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कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से फूड सर्विस सेक्टर को झटका, रेस्टोरेंट में स्टाफ कम, छोटा हुआ मेन्यू

ईरान से जंग के बीच एलपीजी ने भारत के फूड सर्विस सेक्टर को झटका दिया है. लागत बढ़ने से रेस्टोरेंट ने स्टाफ कम किया है.

LPG Shock hits Indias food service sector restaurants cut staff trim menus as costs surge
प्रतीकात्मक तस्वीर (ANI and IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : April 2, 2026 at 5:30 PM IST

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Updated : April 2, 2026 at 5:48 PM IST

9 Min Read
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सुरभि गुप्ता

नई दिल्ली: ईरान से अमेरिका और इजराइल की छिड़ी जंग का असर भारत की फूड और बेवरेज सर्विस इंडस्ट्री में साफ देखा जा सकता है. यह उद्योग हाल ही में कोरोना महामारी के बाद उत्पन्न पाबंदियों की वजह से मार्केट शेयर में हुए नुकसान के बाद ठीक हो रही थी, अब एक और मुश्किल का सामना कर रही है.

कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ सप्लाई में रुकावटों की वजह से पूरे भारत में रेस्टोरेंट के काम पर असर पड़ रहा है. रेस्टोरेंट को स्टाफ की बढ़ती लागत का भी सामना करना पड़ रहा है. रेस्टोरेंट को चलाने के लिए स्टाफ कम करने, अपने मेन्यू को छोटा करने या मेन्यू की कीमतें बढ़ाने का सहारा ले रहे हैं.

कमर्शियल LPG की बदली हुई कीमतें

LPG Shock hits Indias food service sector restaurants cut staff trim menus as costs surge
कमर्शियल LPG की बदली हुई कीमतें (ग्राफिक्स से समझिए) (ETV Bharat)

रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बहुत कम प्रॉफिट मार्जिन पर चलती है, और ज्यादातर रिटेल आउटलेट पूरे भारत में लाखों लोगों को नौकरी देते हैं, जबकि उनकी इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव का उन पर काफी असर पड़ता है. रेस्टोरेंट के लिए फ्यूल सबसे बड़े ऑपरेटिंग खर्चों में से एक है और एलपीजी की कीमतें अभी बढ़ रही हैं.

ऐसी स्थिति में रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि इसका इस बात पर काफी असर पड़ेगा कि कौन वर्कफोर्स को नौकरी देगा और उन्हें पेमेंट करेगा, साथ ही आखिर में रेस्टोरेंट में खाने की कीमतें भी तय होंगी.

रेस्टोरेंट को चालू रखने के लिए स्टाफ और मेन्यू कम करने पर मजबूर होना पड़ा
रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि एलपीजी की कीमत और सप्लाई में लगातार उतार-चढ़ाव की वजह से उनके पास बने रहने के लिए कड़े कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण देश भर में कई रेस्टोरेंट असल में अपने दरवाजे बंद कर रहे हैं. वे अपने कर्मचारियों की संख्या कम कर रहे हैं या कुछ समय के लिए बंद कर रहे हैं जब तक कि LPG की कीमत और सप्लाई स्थिर नहीं हो जाती.

सदर में दशकों पुराना खाने का बिजनेस चलाने वाले जय प्रकाश राठौर का कहना है कि, सिलेंडर की कमी की वजह से उनका काम लगभग रूक गया है. उन्होंने कहा कि, उनके पास पहले 30 से 35 वर्कर थे, उसमे से ज्यादातर चले गए हैं. हलवाई का काम पूरी तरह से बंद हो गया है.

जय प्रकाश का कहना था कि, इस बिजनेस में उनके 40 से 50 सालों में, उन्होंने ऐसी मुश्किलें कभी नहीं देखीं. कमर्शियल सिलेंडर न मिलने की वजह से, राठौर को घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर रहना पड़ा है, जिन्हें अक्सर 3,000 से 4,000 रुपये की बढ़ी हुई कीमतों पर खरीदा जाता है. कुछ दिनों में, उन्हें बिजनेस चलाने के लिए अपने घर के किचन से सिलेंडर भी इस्तेमाल करने पड़े, जिससे घर का खाना बनाने में दिक्कत हुई.

ऐसी ही परेशानी पूरी दिल्ली में दिख रही है. करोल बाग में चेन्नई फ्लेवर्स चलाने वाले राधेश्याम ने कहा कि ज्यादा कीमत और सप्लाई की कमी की वजह से उनके आउटलेट ने घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि,सिलेंडर के दाम बढ़ने से उन्हें खाने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं और मैन्यू कम करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि, लाल चटनी, रवा डोसा और उत्तपम जैसी चीज़ें बंद कर दी गई हैं क्योंकि उन्हें पकाने में ज्यादा समय लगता है और गैस का इस्तेमाल भी ज्यादा होता है. आउटलेट अब कम चीजें बनाता है और जल्दी बंद हो जाता है. उन्होंने आगे कहा, "पहले, हमारे पास लंबी लाइनें होती थीं. अब हमें किचन चलाने में मुश्किल हो रही है."

इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि ऐसे बदलाव अब कुछ समय के लिए नहीं हैं, बल्कि बचने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं. कई रेस्टोरेंट मेन्यू को फिर से डिजाइन कर रहे हैं ताकि उन चीजों पर ध्यान दिया जा सके जो जल्दी और सस्ती बनें, और ज्यादा एनर्जी लेने वाली डिशेज को हटाया जा सके.

कीमतें बढ़ने से ग्राहकों को हो रही है दिक्कत
ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने से ग्राहकों को इसका असर महसूस होने लगा है. कई खाने की जगहों और स्ट्रीट वेंडर्स ने कीमतें बढ़ा दी हैं, कुछ मामलों में तो पिछले कुछ हफ्तों में कई बार कीमतें बढ़ी हैं. दिल्ली की एक प्रोफेशनल नेहा वर्मा ने कहा कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर उनके कई पसंदीदा रेस्टोरेंट अब चालू नहीं हैं. उन्होंने कहा, "जब भी मैं चेक करती हूं, तो वे कुछ समय के लिए बंद दिखाते हैं. बाद में मुझे पता चला कि उन्हें एलपीजी सिलेंडर का इंतजाम करने में मुश्किल हो रही है." गुड़गांव में, साहिल राणा ने स्ट्रीट लेवल पर भी ऐसा ही ट्रेंड देखा.

एक लोकल चाय वाले ने एक कप की कीमत 10 रुपये बढ़ा दी. राणा ने कहा, "उसने कहा कि उसे सिलेंडर 4,000 रुपये में मिल रहे हैं, ऐसे में वह और कैसे मैनेज करेगा." पारंपरिक बाजारों में स्थिति खास तौर पर गंभीर है. सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि रोज की कमाई पर निर्भर लगभग 60 फीसदी फेरीवाले एलपीजी न मिल पाने की वजह से चले गए हैं.

उन्होंने कहा, "सदर बाजार में, लोगों को पहले 20 से 30 रुपये में पूरा खाना मिल जाता था. आज, यह मुमकिन नहीं है. गरीब ग्राहक जो इतने सस्ते खाने पर निर्भर थे, उन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. उन्होंने सरकार से इस कमी को दूर करने की अपील की.

एलपीजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से संकट शुरू
इस संकट का बड़ा कारण कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी है. 28 मार्च को ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव बढ़ने के बाद से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर और 5 केजी वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर के रेट दूसरी बार बढ़ाए गए हैं. मार्च में 144.5 रुपये की बढ़ोतरी के बाद, अप्रैल में कमर्शियल एलपीजी की कीमतें फिर से लगभग 200 रुपये बढ़ गईं. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने अब दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,078.5 रुपये कर दी है, जो 7 मार्च की कीमत 1,883 रुपये से 195.5 रुपये ज्यादा है. इसी तरह की बढ़ोतरी मेट्रो शहरों में भी देखी गई, मुंबई में 196 रुपये, चेन्नई में 203 रुपये और कोलकाता में 218 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

घरेलू (14.2 kg) एलपीजी सिलेंडर की कीमतें वैसी ही हैं. घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ी है. सऊदी अरब का कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP), जो LPG के लिए अहम भूमिका निभाता है, मार्च से अप्रैल तक लगभग 44 फीसदी से बढ़कर 542 डॉलर से 780 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया है. क्योंकि भारत LPG इंपोर्ट पर निर्भर है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव का स्थानीय स्तर पर तुरंत असर पड़ता है.

वेस्ट एशिया से सप्लाई चेन में रुकावटें
वेस्ट एशिया में भू-राजनैतिक तनाव की वजह से LPG की कीमत बढ़ गई है. इस इलाके में तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से फ्लो में रुकावट आई है, जो पूरी दुनिया के लिए एक जरूरी सेलिंग रूट है. इंडस्ट्री के अधिकारियों का मानना ​​है कि LPG की दुनिया भर में सप्लाई का 20 से 30 फीसदी अब या तो कंजेशन या भू-राजनैतिक अनिश्चितता की वजह से प्रभावित होगा और इसकी वजह से LPG की उपलब्धता बाजार की मांग से कम हो गई है और LPG की कीमत भी बढ़ गई है.

भारत में खाने-पीने की चीज़ों की सर्विस से जुड़े बिजनेस के लिए, एलपीजी की सप्लाई चेन में रुकावट से तुरंत ऑपरेशनल दिक्कतें पैदा होती हैं. छोटे बिजनेस पर सबसे ज्यादा असर कई जगहों पर मौजूद कई बड़ी कंपनियां इन रुकावटों के तुरंत असर को झेल लेंगी, जबकि छोटे रेस्टोरेंट, टेक-आउट या डिलीवरी आउटलेट पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा. छोटे ऑपरेटरों में एलपीजी की किल्लत का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. इन दिक्कतों के जवाब में, छोटे ऑपरेटर्स को बने रहने के लिए तुरंत और बड़े खर्च में कटौती के तरीके अपनाने पड़ रहे हैं.

बहुत सारे बिजनेस भारी कमी की वजह से कुछ समय के लिए बंद हो गए हैं. वहीं, कई बिजनेस ऐसे हैं जिन्होंने अपनी गतिविधियों को काफी कम कर दिया है. सिर्फ बिजनेस ही इसका असर महसूस नहीं कर रहे हैं. बल्कि कुक, हेल्पर और डिलीवरी करने वाले जैसे वर्कर भी पूरी इंडस्ट्री में स्टाफ में कटौती की वजह से अपनी नौकरी खो चुके हैं।

इंडस्ट्री ने तुरंत सरकारी मदद की मांग की
वहीं, दूसरी तरफ इंडस्ट्री के ज्यादा से ज्यादा स्टेकहोल्डर सरकार से तुरंत एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं. वे तीन मुख्य चीजें मांग रहे हैं: कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतों से तुरंत राहत, सप्लाई का बेहतर समन्वय, और छोटे फूड बिजनेस के लिए टारगेटेड मदद.

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि तुरंत एक्शन लिए बिना, इस इंडस्ट्री पर लंबे समय तक चलने वाले संकट के असर से बड़े पैमाने पर बिजनेस बंद हो जाएंगे और नौकरियां चली जाएंगी, जिससे हाल ही में महामारी से उभरी आर्थिक रिकवरी की संभावना बहुत कम हो जाएगी.

आने वाले हफ्ते भारत में फूड सर्विस इंडस्ट्री के इस हिस्से के लिए बहुत जरूरी होने वाले हैं क्योंकि उन्हें बढ़ती लागत और सप्लाई पाने की अपनी क्षमता को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है.

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Last Updated : April 2, 2026 at 5:48 PM IST