बिहार के इस गांव में है 'फरिश्तों की टोली', बस एक कॉल पर जरुरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार है 'खिदमत ग्रुप'
गांव के 100 युवाओं की टीम लोगों की सेवा में लगी है. बीमारी, सड़क दुर्घटना, शादी, पढ़ाई हर क्षेत्र में जरुरतमंदों की होती है मदद

Published : June 5, 2026 at 7:23 AM IST
गयाजी: बिहार में मोक्षनगरी गया से इंसानियत और भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर आई है..यहां फरिश्तों की एक टोली बस एक कॉल पर जरुरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है.जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर बथानी थाना क्षेत्र में स्थित बणडी गांव में कोरोना काल की भयावहता के दौरान शुरू हुए 10 लोगों के इस छोटे से ग्रुप में आज करीब 100 लोग शामिल हैं और उनका ये काफिला बढ़ता जा रहा है.
ग्रुप के पीछे की कहानी दुखद: इस ग्रुप को शुरु करने के पीछे की कहानी काफी दुखद है. ग्रुप के सदस्य मो. अतीक कहते है कि कोरोना काल के दौरान लोगों में इतना डर था कि जरुरतमंदों के घर में दवा पहुंचाने से भी लोग कतराते थे. वहीं परिवार में आर्थिक तंगी से कारण कई शादियां रुकीं तो लगा जैसै कि ऐसा भी क्या पैसा कमाना कि हम जरूरत पड़ने पर अपने परिवार और आस-पास के लोगों की मदद भी ना कर सकें.उसी एहसास के बाद सेवा भाव के साथ महज 10 लोगों के साथ इस ग्रुप की शुरुआत की और नाम रखा- 'खिदमत ग्रुप'
कोरोना काल में हुई शुरूआत: दरअसल गांव के अधिकतर लोग दूसरे राज्यों में रहकर मजदूरी-नौकरी करते थे, लेकिन जब कोरोना काल में उनका रोजगार खत्म हुआ तो वह गांव लौट आए और यहीं रहने लगे, तभी गांव और आस पास की भयावह स्थिति को देखते हुए ये युवा लोगों की सहायता के लिए आगे बढ़े. यही से शुरू हुआ सफर अब तक जारी है. खिदमत ग्रुप के सदस्य इस दायरे को और बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
24 घंटे लोगों की मदद: बणडी गांव की आबादी करीब 1000 से ज्यादा है. साल 2020-21 में इस गांव में कोरोना से कई लोगों की मौत हुई थी. इन युवाओं ने तभी एक टीम बनाई, जिसमें शुरूआत में 10 लोग थे बाद में यह संख्या बढ़ते हुए 20-25 हुई और आज टीम में 100 लोग है. गांव के किसी घर में शादी हो, सड़क हादसे में कोई घायल हो जाए, किसी को खून की जरूरत हो या कोई भी सामाजिक कार्य हो, यह टीम 24 घंटे फरिश्ता बनकर लोगों की मदद करती है.

अब तक 1000 से अधिक लोगों की मदद: सीमित संसाधनों में मानवता की सेवा के लिए इन युवाओं का जज्बा और जोश हाई है, ग्रुप की ओर से शिक्षा, ब्लड-डोनेशन, स्वास्थ्य के साथ ही गरीब असहाय परिवार की बच्चियों की शादी कराने से लेकर दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सही समय पर इलाज उपलब्ध कराने तक की व्यवस्था की जाती है. खिदमत ग्रुप ने अब तक 1000 से अधिक लोगों की सहायता की है. दिलचस्प बात ये है कि इस ग्रुप का पूरा खर्च सदस्य खुद ही उठाते हैं.
हर महीने 500 रुपए का योगदान: खर्च मैनेज करने के लिए ग्रुप के सभी सदस्य हर महीने 500 रुपए जमा करते हैं. टीम में 18 साल से लेकर 38 साल तक के युवा हैं इन में सरकारी नौकरी, व्यवसाय और प्राईवेट नौकरी करने वाले युवाओं के साथ छात्र भी शामिल हैं, जो बेरोजगार हैं. लेकिन वो भी अपनी सहूलियत और आमदनी के अनुसार टीम के फंड में पैसे जमा करते हैं. गांव के बूढ़े-बुजुर्ग कहते हैं कि युवाओं का यह बड़ा सामाजिक कार्य है, इस तरह से मानवता की रक्षा और उनकी सहायता करना काबिल-ए-तारीफ है.

ग्रुप में शामिल युवा करते हैं योगदान: खिदमत ग्रुप के एक सदस्य कहते हैं कि उनका समूह किसी संस्था या बाहरी लोगों की सहायता से नहीं चलता है, बल्कि ग्रुप में शामिल गांव के युवा ही हर महीने पैसे जमा करते हैं. उनका कहना है कि हमारे समूह के सक्रिय सदस्यों ने ये कसम खाई थी कि वे खैनी, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, पान आदि का सेवन नहीं करेंगे बल्कि उसी पैसे को जमा करके लोगों की मदद करेंगे. आज हमारी टीम में लगभग सभी सक्रिय सदस्य ऐसे हैं जिन्होंने पिछले दो सालों से इन नशीले पदार्थों का सेवन नहीं किया है.
सदस्यों की नशे की लत छूटी: इस पहल का एक सुंदर पहलू ये भी है कि ग्रुप के वैसे सदस्य जिन्हें खैनी, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट की लत थी लेकिन ग्रुप में शामिल होने के बाद पैसे जमा करने के इस प्रण को लेकर उन सदस्यों की लत छूट गई है. ऐसे में अगर कहा जाए कि हमारी टीम ना सिर्फ सेवा करती है बल्कि खुद बुरी आदतों को भी छुड़ा देती है, तो यह गलत नहीं होगा. इस तरह से खिदमत ग्रुप न सिर्फ जरुरतमंदों की बल्कि खुद के सदस्यों की जिंदगी बेहतर करने की दिशा में भी काम करता है.
"हमारा इलाका पिछड़ा है यहां लोग मजदूरी और निजी नौकरी पर ही निर्भर हैं, इन युवाओं का काम प्रेरणादायक है अगर युवाओं में सेवा भाव आ जाए तो कभी कोई जरूरत के लिए भटकेगा नहीं, विकसित राष्ट्र के निर्माण में युवाओं का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहता है, इन युवाओं में देश भक्ति का भी जज्बा भरा हुआ है, 15 अगस्त और 26 जनवरी को इनके द्वारा मिठाई बांटी जाती है."- मो कैस, स्थानीय ग्रामीण
पहले घटना का सत्यापन: हर तरह की मदद के लिए खिदमत ग्रुप पहले घटना का सत्यापन करता है. टीम के सदस्य मो. बाबर पूरी प्रक्रिया समझाते हुए कहते हैं कि जब कहीं से किसी घटना की सूचना मिलती है तो टीम के 5 सदस्य वहां जाते हैं और पूरे मामले की छानबीन करते हैं. वहीं घटना सत्यापित होने पर आवश्यकता अनुसार उनकी सहायता की जाती है वह नगद पैसे और सामान दोनों के रूप में भी होती है. वे कहते हैं कि जब हम लोगों की सहायता करते हैं या घायलों को अस्पताल पहुंचाते हैं तो उनके परिवार के लोग खूब दुआएं देते हैं, इससे हमारे दिल को भी सुकून मिलता है.
"हम मानवता की सेवा में लगे हैं, इससे आपसी भाईचारा और कई तरह की आपसी नफरत भी खत्म होगी. जरुरतमंदों की मदद करने पर उनके परिवार वाले हमें दुआएं देते हैं हमें खुशी होती है और सुकून भी मिलता है."- मो. बाबर, खिदमत ग्रुप के सदस्य
शादी और बीमारों की मदद पर फोकस: खिदमत ग्रुप के सक्रिय सदस्य मो. अतीक बताते हैं कि टीम का सब से अधिक फोकस शादी और गंभीर रूप से बीमार व घायलों की सहायता करने पर होता है. हमने पिछले दो सालों में 10 गरीब लड़कियों की शादी में आर्थिक सहायता की है जबकि गंभीर बीमारियों से प्रभावित 100 से अधिक मरीजों को अस्पताल ले जाकर इलाज कराया है. वहीं सामान्य बीमारियों के मरीजों की संख्या तो अधिक है जिन्हें टीम मेंबर्स ने अस्पताल पहुंचा कर चिकित्सा प्रदान कराई है. सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्तियों को भी टीम के सदस्यों द्वारा अस्पताल पहुंचाया जाता है.
"आज हमें खुशी होती है कि कई टूटे बिखरे घरों की हम लोग सहायता कर चुके हैं और कर भी रहे हैं, जिससे उन्हें तत्काल राहत भी पहुंचता है, हम लोग किसी से कोई राशी नहीं लेते बल्कि अपनी कमाई का एक हिस्सा इस काम के लिए निर्धारित कर चुके हैं, जिससे लोगों की मदद की जाती है, अभी और बड़े पैमाने पर सेवा करने का लक्ष्य है." - मो. अतीक, खिदमत ग्रुप के सदस्य
जात-पात,धर्म से ऊपर उठकर मदद: अतीक आगे बताते हैं कि हमारा ग्रुप धर्म की बंदिशों और जात-पात की बेड़ियों से ऊपर उठकर सभी जरुरतमंद लोगों की मदद करता है. हमारे क्षेत्र में अक्सर सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं, सूचना मिलने पर हम तत्काल ही घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाते हैं, जिन्हें पैसों की आवश्यकता होती है उनके इलाज के लिए हम पैसे भी देते हैं. उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोगों को वे ऑनलाइन ही पैसे ट्रांसफर करते हैं क्योंकि सदस्यों में से कोई अगर पैसे देकर मदद करना चाहते हैं तो वह खुद ही सीधे तौर पर खाते में डालकर सहयोग करते हैं.
"अब हम लोगों से सहायता लेने के लिए आस पड़ोस ही नहीं बल्कि दूसरे जिले के लोग भी कॉल करते हैं. हम लोग वहां जाकर पूरे मामले की जांच करते हैं और आवश्यकता अनुसार उनकी मदद करते हैं, हाल ही में अलीगढ़ में गया के छात्र के इलाज में भी हमने सहायता की है." मो अतीक, खिदमत ग्रुप के सदस्य

हर जरूरतमंद की मदद: मोहम्मद सैफुल्लाह बताते हैं कि वह भी इस टीम के सक्रिय सदस्य हैं, जब भी किसी व्यक्ति को जरूरत होती है तो हमारे युवा साथी उनकी मदद करते हैं, मदद करने में जात धर्म नहीं देखा जाता बल्कि हर जरूरतमंदों की मदद की जाती है, राशन से लेकर इलाज, शिक्षा तक में सहयोग किया जाता है, भले ही हम लोगों के पास बड़ा फंड नहीं है लेकिन हम युवा मदद करने में पीछे कभी नहीं हटेंगे. हम जिला मुख्यालय में जाकर ब्लड डोनेट भी करते हैं.
घायलों को तत्काल मदद की कोशिश:पहुंचाया सैफुल्लाह बताते हैं कि प्रखंड में सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाता है. अगर कोई व्यक्ति आस पास का नहीं है तो उसके साथ हमारी टीम के युवा अस्पताल तक जाते हैं जब तक के उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचे. आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं. अब तक 50 से अधिक गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जिस में कई की जान भी बची है. सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए मुख्य सड़क पर बसे सभी गांव में 5-5 एक्टिव सदस्य शामिल किए गए हैं जो सिर्फ इसी काम यानी घायलों की मदद करते हैं.
फरिश्तों की टोली: यकीनन खिदमत ग्रुप के ये सभी सदस्य किसी फरिश्ते से कम नहीं है.धर्म की बंदिशों और जात-पात की बेड़ियों से ऊपर उठकर, आर्थिक दायरों को लांघ कर हर मुश्किल परिस्थितियों में सभी जरुरतमंदों को मदद करने का इनका जज्बा काबिल-ए-तारीफ है.
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