दुर्लभ बीमारी से पीड़ित..43वें रैंक किया हासिल, पंजाब के शुभम बनेंगे राजस्थान में जज
व्हीलचेयर के सहारे शुभम ने आसमान को छू लिया है. परीक्षा में 43वें रैंक हासिल कर अब राजस्थान में जज बनने जा रहे हैं.

Published : January 7, 2026 at 5:42 PM IST
लुधियाना (वरिंदर थिंड): पंजाब में 25 साल के शुभम सिंगला राजस्थान में जज बनने जा रहे हैं. लुधियाना शहर के रहने वाले शुभम और उनके परिवार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह एक दिन आसमान को छू पाएंगे.
शभुम जमीन पर चल नहीं सकते. उन्होंने राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विसेज परीक्षा में 43वीं रैंक हासिल की है. शुभम ने हरियाणा से पांच साल की एलएलबी की डिग्री हासिल की है. यह उनका दूसरा मौका था जब उन्होंने यह परीक्षा पास की है. अब एक साल की ट्रेनिंग के बाद शुभम सिंगला कोर्ट में फैसले लेंगे.

दरअसल, शुभम 2 साल पहले तक पूरी तरह स्वस्थ थे और चल-फिर सकते थे, लेकिन LGMD यानी लिंब गर्डल मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की एक दुर्लभ बीमारी ने उन्हें अपना शिकार बना लिया और धीरे-धीरे वह व्हीलचेयर पर आ गए. अब वह भले ही चल नहीं सकते, लेकिन पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी कभी कम नहीं हुई.

हालांकि, व्हीलचेयर पर होने के बावजूद वह पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. शुभम किसी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि कई लोगों का सहारा बन गए हैं. उन्हें जो दुर्लभ बीमार है, इसका कोई इलाज नहीं है. जब वह महज 22 साल के थे, तब उन्हें इस बीमारी का पता चला. बाद में धीरे-धीरे वह बिस्तर पर आ गए, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी. उनके पिता राज सिंगला को अपने बेटे शुभम पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि, वह राजस्थान जाकर अपना काम बखूबी निभाएंगे. उन्होंने कहा कि, उनके परिवार में सब कोई शुभम के साथ जाने को तैयार है.

शुभम ने लॉ कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए दो बार CLAT एग्जाम पास किया. पहले उसे पटियाला की राजीव गांधी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिला. हालांकि, उन्होंने किसी निजी कारणों से उसे छोड़ दिया. फिर उन्होंने हरियाणा के हिसार से 5 साल की लॉ की पढ़ाई पूरी की. अब वह LLM भी कर रहे हैं. शुभम के पिता का कहना है कि, उनका बेटा किसी के भरोसे नहीं है, बल्कि वह सबका सहारा है. उन्होंने कहा कि, शुभम ने ही उनके परिवार को एक साथ रखा है. शुभम अपने पिता और तीन भाई बहन के साथ रहते हैं.
शुभम की मां सुनीता सिंगला से ईटीवी भारत ने पूछा कि, शुभम ने पंजाब से परीक्षा क्यों नहीं दिया. इस पर मां का कहना था कि, पंजाब में एग्जाम देने के लिए कोर्ट में 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी है.

ETV भारत टीम ने शुभम से पूछा कि उसने पंजाब से एग्जाम क्यों नहीं दिया, तो उसने कहा कि पंजाब में एग्जाम देने के लिए कोर्ट में 3 साल की प्रैक्टिस ज़रूरी है। ज्यादातर राज्यों में ऐसा सिस्टम है, लेकिन राजस्थान में कुछ छूट है, जिसकी वजह से उनके बेटे ने वहीं से एग्जाम देने का फैसला किया.
इतना ही नहीं, शुभम ने घर से ही ऑनलाइन एग्जाम की ट्रेनिंग भी ली थी. उसके बाद भी वे एग्जाम देने के लिए जयपुर और जोधपुर गए. उनके माता-पिता ने कहा कि शुभम को राजस्थान जाने में कोई दिक्कत नहीं है. उनके साथ उनके भाई और चचेरे भाई-बहन साथ जाने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि, उन्हें अपने बेटे की तरक्की पर गर्व महसूस हो रहा है. पिता ने कहा कि, लोग कहेंगे कि, उनका बेटा जज बन गया है. वहीं मां ने भी कहा कि, उनके बेटे शुभम ने उनके परिवार का मान बढ़ाया है.

शुभम के परिवार वालों ने बताया कि, कैसे शुभम अपने सपने को पंख देने के लिए दिनरात मेहनत से पढ़ाई करता था. उन्होंने अपनी मेहनत और लगम से इस मुकाम को हासिल किया है. माता-पिता का कहना है कि, उन्होंने शुभम को उनके हर फैसले का सपोर्ट किया है. उनके परिवार में कोई भी जज नहीं बना है. उनका परिवार बिजनेस करता है. परिवार वालों ने बताया कि, शुभम चाहते तो अपने परिवार का बिजनेस संभाल सकते थे लेकिन उन्होंने पढ़ाई को चुना और आज इस बड़े मुकाम पर पहुंचे हैं.

शुभम को पढ़ाई के अलावा क्रिकेट और सिंगिंग का भी शौक है. परिवार वालों को शुभम के जज बनने से काफी खुशी हो रही है. उनके पिता ने कहा कि शुभम शुरू से ही नियमों को लेकर बहुत सख्त और ईमानदार रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में वे जज के तौर पर अच्छे और निष्पक्ष फैसले लेंगे, क्योंकि परिवार में रहते हुए उन्होंने सही और गलत की पहचान बहुत पहले ही सीख ली है.
ये भी पढ़ें: सिख परिवार ने मस्जिद के लिए दान की अपनी खरीदी जमीन, नमाज़ के लिए 2 किमी दूर नहीं जाना पड़ेगा

