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वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भूस्खलन से तबाही: 3 लोगों की मौत, 18 घायल... लापता 5 लोगों की तलाश जारी

वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भूस्खलन की खबर है. भूवैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यहां भूस्खलन की संभावना है.

Landslide in Wayanad
वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भारी बारिश से भूस्खलन, (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 7, 2026 at 2:20 PM IST

8 Min Read
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वायनाड (केरल): वायनाड में मेप्पाडी के पास कल्लाडी में मंगलवार को भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन में कई मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. इस घटना में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. हादसे में 18 लोग घायल हुए हैं. उनमें से घायल 9 लोगों को मेप्पाडी विम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बचाव अभियान जारी है. वहीं, बचाव दल इलाके में लापता 5 लोगों की तलाश कर रहे हैं.

यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ, जहां मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा था. अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय निवासियों ने घटनास्थल से तीन लोगों को बचाया है.

वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भारी बारिश से भूस्खलन (ETV Bharat)

घायलों की पहचान कूडम्मल (तमिलनाडु), कुंजू (मलयाली), सूरज यादव (बिहार), संजय ठाकुर, रजनीश, दिलीप, हीरा कुमार, तन्मय घोष (ये लोग वायनाड के VIMS हॉस्पिटल में भर्ती हैं) के रूप में हुई है. अस्पताल का कहना है कि, एक व्यक्ति की हालत गंभीर है.

भूस्खलन में मरने वाली की पहचान 37 साल के चंद्रभान पाल, 25 साल के अनमोन डोडारे, 40 साल के बिकाश कुमार सिंह के तौर पर हुई है. चंद्रभान और बिकास मध्य प्रदेश के रहने वाले थे. वहीं अनमोन डोडारे के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाई है.

दुर्घटना में लापता लोग
मोहम्मद इमरान, बिक्रम सिंह राणा, राहुल शर्मा, राकेश, अंसारी

दुर्घटना के बाद इलाज करा रहे लोग
रजनीश (27), दिलीप (19), सूरज यादव (25), संजय ठाकुर (35, हीरा कुमार (32) तनमय जोशी (28), कूडम्मल जया (37), कंजू (39), संतोष एस. ए. (55)

यह वह स्थान है, जहां सुरंग परियोजना से जुड़े श्रमिक रह रहे थे. उन्होंने बताया कि इलाके में कुछ मकान और होमस्टे भी हैं. इसके अलावा, भूस्खलन में सुरंग परियोजना के कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाले कुछ वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए.

बचाव अभियान के लिए पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों को भी तैनात किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि मंत्री टी. सिद्दीक और जिला कलेक्टर तलाशी अभियान की निगरानी कर रहे हैं तथा यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रभावित क्षेत्र में और कितने लोग फंसे हुए हैं. मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी परियोजना पर काम पिछले साल शुरू हुआ था.

गाड़ियां जमीन के नीचे फंसी हुई हैं
ऐसी भी खबरें हैं कि गाड़ियां जमीन के नीचे फंसी हुई हैं. यहां कुछ लोगों को बचा लिया गया है. एनडीआरएफ फायर सर्विस और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) मौके पर पहुंच गई है. मीनाक्षी ब्रिज के पास हुए हादसे में गाड़ियां और निर्माण कार्य का सामान पूरी तरह से दब गया. मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के निर्देश पर मंत्री ए.पी. अनिलकुमार और टी. सिद्दीकी वायनाड के दौरे पर हैं.

भारी तबाही के आसार
अनक्कमपोयिल-कल्लडी-मेप्पाडी टनल के निर्माण के लिए पत्थर तोड़े जाने के दौरान ऊपर से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर गिर गए. शक है कि तीस से पचास मजदूर जमीन के नीचे फंसे हुए हैं. निर्माण कंपनी के कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल होने वाले कंटेनर, मजदूरों के साथ आई बस, कार और मिट्टी हटाने वाली मशीनें पूरी तरह से जमीन के नीचे दब गईं.

कुछ पीड़ितों को स्थानीय लोगों ने एक हिम्मत वाले रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाया. उनमें से एक का पैर कटा हुआ है. घायलों को प्राथिमिक उपचार के लिए हैरिसन मलयालम एस्टेट अस्पताल ले जाया गया है. दूसरी तरफ लोगों के फंसे होने का शक होने के बाद तलाश तेज कर दी गई.

बारिश रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौती बनी
खराब मौसम और भारी बारिश रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव अभियान) में बड़ी रुकावट बन रही है. मलबे को हटाने वाली मशीनों का इस्तेमाल करके मिट्टी हटाने के बाद ही और लोगों को बचाया जा सकता है.

यातायात बाधित
खबर है कि, भूस्खलन के कारण इलाके में सड़क यातायात पूरी तरह से बाधित हुआ है. मीनाक्षी ब्रिज के पास छोटी नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो कि चिंता का विषय है.

लगभग 100 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया
इस प्राकृतिक खतरे को देखते हुए, आस-पास के इलाकों के घरों से लगभग 100 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है. चूंकि यह मॉनसून टूरिस्ट क्षेत्र भी है, इसलिए अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या पर्यटक खतरे में हैं.

जिस इलाके में टनल बन रही है, पारिस्थितिक रूप से बहुत जरूरी है. भूवैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यहां भूस्खलन की संभावना है. चश्मदीदों का कहना है कि, बारिश के कारण पहाड़ दरकने लगा और मलबा चारो तरफ फैल गया. भूस्खलन के कारण बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन पर असर पड़ा है.

बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करना
मंत्री टी सिद्दीकी ने कहा कि यह हादसा बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करने की वजह से हुआ. मंत्री टी सिद्दीकी ने मीडिया को बताया कि यह हादसा वायनाड में एक टनल के कंस्ट्रक्शन से जुड़े बिना वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी जमा करने की वजह से हुआ. चेतावनी दी गई थी कि थोड़ी सी बारिश में हादसा हो सकता है. इसको लेकर कोई जरूरी कदम नहीं उठाया गया.

उन्होंने कहा कि, निर्देशों के बावजूद, कोई सही से प्रगति नहीं हुई. उन्होंने कहा कि, सरकार इस मामले को देखेगी. मंत्री ने कहा कि काम रोकने और मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए हैं. इस घटना में घायल दूसरे राज्यों के छह मजदूरों का इलाज चल चल रहा है.

'एनडीआरएफ टीम जल्द ही मौके पर पहुंचेगी': एपी अनिल कुमार
कल्लाडी टनल कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए लैंडस्लाइड में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. घायल लोगों को रेस्क्यू करके मेप्पाडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.

राजस्व मंत्री एपी अनिलकुमार ने घोषणा की कि नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) जल्द ही मौके पर पहुंचेगी. वायनाड से इसके अलावा, कोझिकोड से एक और टीम भी वायनाड लौट आई है.

भारी बारिश और ट्रैफिक जाम की वजह से बचावकर्मियों को मौके पर पहुंचने में थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं. हालांकि, स्थानीय स्तर पर बचाव का काम जारी है. लैंडस्लाइड उन शेड के ऊपर हुआ जहां मजदूर रह रहे थे. हादसा कितना बड़ा था, इसका अभी पता नहीं चला है. जिला कलेक्टर समेत अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं.

रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे सही ढंग से बढ़ाने के लिए विधायक आईसी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में कल्लाडी में एक बैठक हुई. वहीं, राजस्व मंत्री एपी अनिल कुमार और जिले के मंत्री टी सिद्दीकी मौके पर कैंप कर रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन की देखरेख कर रहे हैं.

वहीं, भूस्खलन के बाद मेप्पाडी-चुरलमाला रोड पर ट्रैफिक पूरी तरह से ब्लॉक हो गया है. लैंडस्लाइड के दौरान मीनाक्षी ब्रिज पर गिरी मिट्टी को हटाने की कोशिशें जारी हैं. फंसे हुए लोगों को ढूंढने के लिए राज्य पुलिस के स्निफर डॉग्स को मौके पर लाया जा रहा है.

पुल के दोनों तरफ फंसे हुए स्थानीय लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए मुंडकाई फॉरेस्ट स्टेशन और चुरलमाला पल्ली हॉल में सुविधाओं का इंतजाम किया गया है. स्कूल जाने वाले बच्चों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए कदम उठाए गए हैं.

इलाके में बारिश की वजह से टनल का निर्माण का काम नहीं हो पा रहा था. जिला प्रशासन ने पहले ही टनल का कंस्ट्रक्शन का काम रोकने का निर्देश दिया था. एराटुकुंड, अट्टामाला, मम्मिकुन और अंबेडकर उन्नति के लोगों को भी सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जाएगा.

मीनाक्षी ब्रिज से मिट्टी हटाने के बाद, पीडब्ल्यूडी को ब्रिज की सेफ्टी चेक करने और पक्का करने का निर्देश दिया गया है. रिव्यू मीटिंग में तिरुवंबडी विधायक सी. के कासिम, जिला पंचायत प्रेसिडेंट चंद्रिका कृष्णन, जिला कलेक्टर डीआर मेघश्री, जिला पुलिस चीफ देवा मनोहर, एडीएमके अजीश, सब कलेक्टर अतुल सागर, वार्ड सदस्य जितिन, जन प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे.

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