मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में सेंध, 600 करोड़ की हेराफेरी, 400 कर्मचारी और अधिकारियों पर FIR
मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों ने की 600 करोड़ की हेराफेरी. 59 एफआईआर दर्ज. ब्रिजेन्द्र पटैरिया की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 23, 2026 at 11:10 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों ने ही करोड़ों की हेराफेरी कर दी. यह हेराफेरी 10 या 20 करोड़ की नहीं, बल्कि करीबन 600 करोड़ की हुई है. इसका खुलासा कोष एवं लेखा संचालनालय की स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल की जांच में हुआ है.
जांच में सामने आया कि अलग-अलग विभाग के कर्मचारी अधिकारियों ने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर सरकारी खातों के स्थान पर अपने निजी या करीबियों के खाते जोड़ दिए गए और जो पैसा सरकारी खातों में जाना चाहिए था, वह धीरे-धीरे इनके खातों में पहुंचता रहा. गड़बडी का खुलासा होने के बाद प्रदेश भर में अब तक 59 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, इसमें 400 से ज्यादा कर्मचारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है.
कर्मचारी-अधिकारियों ने की 600 करोड़ की हेराफेरी
प्रदेश सरकार के बजट के पूरे पैसों का भुगतान इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम के जरिए होता है. पूरे प्रदेश में इसी सिस्टम के जरिए पैसों का लेन-देन देता है. प्रदेश में वित्तीय व्यवस्थातओं से जुडे अधिकारी-कर्मचारियों ने इस सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया. कोष एवं लेखा संचालनालय की स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल की पकड़ में जब एक के बाद एक यह मामले आए तो अधिकारी भी चौंक गए. क्योंकि यह चोरी 600 करोड़ से ज्यादा निकली.अधिकारी-कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीकों से सरकारी सिस्टम में सेंध लगाया और जो पैसा सरकारी खजाने में पहुंचना चाहिए था, उसका रास्ता अपने अकाउंट में मोड़ दिया.
इस तरह की गई खजाने से चोरी
उज्जैन के भैरवगढ़ जेल के जेल प्रहरी रिपुदमन की सेलरी महज 35 हजार रुपए महीना थी, लेकिन उसकी सेलरी धीरे-धीरे बढ़कर 4 लाख 82 हजार रुपए तक पहुंच गई. इंटिग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम में ट्रेजरी ऑफिसर के कई अधिकार सीधे कार्यालय प्रमुख को दिए गए. इसमें बिल वेरीफाइ करने का अधिकारी कार्यालय अधीक्षक को दिया गया. आरोप है कि रिपुदमन ने इसका फायदा उठाया.
आरोप है कि वह कर्मचारियों के पीएफ की एप्लीकेशन को मंजूर करता और फिर रिइंबर्स भी खुद ही कर देता था. इसके लिए वह कर्मचारी के मोबाइल नंबर के स्थान पर खुद का नंबर डाल देता था, इससे कर्मचारी को पता ही नहीं चलता था कि उसके अकाउंट से पीएफ की राशि निकल गई. दरअसल जेल प्रहरी होने के बाद भी वह जेल अधीक्षक के सभी काम करता था और इस वजह से जेल अधीक्षक के डिजिटल सिग्नेचर भी उसके पास ही रहते थे.
दूसरा ऐसा ही मामला अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा का सामने आया. इसमें ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर के पद पर काम करने वाले कमल राठौर पर आरोप लगे कि उसने ट्रेजरी में आने वाली रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करना शुरू किए. धीरे-धीरे यह राशि बढ़कर 20 करोड़ 47 लाख तक पहुंच गई. इस मामले में ईडी ने कार्रवाई की है.
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15 से ज्यादा विभागों में सामने आई गड़बड़ी
जांच में सामने आया है कि इस तरह की गड़बडी किसी एक विभाग में नहीं, बल्कि 15 से ज्यादा विभागों में सामने आ चुकी है. सबसे ज्यादा मामले स्कूल शिक्षा विभाग में सामने आए हैं. विभाग में ऐसे गड़बडी के 45 मामले सामने आ चुके हैं. जांच में पता चला है कि करीबन 305 करोड़ रुपए तो सीधे निजी खातों में ही ट्रांसफर हुआ है. इसमें अब तक 220 करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है. पूरे मामलों में करीबन 59 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, इसमें 400 से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया गया है.
इन मामलों में करीबन 380 करोड़ रुपए की रिकवरी होना बाकी है. उधर ईओडब्ल्यू उज्जैन के एसपी समर वर्मा के मुताबिक, "ऐसे ही कुछ मामलों की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है. मामले की जांच में पता चला है कि रकम कई बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हुई है, ऐसे सभी खातों से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है."

