केरल में फुटबॉल खेलते-खेलते संस्कृत सीख रहे हैं बच्चे, 'मन की बात' में पीएम मोदी ने की तारीफ
केरल में सरकारी स्कूल के शिक्षक ने खेल और पढ़ाई का ऐसा अनूठा संगम तैयार किया है कि बच्चे फुटबॉल खेलते-खेलते संस्कृत सीख रहे हैं.


Published : July 26, 2026 at 8:52 PM IST
कोच्चि (केरल): क्या खेल के मैदान के रोमांच और क्लासरूम की पढ़ाई को एक साथ जोड़ा जा सकता है? एर्नाकुलम जिले के साउथ चित्तूर के एक स्कूल, उसके संस्कृत क्लब और इस पहल का नेतृत्व करने वाले शिक्षक अभिलाष सर ने साबित कर दिया है कि यह बिल्कुल संभव है. खेल को संस्कृत से जोड़ने वाले उनके अभिनव प्रयोग 'अक्षरकंदुकम' ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल जीत लिया है.
रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में, प्रधानमंत्री मोदी ने इस शिक्षण मॉडल और केरल के इस स्कूल की पूरे देश के सामने सराहना की और इसका परिचय कराया. प्रधानमंत्री ने तारीफ करते हुए कहा, "एर्नाकुलम के साउथ चित्तूर के एक स्कूल में छात्रों के बीच संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक संस्कृत क्लब की स्थापना की गई थी. अभिलाष नाम के एक शिक्षक के नेतृत्व में, वे 'अक्षरकंदुकम' नामक एक अभिनव प्रयोग के माध्यम से संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बना रहे हैं."
शिक्षक अभिलाष ने साझा की अपनी खुशी
ईटीवी भारत से बात करते हुए संस्कृत शिक्षक अभिलाष ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके इस प्रोजेक्ट की तारीफ करेंगे.
उन्होंने ईटीवी भारत को बताया, "इस राष्ट्रीय पहचान से मैं बेहद खुश हूं. राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला सम्मान ऐसी पहलों को और अधिक ऊर्जा देता है. मैं 2015 से इस स्कूल में सेवा दे रहा हूं। यहां के सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों के लिए संस्कृत सीखना काफी कठिन है. इसीलिए मैंने फुटबॉल को चुना, जिसे बच्चे बहुत पसंद करते हैं, और मैं इस आइडिया तक पहुंचा. मैं कक्षा 1 से 7 तक के छात्रों को पढ़ाता हूं. इस आयु वर्ग के बच्चे खेल को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, खासकर फुटबॉल को. इस तरह, मैंने फीफा विश्व कप को इस विचार की शुरुआत के रूप में देखा."
क्या है 'अक्षरकंदुकम' प्रोजेक्ट?
'अक्षरकंदुकम' फुटबॉल के रोमांच को संस्कृत सीखने के साथ जोड़कर स्कूली बच्चों के लिए तैयार किया गया प्रोजेक्ट है. इसकी शुरुआत एर्नाकुलम के साउथ चित्तूर में स्थित सेंट मैरी यूपी स्कूल के संस्कृत क्लब के नेतृत्व में की गई थी.
अभिलाष ने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य फुटबॉल के प्रति बच्चों के जुनून को संस्कृत भाषा सीखने की दिशा में मोड़ना है. छात्रों को संस्कृत वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर को फुटबॉल की दुनिया से जोड़कर पढ़ाया जाता है. स्कूल के संस्कृत शिक्षक अभिलाष ही इस अनूठे विचार के पीछे के मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) हैं और उन्होंने इसके लिए विशेष शिक्षण सामग्री तैयार की है.
फीफा विश्व कप की पृष्ठभूमि में, फुटबॉल के तकनीकी शब्दों जैसे कि पासिंग, ड्रिब्लिंग, गोल करना और टैकलिंग को संस्कृत के शब्दों और अक्षरों से जोड़ा जाता है. अभिलाष ने बताया कि जब बच्चे उत्साह के साथ मैदान में गेंद को किक मारते हैं, तो वे अनजाने में ही संस्कृत भाषा के अक्षरों और व्याकरण के नियमों को सीख जाते हैं.
सीखने की यह विधि कैसे काम करती है?
संस्कृत व्याकरण और शब्दावली, जिसे बच्चे अक्सर कठिन समझकर दूर भागते हैं, उसे 'अक्षरकंदुकम' के माध्यम से बहुत ही सरल तरीके से प्रस्तुत किया जाता है. संस्कृत के प्रत्येक अक्षर के लिए फुटबॉल के उपयुक्त शब्दों को चुना जाता है.
उदाहरण के लिए, 'न' अक्षर सिखाने के लिए 'नायकः' शब्द का उपयोग किया जाता है, जिसका अर्थ 'कप्तान' (Captain) होता है. 'य' अक्षर के लिए 'यशः' शब्द दिया जाता है, जिसका अर्थ 'प्रसिद्धि या गौरव' (Fame or Glory) होता है. छात्रों को आसानी से समझाने के लिए इन शब्दों के अर्थ मलयालम और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिए गए हैं.
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