जमीन के लिए नौकरी का लालच, आखिर कैसे फंस गया लालू परिवार !, जानिए लैंड फॉर जॉब केस के फैसले की10 बड़ी बातें
लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में कोर्ट ने RJD सुप्रीमो लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 40 के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं.

Published : January 10, 2026 at 3:26 PM IST
|Updated : January 10, 2026 at 4:37 PM IST
नई दिल्ली/संजय कुमार: लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, और उनके बेटों-बेटियों समेत 40आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह एक संगठित साजिश का मामला नजर आता है.
स्पेशल जज ने अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और बयानों से 'गंभीर संदेह' पैदा होता है, जो आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है. अदालत ने यह भी कहा कि "यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि एक सुव्यवस्थित तरीके से किया गया अपराध था जिसमें पूरा परिवार और करीबी सहयोगी शामिल थे." सुनवाई के दौरान तेजस्वी यादव, मीसा भारती और तेज प्रताप यादव व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद थे, जबकि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए.

लालू परिवार के लिए फैसले की 10 बड़ी बातें
- पूरे परिवार पर तय हुए आरोप: कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं (धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है.
- 'क्रिमिनल सिंडिकेट' की तरह काम: जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक 'आपराधिक सिंडिकेट' की तरह काम कर रहा था, जिसका उद्देश्य सरकारी संसाधनों का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना था.
- रेलवे को बनाया 'निजी जागीर': अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से पता चलता है कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया, जहां नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए गए.
- नौकरी को बनाया 'बार्गेनिंग चिप': आदेश में उल्लेख किया गया कि रेलवे की 'ग्रुप-डी' की नौकरियों को जमीन हथियाने के लिए 'बार्गेनिंग चिप' (सौदेबाजी का हथियार) के रूप में इस्तेमाल किया गया. उम्मीदवारों को नौकरी तभी मिली जब उन्होंने अपनी जमीन लालू परिवार को ट्रांसफर की.
- डिस्चार्ज याचिका खारिज: अदालत ने लालू परिवार द्वारा दायर उस याचिका को पूरी तरह से 'अनुचित' बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने खुद को इस मामले से बरी करने की मांग की थी.
- गंभीर साजिश: जज ने पाया कि इस पूरे घोटाले के पीछे एक व्यापक और गहरी साजिश रची गई थी, जिसमें लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी (जैसे भोला यादव) भी शामिल थे.
- करोड़ों की जमीन लाखों में ली: सीबीआई की चार्जशीट का हवाला देते हुए कोर्ट ने नोट किया कि सर्किल रेट के हिसाब से जो जमीन 4.39 करोड़ रुपये से अधिक की थी, उसे लालू परिवार ने मात्र 26 लाख रुपये में हासिल कर लिया.
- 41 आरोपियों पर चलेगा ट्रायल: कोर्ट ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाने का रास्ता साफ कर दिया है. हालांकि, सबूतों के अभाव में 52 अन्य आरोपियों (जिनमें कुछ रेलवे अधिकारी और वे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने जमीन नहीं दी थी) को बरी कर दिया गया है.
- आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग: अदालत ने माना कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि लोक सेवक के रूप में अपनी शक्तियों के घोर दुरुपयोग का है, ताकि परिवार के लिए अचल संपत्तियां जुटाई जा सकें.
- ट्रायल की तारीख तय: अदालत ने 23 से 29 जनवरी 2026 के बीच की तारीखें तय की हैं, जिसके बाद ट्रायल की नियमित सुनवाई शुरू होगी.

लैंड फॉर जॉब स्कैम में कब क्या हुआ?
सीबीआई और ईडी ने 2020 के बाद लैंड फॉर जॉब मामले में बिहार और दिल्ली के कई ठिकानों पर छामेपारी की. इसके बाद, 18 मई 2022 को सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज किया. 7 अक्टूबर, 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. सीबीआई ने 7 जून, 2024 को इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल किया था, जिसमें 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इन 78 आरोपियों में से रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल थे.

क्या है 'लैंड फॉर जॉब' मामला ?
बता दें कि यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे. आरोप है कि उस दौरान बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे जबलपुर, मध्य प्रदेश) में 'ग्रुप-डी' के पदों पर नियुक्तियां की गईं. इन नियुक्तियों के बदले में, पटना और अन्य शहरों में उम्मीदवारों या उनके परिवारों की जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों के नाम या उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर कराई गई थी.

सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई. एजेंसी का आरोप है कि यह जमीन लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई थी.
ये भी पढ़ें:

