कम बारिश भी पहाड़ को दे रही बड़े जख्म, इस साल भी मानसून ले चुका 55 लोगों की जान, जानिए कितना हुआ नुकसान
इस साल सामान्य से कम बारिश भी उत्तराखंड को कई बड़े जख्म देकर जा रही है. हालांकि अभी मानसून विदा नहीं हुआ. रिपोर्ट-किरणकांत शर्मा

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : September 3, 2026 at 2:34 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ चुका है, लेकिन जाते हुए भी मानसूनी बारिश बड़े जख्म दे रही है. दो सितंबर तक के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल भी मानसून में पहाड़ों कई बड़े जख्म दिए हैं. आंकड़े बताते हैं कि इस साल बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी घटनाओं में 55 लोगों की मौत हो चुकी है.
एक सितंबर को कई लोगों की जान गई: बीती एक सितंबर को कुदरत ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी आसमानी कहर बरपाया था. अल्मोड़ा में भारी बारिश के कारण अलग-अलग कारणों से पांच लोगों की मौत हुई थी. अल्मोड़ा के अलावा देहरादून में दो और नैनीताल व उत्तरकाशी जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई थी.
तमक नाला उफनाने से नाले पर बना पुल क्षतिग्रस्त, मलारी से आगे आवाजाही बाधित। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
— Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) August 10, 2026
पुलिस, प्रशासन, SDRF व NDRF की टीमें मौके के लिए रवाना। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। pic.twitter.com/0qgB4mngJx
उजड़ गया पूरा परिवार: अल्मोड़ा जिले में हवालबाग क्षेत्र के उड़यूड़ा गांव में एक सितंबर को तेज बारिश के साथ पहाड़ी से आया मलबा घर में घुस गया. इस आपदा में घर में मौजूद मां और दो बच्चों की मौत हो गई.
देहरादून में बरसाती नाले में बही कार: इसी तरह बारिश का रौद्र रूप देहरादून जिले में भी देखने को मिला था. पहाड़ी से आए पानी के तेज बहाव में एक कार बह गई थी. इस हादसे में राजस्थान के दो छात्रों की जान चली गई.
वजुला में मकान गिरने की सूचना पर SDRF का सर्चिंग अभियान जारी। सूचना मिलते ही पोस्ट सरियापानी की टीम घटनास्थल पर पहुंची और मलबे में दबे संभावित लोगों की तलाश हेतु गहन सर्चिंग शुरू की। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच SDRF जवान लगातार रेस्क्यू प्रयासों में जुटे हैं।#SDRF pic.twitter.com/o9cOkgUULm
— SDRF Uttarakhand Police (@uksdrf) September 1, 2026
जानिए इस साल मानसून ने कितना नुकसान पहुंचाया: इस साल मानसून सीजन में बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की बात की जाए तो प्रदेश में करीब 1,330 से ज्यादा भवन प्रभावित हुए. उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक सितंबर तक प्रदेश में
*🌧️ उत्तराखण्ड में भारी बारिश के चलते सतर्क रहें।*
— SDRF Uttarakhand Police (@uksdrf) August 30, 2026
नदी-नालों, बरसाती गदेरों एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।
🚨 आपात स्थिति में SDRF हेल्पलाइन से संपर्क करें। pic.twitter.com/GXMAJeQCMg
- 23 भवन पूरी तरह ध्वस्त
- 68 भवनों को अत्यधिक नुकसान
- 1,239 भवनों को आंशिक क्षति पहुंच चुकी थी.
- केवल भवनों की श्रेणी में ही 1,330 इमारतें आपदा की चपेट में आ चुकी थीं.
- इसी अवधि में 49 लोगों के घायल होने की भी सूचना थी.
सड़कों भी बाधित हुई: बारिश के कारण लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ जाता है. इसीलिए 2 सितंबर की सुबह तक प्रदेश प्रदेश में दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 172 सड़कें बंद बताई गईं.
🚒 अल्मोड़ा फायर सर्विस की त्वरित कार्रवाई 🚨
— Almora Police Uttarakhand (@almorapolice) September 2, 2026
🌳 क्वारब बाईपास के पास पेड़ गिरने से बाधित सड़क को फायर रेस्क्यू टीम ने वुडन कटर से हटाकर यातायात सुचारू कराया। मौके पर 112 टीम भी मौजूद रही।#AlmoraFireService #FireRescue #UttarakhandPolice pic.twitter.com/6WGJgKQt7q
बंद सड़कों का जिलेवार आंकड़ा:
- अल्मोड़ा में 23
- बागेश्वर में 11
- चमोली में 17
- चंपावत में दो
- देहरादून में 15
- नैनीताल में 40
- पौड़ी में 12
- पिथौरागढ़ में 12
- रुद्रप्रयाग में 11
- टिहरी में 15
- उत्तरकाशी में 14 सड़कें प्रभावित हुई थीं.
बारिश कितनी हुई: आठ अगस्त तक उत्तराखंड में मानसून की कुल बारिश 686.4 मिलीमीटर दर्ज हुई थी, जबकि इस अवधि का सामान्य आंकड़ा 703.9 मिलीमीटर था. यानी बारिश करीब दो प्रतिशत कम थी. इसका मतलब यह नहीं कि प्रदेश में बारिश कम होने से खतरा भी कम रहा, लेकिन कुछ इलाकों में इतनी ज्यादा बारिश हुई कि वहां पर आपदा जैसे हालात बने.
🚨 सोमेश्वर में दर्दनाक हादसा 💔
— Almora Police Uttarakhand (@almorapolice) September 1, 2026
ग्राम बड़यूडा में भू-धंसाव से आवासीय भवन में मलबा आने पर पुलिस, SDRF व फायर सर्विस ने करीब 03 घंटे रेस्क्यू अभियान चलाकर 03 लोगों के शव बरामद किए।
SSP अल्मोड़ा ने अस्पताल पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। pic.twitter.com/FbZV9heo5N
अगस्त 2025 की अगस्त 2026 से तुलना: अगस्त 2026 में हुई बारिश की तुलना अगस्त 2025 से करें तो तस्वीर काफी अलग मिलेगी. भारत मौसम विज्ञान विभाग की 2025 मॉनसून रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में उत्तराखंड में भारी या बहुत भारी बारिश की 362 घटनाएं दर्ज हुई थीं. 362 में से 261 भारी बारिश की थी, जबकि 93 बहुत भारी और आठ भारी से बहुत भारी बारिश की थी. वहीं जून में 121 और जुलाई में 156 घटनाएं बारिश की दर्ज हुई. वहीं साल 2025 में पूरे मानसून की बात की जाए तो भारी या बहुत भारी बारिश की करीब 776 घटनाएं दर्ज हुई थीं.
कुल मिलकार कहा जा सकता है कि उत्तराखंड पर बारिश के लिहाज से अगस्त का महीना भारी पड़ता है. आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं. मौसम विभाग के अनुसार अगस्त साल 2025 में उत्तराखंड में सामान्य से करीब 149 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई थी. हालांकि इस साल अगस्त 2026 में हालात पिछले साल के मुकाबले थोड़े उल्टे हैं. क्योंकि इस साल अगस्त महीने में पूरे प्रदेश में बारिश सामान्य से भी थोड़ी कम हुई है.
3गोपेश्वर- चोपता सड़क मार्ग बैरागना के पास मलबा आने के कारण अवरुद्ध हो गया है pic.twitter.com/8Y26IMUcuz
— Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) September 2, 2026
कुछ और आंकड़ों पर नजर डालते हैं: बीते साल 2025 में भी मानसून कई बड़े जख्म देकर गया था. एक जून से एक सितंबर 2025 तक आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 77 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 108 लोग घायल हुए थे. जबकि 95 लोग लापता हो गए थे. इसमें उत्तरकाशी जिले के घराली भी घटना भी शामिल है.

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक इस दौरान 1,828 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 229 मकान पूरी तरह ध्वस्त और 71 मकान आधे से अधिक क्षतिग्रस्त बताए गए थे. 252 सड़कें भी प्रभावित हुई थीं. 2025 के अगस्त अंत में राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन में मानसून से 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की बात कही थी.
क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक: मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक सीएस तोमर का कहना है कि
साल 2026 की सबसे बड़ी सीख यही है कि औसत बारिश का आंकड़ा पहाड़ों की वास्तविक स्थिति नहीं बताता है. राज्य में बारिश सामान्य से नीचे हो सकती है, लेकिन किसी एक घाटी, गांव या शहर के छोटे हिस्से में कुछ घंटों में इतनी बारिश हो सकती है कि बरसाती गदेरे नदी बन जाएं. सड़कें बह जाएं और मकान मलबे की चपेट में आ जाएं. एक सितंबर की घटनाएं इसका ताजा उदाहरण हैं. इसलिए इस साल मानसून को पिछले साल से हल्का कहना सिर्फ बारिश के कुल आंकड़े के आधार पर सही नहीं होगा.
-सीएस तोमर, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून-
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक सीएस तोमर के अनुसार व्यापक स्तर पर 2025 अधिक असामान्य और वर्षा-प्रधान रहा, लेकिन 2026 में स्थानीय स्तर पर अचानक और जानलेवा घटनाओं का खतरा बना हुआ है. अभी भी लोग पहाड़ों पर जाने से बचे. अन्य तरह की लापरवाह न करें.
मानसून सीजन में उत्तराखंड को कितना नुकसान हुआ है, उसके आंकड़े सभी जिले से एक बार में मंगवाया जाता है. मानसून सीजन खत्म होने के बाद ही पूरा आंकड़ा सामने आएगा. अच्छी बात ये है कि इस बार हम भारी नुकसान को रोकने की प्लानिंग में कामयाब रहे. फिर भी बारिश ने सड़कों का सबसे अधिक नुकसान किया है. जरूरत पड़ने पर इसकी एक रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी. फिलहाल हमारा पूरा फोकस बस यही है की बारिश से और जनहानि न हो.
-मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन मंत्री, उत्तराखंड
पढ़ें---

