चूहा फैला रहा है खतरनाक संक्रमण! जानें क्या हैं लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण
रांची में चूहों से फैलने वाले लेप्टोस्पायरोसिस के अब तक 130 मामले सामने आ चुके हैं. उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.

Published : August 30, 2026 at 3:32 PM IST
|Updated : August 30, 2026 at 3:48 PM IST
रांची: झारखंड में स्वाइन फ्लू, इन्फ्लूएंजा A H1N1 के बढ़ते खतरे के बीच रांची में एक बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका संबंध सीधे तौर पर चूहों से बताया जा रहा है. इस संक्रमण का नाम 'लेप्टोस्पायरोसिस' (Leptospirosis) है, जिसे आम भाषा में चूहा बुखार भी कहा जाता है. वहीं, पिछले दो महीनों में अब तक 130 बच्चे लेप्टोस्पायरोसिस की चपेट में आ चुके हैं.
कैसे फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस
रानी हॉस्पिटल की चिकित्सक और निदेशक डॉ सोनी सिन्हा बताती हैं कि मुख्य रूप से चूहों और कुछ अन्य जीव के मलमूत्र से लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) फैलता है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष जुलाई से 29 अगस्त तक उनके अस्पताल के इंडोर और आउटडोर में 130 मरीजों में लेप्टोस्पायरोसिस की पहचान कर इलाज किया जा चुका है.
उन्होंने बताया कि संक्रमित चूहों के मलमूत्र से Leptospira नामक बैक्टीरिया इंसान तक पहुंचता है. जब इस बैक्टीरिया से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में कोई व्यक्ति आता है तो उसके भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है.

कैसे बढ़ता है संक्रमण का खतरा
डॉ सोनी सिन्हा ने बताया कि संक्रमित चूहे और कुछ अन्य जानवर अपने पेशाब के जरिए इस बैक्टीरिया को वातावरण में छोड़ सकते हैं. बारिश के दौरान जब यह पेशाब पानी या मिट्टी को दूषित करता है, तो उसके संपर्क में आने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बारिश के समय में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है. नंगे पैर चलना या दूषित पानी में लंबे समय तक रहना इस बीमारी के होने की संभावना को बढ़ा देता है. संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द इस बीमारी के मुख्य लक्षण है.

लेप्टोस्पायरोसिस के क्या है लक्षण
वहीं, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बिमलेश कुमार सिंह ने सदर अस्पताल में लेप्टोस्पायरोसिस इलाज की सभी सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया है. उन्होंने कहा कि लेप्टोस्पायरोसिस में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा जैसे लक्षण हो सकते हैं. शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, इसलिए कई बार मरीज इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते हैं.
बारिश में बढ़ा जोखिम
उन्होंने बताया कि गंभीर संक्रमण की स्थिति में किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं और मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है, इस स्थिति में यह बीमारी खतनाक हो जाती है. रांची के निजी अस्पताल रानी हॉस्पिटल में जुलाई से अब तक करीब 130 मरीजों का लेप्टोस्पायरोसिस के लिए इलाज होना इस बीमारी को लेकर सतर्कता बढ़ाने वाला आंकड़ा है. हालांकि हर बुखार लेप्टोस्पायरोसिस नहीं होता, लेकिन यदि बारिश या जलजमाव के दौरान दूषित पानी के संपर्क के बाद बुखार और शरीर में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर को पानी के संपर्क की जानकारी जरूर देनी चाहिए.

लेप्टोस्पायरोसिस से कैसे करें बचाव
डॉ सोनी सिन्हा बताती हैं कि जलजमाव और गंदे पानी से अनावश्यक संपर्क से बचें. जरूरत पड़ने पर रबर के जूते, चप्पल और दस्ताने जैसे सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल करें, शरीर पर कट या घाव को ढककर रखें और दूषित पानी के संपर्क के बाद साबुन और साफ पानी से त्वचा को अच्छी तरह धोएं. इसके अलावा चूहों को अपने आवास स्थल से दूर रखने का प्रयास करें. बारिश के मौसम में चूहों की मौजूदगी वाले स्थानों और दूषित पानी से दूरी बनाना लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
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