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मस्ती के लिए मौत को दावत देते लोग, सेल्फी लेने गए कई लोग वापस नहीं लौटे

कुल्लू की ब्यास नदी में सेल्फी का शौक जानलेवा साबित हो रहा है. पिछले डेढ़दशक में 150 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

साइन बोर्ड को पर्यटक करते हैं अनदेखा
साइन बोर्ड को पर्यटक करते हैं अनदेखा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 2, 2026 at 9:17 PM IST

8 Min Read
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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में अब पर्यटन सीजन की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में अब विभिन्न राज्यों से मनाली आने वाले सैलानियों की संख्या भी बढ़ रही है. सैलानी यहां पर रिवर राफ्टिंग के अन्य साहसिक गतिविधियों का भी मजा ले रहे हैं. कुल्लू में बहने वाली ब्यास नदी की ठंडी धारा भी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, लेकिन ब्यास नदी के किनारे जाकर फोटोग्राफी और मस्ती करने का जुनून सैलानियों की जान पर भारी पड़ रहा है.

मई 2024 में नेहरू कुंड में मध्यप्रदेश की एक महिला पर्यटक रुचि तिवारी नदी किनारे एक चट्टान पर चढ़कर सेल्फी ले रही थी. अचानक पैर फिसलने से वो नदी में गिर गई. उसे बचाने के लिए हैदराबाद का एक युवक सौरभ शाह भी पानी में कूद गया, लेकिन तेज बहाव के कारण दोनों बह गए. ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है ऐसे कई हादसे हार साल होते हैं. साल 2021 के सितम्बर माह में दिल्ली की 37 साल की महिला प्रीति अपने बेटे रेहान के साथ नदी किनारे फोटो खींच रही थी, लेकिन फोटो खींचते हुए दोनों का पैर फिसल गया और वो ब्यास नदी के बहाव में बह गए.

रिज पर स्थापित वाईएस परमार की प्रतिमा
आदेशों की धज्जियां उड़ाते पर्यटक (ETV Bharat)

डेढ़ दशक में 150 लोगों की मौत

ब्यास हिमाचल की जीवनदायिनी नदी है और 12 महीने बहती है, लेकिन लोगों की लापरवाही ने इसे मौत की नदी बना दिया है. सिर्फ कुल्लू में ही बीते डेढ़ दशक में ब्यास नदी में बह जाने से 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. दरअसल इन मौतों के पीछे का कारण पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों की अवहेलना और लापरवाही है. साल 2014 में लारजी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पानी छोड़ने से 24 इंजीनियरिंग छात्र नदी में डूब गए थे, जो ब्यास नदी में सबसे बड़ा हादसा था. ये छात्र भी मनाली घूमने आए थे और नदी में मस्ती करने के लिए उतरे थे.

नदी में इस तरह उतरना हो सकता है खतरनाक
नदी में इस तरह उतरना हो सकता है खतरनाक (ETV Bharat)

हादसों का कारण

इन घटनाओं का सबसे बड़ा कारण नदी के किनारे लगे चेतावनी बोर्ड की अनदेखी करना है. अक्सर पर्यटक रोमांच और मस्ती के चक्कर में नदी के बेहद करीब चले जाते हैं या गीली और फिसलन भरी चट्टानों पर खड़े होकर सेल्फी लेते हैं, जिससे संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है. ढलान दार चट्टानों पर से पैर फिसलते ही ब्यास नदी में गिरना तय है. मैदानी इलाकों की नदियों के मुकाबले पहाड़ी नदियां बहुत तेज और ठंडी होती हैं. ब्यास का पानी बर्फ पिघलने से आता है, जो अत्यधिक ठंडा होता है. इसमें गिरने पर शरीर की मांसपेशियां सुन्न हो सकती हैं, जिससे तैरना लगभग असंभव हो जाता है. इसके अलावा जिला कुल्लू में इन दिनों गर्मियों के कारण तेजी से बर्फ पिघलती है और ब्यास का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है.

आपदा में बह गए साइन बोर्ड

जिला कुल्लू में ट्रैवल एजेंसी के संचालक अभिनव वशिष्ट का कहना है कि 'सैलानियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं और नदी किनारे जाने वाले रास्तों को भी बंद किया गया था, लेकिन साल 2023 और 2025 की आपदा में रास्तों के साथ ये साइन बोर्ड भी बह गए थे. अब घाटी में पर्यटन और बरसात का सीजन शुरू होने वाला है. पहाड़ों पर बर्फ पिघलने से जलस्तर भी बढ़ेगा. प्रशासन को चाहिए कि वह बजौरा से मनाली तक एक बार फिर से ब्यास नदी का निरीक्षण करें और जो रास्ते नदी की ओर जाने वाले हैं उन्हें बंद किया जाए, ताकि सैलानियों की सुरक्षा बनी रह सके.'

जान जोखिम में डालते पर्यटक
जान जोखिम में डालते पर्यटक (ETV Bharat)

अनदेखा और छिपा हुआ खतरा

ब्यास नदी पर कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं, जब इन बांधों से अचानक पानी छोड़ा जाता है, तो नदी का जलस्तर कुछ ही सेकंडों में कई फीट बढ़ जाता है. 2014 की हैदराबाद छात्रों वाली त्रासदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. कई बार बांध से पानी छोड़ने से पहले सायरन या चेतावनी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती. साथ ही, नदी के किनारे हर जगह फेंसिंग लगाना संभव नहीं है, जिससे पर्यटकों को पानी तक पहुंचने से रोकना मुश्किल हो जाता है. कई बार स्थानीय लोग भी खनन, आर्थिक गतिविधियों में संलिप्त होते हैं और अचानक डैम से पानी छोड़ने के कारण ब्यास की धारा की चपेट में आ जाते हैं.

मई 2025 में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला की मणिकर्ण घाटी में स्थित पार्वती जल विद्युत परियोजना (बरशैणी डैम) से बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पानी छोड़ दिया गया. इसके कारण कसोल के पास पार्वती नदी के किनारे टहल रहे दो सैलानी अचानक बाढ़ की चपेट में आ गए और इनकी मौत हो गई.

नदी में नाहने उतरे पर्यटक
नदी में नाहने उतरे पर्यटक (ETV Bharat)

जान जोखिम में डाल रहे पर्यटक

प्रशासन जगह-जगह पर चेतावनी बोर्ड भी लगाता है, लेकिन जिला प्रशासन के आदेशों का धरातल पर कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है. मनाली, मणिकर्ण, कसोल आदि क्षेत्रों में अब तक कई सैलानी नदी किनारे सेल्फी और अठखेलियां करते हुए नदी में बह चुके हैं. हादसे के दौरान हालांकि प्रशासन और विभाग हरकत में आता है, लेकिन धीरे-धीरे फिर व्यवस्था ढीली पड़ जाती है और सैलानी फिर से नदी में उतरकर जान जोखिम में डाल रहे हैं. इन दिनों भी मनाली से लेकर बजौरा तक कई स्थान ऐसे हैं. जहां सैलानी नदी में उतर कर पानी से अठखेलियां कर रहे हैं. जिला कुल्लू के वैष्णो माता मंदिर, बाशिंग, बवेली, रायसन, बाहंग आदि क्षेत्र में पर्यटकों को ब्यास में उतरते देखा जा सकता है. हालांकि प्रशासन के द्वारा कई जगह पर ब्यास नदी की ओर जाने वाले रास्तों को बंद किया गया था, लेकिन बाढ़ के चलते फेंसिंग भी बह गई. अब फिर से सैलानी ब्यास नदी का रुख कर रहे हैं.

पर्यटन गतिविधियों में नियमों की अनदेखी

पर्यटकों की लापरवाही के अलावा पर्यटन गतिविधियों में नियमों की अनदेखी भी लोगों पर भारी पड़ती है. अक्टूबर 2021 में वाशिंग के पास राफ्ट पलटने से मुंबई की 2 युवतियों की मौत हुई थी, जबकि इस हादसे में 4 युवतियां घायल हुई थीं. जिला कुल्लू में राफ्टिंग का कारोबार कर रहे सुरेश शर्मा का कहना है कि 'जब भी सैलानियों को राफ्ट पर बिठाया जाता है तो उन्हें सभी नियमों से अवगत करवाया जाता है, लेकिन कई बार ब्यास नदी की धारा में सैलानी राफ्ट के पलटने के डर से नदी में कूद जाते हैं. ऐसे में राफ्ट के पायलट को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार सैलानी अपनी मनमानी करते हैं, जिससे उन्हें जान का भी खतरा बना रहता है.'

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नियमों की अवहेलना कर नदी में उतरे पर्यटक (ETV Bharat)

पुलिस ने बढ़ाई गश्त

एसपी कुल्लू मदन लाल कौशल ने बताया कि 'पर्यटन सीजन को देखते हुए अब सड़कों पर पुलिस की गश्त को भी बढ़ाया गया है, जो भी रिवर राफ्टिंग पॉइंट हैं, वहां पर भी पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है सैलानियों को नियमों की जानकारी दी जा रही है सैलानियों और राफ्ट संचालकों की मनमानी पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.'

फ्लैश फ्लड से होते हैं हादसे

वहीं, मानसून के दौरान बादल फटने या भारी बारिश के कारण अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड भी इन हादसों का बड़ा कारण बनते है. नदी के किनारे जाते समय हमेशा स्थानीय गाइड की मदद लें और पत्थरों पर चढ़ने के बजाय प्रशासन की और से निर्धारित सुरक्षित स्थानों से ही नदी की खूबसूरती का आनंद लें.

वहीं, उपायुक्त कुल्लू ने कहा कि जिले में पर्यटन सीजन को को लेकर सभी विभागों के साथ होने वाली बैठकों में इन तमाम पहलुओं को लेकर निर्देश दिए जाते हैं. आने वाले समय में भी इस तरह की कोई घटना न हो. इसको लेकर संबंधित विभागों को निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन न हो और पर्यटकों के साथ हादसे भी न हो.

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