नई नवेली दुल्हन को पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनानी चाहिए? क्या है पौराणिक मान्यता, जानें
बिहार में होली में नई नवेली दुल्हन अपनी पहली होली पति के साथ ससुराल में नहीं एक अनोखी परंपरा निभायी जाती है.

Published : March 4, 2026 at 5:00 PM IST
दरभंगा: पूरे देश के अलग-अलग हिस्से में इस समय होली की धूम मची है. होली हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो खुशियों, रंगों और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. इस दिन का इंतजार सभी को बेसब्री से रहता है. इस दिन लोग एक-दूसरे के चेहरे पर रंग लगाकर प्यार और स्नेह के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है.
होली में कई मान्यताएं: होली का पर्व हर साल फाल्गुन पूर्णिमा पर मनाया जाता है. चूंकि इस वर्ष चंद्र ग्रहण लगने के कारण सोमवार को ही देश के कई हिस्से में होलिका दहन का कार्यक्रम हो गया, जिस कारण होली पर्व बुधवार को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में सभी त्योहारों से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं और परंपराएं होती हैं.
दुल्हन को ससुराल में नहीं मनानी चाहिए होली: इसी तरह होली की एक मान्यता नई-नवेली दुल्हन से भी जुड़ी हुई है. मान्यता के अनुसार, शादी के बाद नई दुल्हन की अपनी पहली होली अपने ससुराल में नहीं माननी चाहिए, बल्कि शादी के बाद नई दुल्हन को पहली होली हमेशा अपने मायके में ही मनानी चाहिए.
क्या है पौराणिक मान्यता: गांव के बुजुर्ग के अनुसार, होलिका के आग में बैठने के अगले दिन उसका विवाह होना था. जब होलिका की होने वाली सास बारात लेकर पहुंची, तो उसने होलिका की चिता को जलते हुए देखा. इसके बाद से हिंदुओं में होली पर नई बहू के मायके जाने की परंपरा शुरू हो गई और तब से आज भी नई बहू अपने ससुराल में पहली होली नहीं देखती. नई दुल्हन को पहली होली से कुछ दिन पहले उसके मायके भेज दिया जाता है, जिसके बाद वह अपने मायके में होली मनाती है.

वहीं मिथिला में मैथिल ब्राह्मणों में रस्म है कि दामाद की पहली होली ससुराल में मनती है. दामाद के स्वागत में होली के अवसर पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं. पहली होली में दामाद को कई तरह के उपहार भी ससुराल की तरफ से मिलते हैं. इसके पीछे के कारणों के बारे में कहा जाता है कि लड़का अपनी पत्नी के परिवार को ठीक से समझ सके इसलिए यह आवश्यक होता है.
नई दुल्हन ने क्या कहा: वहीं इस परंपरा को निर्वहन करते हुये अपने मायके दरभंगा जिला के जखरा आई श्रेता कुमारी ने बताया कि जो परंपरा है उसको निभाना हमलोगों का फर्ज हैं. हमारे यहां पहली होली ससुराल में नहीं होती है तो मायके यानि अपने घर आ गए हैं.
"वैसे अपना बचपन जहां बीता है, वहां की होली का अलग ही बात होती है. सबके साथ होली खेलते हैं. मेरे पति का रंग से मन नहीं भरा तो गोबर डाल कर ही होली खेली है तो इसका अलग मजा भी है और मान्यता भी है."- श्रेता कुमारी, नई नवेली दुल्हन

दामाद ने ससुराल में मनायी पहली होली: वहीं दरभंगा जिला के जुरौना से ससुराल (जखरा) गए निलेश कुमार ने बताया कि ससुराल की होली के बारे में सुनते थे. शादी के बाद यह पहली होली है. छुट्टी लेकर इस होली का आनंद लेने आए हैं.
"खूब मजा आ रहा है. खूब रंग खेले हैं. अच्छे-अच्छे पकवान बन रहें हैं. वहीं साली और साला सबके साथ रंग खेलकर बहुत अच्छा लगा."- निलेश कुमार, दामाद
सास ने क्या कहा?: वहीं लड़की की मां चुनचुन देवी ने बताया कि "परंपरा के अनुसार हम अपनी बेटी की सास को बोले जो आने दीजिये. पहली होली मायके में ही होती है तो बेटी और दामाद आए हैं. अच्छा-अच्छा पकवान सब बन रहा है."
सास-बहू को नहीं देखना चाहिए साथ में होलिका दहन: सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार नवविवाहित दुल्हन अपनी पहली होली अपने मायके में मनाती है. इसका कारण यह बताया जाता है कि पहली होली पर कभी भी सास-बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. इससे सास-बहू के रिश्ते में खटास आ सकती है.
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