होर्डिंग विवाद: कोलकाता पुलिस ने TMC सांसद डेरेक ओब्रायन को पूछताछ के लिए बुलाया
कोलकाता में कामाक स्ट्रीट पर होर्डिंग हटाने के दौरान हुई घटना के समय TMC सांसद डेरेक ओब्रायन भी मौके पर मौजूद थे.

Published : August 30, 2026 at 8:18 PM IST
कोलकाता: कामाक स्ट्रीट (Camac Street) पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक विशाल होर्डिंग को हटाने के दौरान बीते गुरुवार को हुई अफरा-तफरी और हंगामे की आंच अब राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन (Derek O’Brien) तक पहुंच गई है. अभिषेक बनर्जी के बाद, कोलकाता पुलिस ने अब डेरेक को भी पूछताछ के लिए तलब किया है. रविवार को पुलिस अधिकारी नोटिस देने के लिए प्रिंस अनवर शाह रोड स्थित उनके आवास पर पहुंचे. पुलिस ने उन्हें सोमवार को पेश होने का निर्देश दिया है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शेक्सपियर सरानी थाने के पुलिस अधिकारी रविवार सुबह करीब 9 बजे डेरेक के घर पहुंचे. उनके कुछ बार बुलाने के बाद, सांसद का एक प्रतिनिधि बाहर आया और उसे कानूनी पुलिस नोटिस दिया गया.
कामाक स्ट्रीट घटना के दौरान डेरेक मौके पर मौजूद थे; आरोप है कि उन्होंने पुलिस के साथ झगड़ा और हाथापाई की. पुलिस इस मामले में उनसे पूछताछ करना चाहती है.
इससे पहले, शनिवार रात को पुलिस अभिषेक बनर्जी के कालीघाट घर पर समन देने गई थी. दरअसल, कोलकाता पुलिस ने अब कामाक स्ट्रीट घटना के बारे में तृणमूल के दो प्रमुख नेताओं को पूछताछ के दायरे में ले लिया है.
यह घटना बीते गुरुवार को तब शुरू हुई जब कोलकाता नगर निगम (KMC) के विज्ञापन विभाग के कर्मचारी 9 कामाक स्ट्रीट पर तृणमूल ऑफिस में लगे एक बड़े बिलबोर्ड को हटाने पहुंचे. उनके साथ पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी भी थी. KMC का दावा था कि बिलबोर्ड गैर-कानूनी तरीके से लगाया गया था.
नगर निगम के कर्मचारी इसे हटाने के लिए गैस कटर लेकर मौके पर पहुंचे. हालांकि, बिलबोर्ड हटाने को लेकर एक तरफ तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों और दूसरी तरफ पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई.
पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया. यहां तक कि एक पुलिस अधिकारी का सरकारी वॉकी-टॉकी छीनने और उन पर हमला करने के भी आरोप लगे. हालात को काबू में करने के लिए और पुलिस फोर्स भेजी गई. इसके बाद, पार्क स्ट्रीट और शेक्सपियर सरानी पुलिस स्टेशनों में कुल तीन FIR दर्ज की गईं. इन मामलों में अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन और वैश्वानर चटर्जी समेत कई तृणमूल नेताओं के नाम शामिल हैं.
दूसरी तरफ, तृणमूल ने जवाबी आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों ने बिना किसी सही आदेश के पार्टी ऑफिस में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की. घटना वाले दिन, डेरेक ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया कि नगर निगम द्वारा जारी नोटिस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे और फोटो अटैच होने के दावे के उलट, असल में ऐसी कोई तस्वीर शामिल नहीं थी. उन्होंने आरोप लगाया कि लंबी बातचीत के बाद भी, पुलिस जबरदस्ती इमारत में घुस गई, जिससे सीढ़ियों पर हाथापाई हो गई. उन्होंने कहा कि हंगामे के दौरान वह खुद गिर गए.
तृणमूल इस घटना को सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई मानने से इनकार करती है. डेरेक ने आरोप लगाया कि यह रेड राजनीतिक मकसद से की गई थी, और दावा किया कि तृणमूल की स्टूडेंट-यूथ रैली से ठीक एक दिन पहले यह कार्रवाई करने के पीछे एक राजनीतिक एजेंडा था.
कामाक स्ट्रीट बिलबोर्ड घटना के संबंध में, तृणमूल पहले ही पुलिस और नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट जा चुकी है. हालांकि पार्टी ने अंतरिम सुरक्षा मांगी थी, लेकिन जस्टिस राजा बसु चौधरी की पीठ ने इस चरण पर याचिका स्वीकार नहीं की. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आशंका के आधार पर आदेश जारी नहीं किए जा सकते. सभी संबंधित पार्टियों को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, और कोर्ट ने बिल्डिंग के मालिकाना हक से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच का भी आदेश दिया है.
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