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नेपाल त्रासदीः 'बौद्ध मंदिर में बिताए 30 मिनटों ने बचाई जान', केरल के पर्यटकों ने सुनाई खौफनाक दास्तान

नेपाल आपदा से सुरक्षित घर लौटने के बाद केरल के अनिल नीलांबरी और राजन ने 'ईटीवी भारत' के साथ खौफनाक अनुभव साझा किया.

kerala tourists narrow escape
नेपाल से सुरक्षित लौटे पर्यटक. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 30, 2026 at 4:34 PM IST

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Updated : August 30, 2026 at 10:26 PM IST

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कासरगोड (केरल): "सच कहें तो, उन 30 मिनटों ने हमारी जान बचाई. काठमांडू के बेहद करीब एक बौद्ध मंदिर था. हालांकि यह हमारे टूर प्लान में शामिल नहीं था, फिर भी ड्राइवर ने हमें वहां जाने की सलाह दी. जब हम अंदर गए, तो वहां का माहौल इतना शांतिपूर्ण था कि हमने वहां करीब 25 से 30 मिनट बिता दिए. बाद में हमें अहसास हुआ कि वे 30 मिनट हमारी जिंदगी के लिए कितने कीमती थे."

नेपाल आपदा से सुरक्षित घर लौटने के बाद केरल के कासरगोड के अनिल नीलांबरी और राजन ने ईटीवी भारत के साथ अपना खौफनाक अनुभव साझा करते हुए यह बातें कहीं. नेपाल त्रासदी में बाल-बाल बचे केरल के 36 सदस्यों के समूह में शामिल कासरगोड के पांच निवासी आखिरकार अपने गृहनगर पहुंच गए हैं. वे शनिवार की शाम गोरखपुर हवाई अड्डे से विमान में सवार हुए, वहां से बेंगलुरु पहुंचे और फिर ट्रेन के जरिए कासरगोड आए.

अनिल और राजन ने बताया कि जो गाड़ियां उनसे आगे निकल गई थीं, उनके बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने इसे एक कभी न भूलने वाली यात्रा बताते हुए कहा कि जब नदी का जलस्तर बढ़ने लगा, तब स्थानीय लोगों ने उन्हें इसे सामान्य बात बताया था, लेकिन कुछ ही सेकंड के भीतर स्थिति भयानक हो गई. उनकी आंखों के सामने गाड़ियां और इमारतों का मलबा बह रहा था. उन्होंने आगे बताया कि बाद में जब उन्होंने वीडियो देखे, तब जाकर उन्हें इस बात का अंदाज़ा हुआ कि बाढ़ कितनी बड़े पैमाने पर आई थी.

अनिल ने अपनी बात पूरी करते हुए बताया कि नदी के किनारे से वापस आते समय उनका रास्ता घने और अंधेरे जंगलों से होकर गुजरा था. उन्होंने कहा कि उस घोर अंधेरे में उनकी गाड़ी बहुत ज़्यादा गर्म होकर वहीं रुक गई थी. जंगली जानवरों के हमले के खतरे के कारण उन्हें गाड़ी से बाहर कदम न रखने की सख्त हिदायत दी गई थी. उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था और बस कुछ ही सेब बचे थे, लेकिन चूंकि ज़िंदगी भोजन से कहीं ज़्यादा कीमती थी, इसलिए किसी को भूख का ख्याल तक नहीं आया. रात के समय उस घने जंगल से रास्ता बनाते हुए, आखिरकार वे एक सुरक्षित जगह पर पहुंचे.

अनिल ने आगे बताया कि उन्हें चैन की सांस तब आई, जब वे भारतीय सीमा (बॉर्डर) पर पहुंच गए और अपने परिवारों के साथ लगातार संपर्क में रहने से उन्हें बहुत तसल्ली मिली. उन्होंने राहत जताते हुए कहा कि जो भी हो, वे मौत के मुंह से वापस लौट आए हैं और यह एक बहुत बड़ी बात है.

36 सदस्यों का यह समूह हवाई मार्ग से दो अलग-अलग जत्थों में घर लौटा. कासरगोड का समूह बेंगलुरु में उतरा और वहां से ट्रेन पकड़ी, वहीं बाकी सदस्य रविवार सुबह तड़के नेदुम्बस्सेरी (कोचीन) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे. कासरगोड की टीम में राजन, शिक्षक अनिल नीलांबरी, रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार, सेवानिवृत्त केएसईबी अधिकारी करुणाकरन और मुझाक्कम के राजीवन शामिल थे.

36 लोगों का यह समूह एर्नाकुलम की एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से 23 सितंबर को नेपाल के लिए रवाना हुआ था. विभिन्न स्थानों का दौरा करने के बाद, वे 25 सितंबर को काठमांडू पहुंचे और वहीं रुके. जब यह टीम काठमांडू से पोखरा की यात्रा कर रही थी, तभी अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गई.

44 सदस्यों का एक और समूह सोमवार को कोझिकोड लौटेगा

इस बीच, 44 सदस्यों का एक और पर्यटक समूह सोमवार, 31 अगस्त को कोझिकोड लौटने वाला है. नोर्का (NORKA - गैर-निवासी केरलवासी मामलों के विभाग) ने बताया है कि सात केरलवासी अभी भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है. बाढ़ में लापता हुए पोन्नानी के एक परिवार के रिश्तेदार उनकी तलाश के लिए पहले ही नेपाल पहुंच चुके हैं.

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Last Updated : August 30, 2026 at 10:26 PM IST