा की बड़ी जात' (ठुलि जात) के नाम से जानी जाएगी.
महापंचायत में स्पष्ट किया गया कि यात्रा का आयोजन पारंपरिक समयानुसार इसी साल अगस्त–सितंबर महीने में ही किया जाएगा. यात्रा के स्थगन को लेकर चल रही तमाम अटकलों को खारिज करते हुए ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और मंदिर समितियों ने सदियों पुरानी परंपरा को पूरी श्रद्धा एवं आस्था के साथ निभाने का संकल्प भी दोहराया.
नंदानगर के ब्लॉक सभागार में हुई बैठक: बता दें कि नंदानगर के ब्लॉक सभागार में 19 जनवरी को महापंचायत हुई. जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से काफी संख्या में मां नंदा के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालु, हक–हकूकधारी, जनप्रतिनिधि, धर्माचार्य और महिलाएं शामिल हुए.

23 जनवरी को निकाला जाएगा 'बड़ी जात यात्रा' का मुहूर्त: इस दौरान महापंचायत में तय किया गया कि आगामी 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन नंदा देवी सिद्धपीठ कुरुड़ में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ 'बड़ी जात यात्रा' का मुहूर्त निकाला जाएगा. यात्रा को लोक परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं के साथ भव्य रूप से संपन्न कराने पर सहमति बनी.
वहीं, बड़ी जात के सफल आयोजन के लिए एक समिति के गठन का भी निर्णय लिया गया. जिसमें सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया. ताकि, यात्रा की सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सके.
"यह महापंचायत सभी लोगों की सहमति के बाद बुलाई गई. बड़ी जात यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है."- सुखवीर रौतेला, अध्यक्ष, कुरुड़ मंदिर समिति
इस दौरान महापंचायत में मौजूद लोगों ने भी कहा कि नंदा देवी सभी क्षेत्रवासियों की आराध्य देवी हैं. यात्रा के आयोजन में किसी प्रकार की राजशाही या राजनीतिक प्रभाव नहीं होना चाहिए. वहीं, सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने अपने विचार रखे.
"नंदा देवी की यात्रा को किसी भी प्रकार की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. यह विशुद्ध रूप से आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ आयोजन है. जिसे लोक विश्वास के आधार पर ही संचालित किया जाना चाहिए."- हरेंद्र सिंह रावत, सेवानिवृत्त कर्नल
वहीं, महापंचायत में मौजूद लोगों ने कहा कि हाल में यात्रा स्थगन को लेकर आई चर्चाओं पर भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. महापंचायत का मुख्य उद्देश्य आगामी नंदा देवी राजजात यात्रा को सफल, पारंपरिक और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने को लेकर विचार-विमर्श करना है.
हर हाल में होगी यात्रा: सभी ने एक स्वर में कहा कि नंदा देवी राजजात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, लोक आस्था के साथ परंपराओं का प्रतीक है. लिहाजा, इसे उसकी मूल भावना के अनुरूप ही संपन्न किया जाना चाहिए.

वहीं, जिन लोगों ने नंदा देवी राजजात को न कराने का फैसला लिया है, उसे महापंचायत ने एक एनजीओ का व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए खारिज किया. महापंचायत में ये भी निर्णय लिया गया कि बसंत पंचमी के अवसर पर दिनपटा निकाला जाएगा. जिसकी शुरुआत सिद्धपीठ नंदा देवी मंदिर कुरुड़ में होगी. महापंचायत का साफ और स्पष्ट संदेश है कि नंदा देवी राजजात होकर रहेगी.
श्री नंदा राजजात समिति नौटी ने साल 2027 में कराने की कही थी बात: बता दें कि रविवार यानी 18 जनवरी को नंदा राजजात 2026 को श्री नंदा राजजात समिति नौटी स्थगित करने का फैसला ले चुकी है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद आज महापंचायत हुई थी.
बीती रोज श्री नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर व महासचिव भुवन नौटियाल ने कर्णप्रयाग में प्रेस वार्ता की थी. प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि हिमालयी क्षेत्र में जरूरी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं. इसी कारण समिति ने राजजात को स्थगित करने का निर्णय लिया है. साथ ही कहा था कि अब यह ऐतिहासिक और धार्मिक यात्रा अगले साल 2027 में आयोजित की जाएगी.
उनका कहना था कि पंचांग के अनुसार यात्रा 19 व 20 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचती है. इस दौरान क्षेत्र में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की संभावना रहती है. साथ ही निर्जन पड़ावों पर अभी आवश्यक कार्य भी पूरे नहीं हुए हैं.
इसके चलते यात्रा की सुरक्षा एवं व्यवस्थाएं चुनौतीपूर्ण हो सकती थी. इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सर्वसम्मति से राजजात यात्रा को 2026 के स्थान पर 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया.
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