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सुकून में खलल : घना में पीक सीजन के दौरान विकास कार्य, दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और गड़गड़ाती जेसीबी

केवलादेव में पीक सीजन, लेकिन परिंदों और पर्यटकों के सुकून में खलल. मशीनों के शोर से बाधित हो रहा शांत वातावरण. जानि पूरा माला...

Keoladeo National Park
घना में परिंदों और पर्यटकों के सुकून में खलल (ETV Bharat Bharatpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 2, 2026 at 5:15 PM IST

3 Min Read
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भरतपुर: दिसंबर–जनवरी के पीक पर्यटन सीजन में जब केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान देशी-विदेशी पक्षियों की चहचहाहट और पर्यटकों की शांत आवाजाही से गुलजार है, उसी वक्त भारी मशीनों का शोर इस साइलेंस जोन की फिजा को चीरता नजर आ रहा है. उद्यान परिसर और उसके आसपास चल रहे विकास कार्य, निर्माण सामग्री से भरी दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और गड़गड़ाती जेसीबी न सिर्फ पक्षियों के शांत वातावरण को बाधित कर रही हैं, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा और सुकून दोनों पर सवाल खड़े कर रही हैं.

घना को दुनिया पक्षियों के स्वर्ग के रूप में जानती है. हर साल सर्दियों में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी यहां आते हैं. इसी अवधि में कई प्रजातियों का ब्रीडिंग (प्रजनन) सीजन भी होता है. यह समय सबसे संवेदनशील होता है, जब शोर, कंपन और मानवीय हस्तक्षेप से पक्षियों की नेस्टिंग, फीडिंग और मूवमेंट सीधे प्रभावित होती है.

पर्यावरणविद डॉ. केपी सिंह का कहना है कि पीक टूरिस्ट सीजन में घना प्रशासन को विकास कार्य करने से बचना चाहिए. इस समय पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होती है. वहीं, हजारों देशी-विदेशी पक्षी प्रवास और ब्रीडिंग के लिए यहां आते हैं. घना साइलेंस ज़ोन है. ऐसे में जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों की आवाजाही से पक्षियों को गंभीर डिस्टर्बेंस होता है. उद्यान प्रशासन को इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से सोचना चाहिए.

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साइलेंस जोन में शोर, संरक्षण पर खतरा : डॉ. केपी सिंह का कहना है कि लगातार शोर और गतिविधि से पक्षी ऐसे इलाकों से दूरी बनाने लगते हैं. इसका असर सिर्फ मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय में जैव विविधता पर भी पड़ता है. घना जैसे संरक्षित क्षेत्र में विकास कार्यों का समय और तरीका दोनों बेहद अहम हैं.

एक साल पहले हो चुकी है जानलेवा चूक : पीक सीजन में रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक साइकिल और ई-रिक्शा से उद्यान का भ्रमण करते हैं. इसी बीच भारी वाहनों की आवाजाही दुर्घटनाओं का खतरा रहता है. एक साल पहले 31 दिसंबर 2024 को पीक पर्यटन सीजन के दौरान ही ई-रिक्शा चालक साजन सिंह (74) की मौत हो गई थी. सड़क निर्माण के लिए सामग्री लेकर जा रहे एक ट्रक से बचने की कोशिश में ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गया. हादसे के वक्त ई-रिक्शा में चार पर्यटक भी सवार थे. हालांकि, पर्यटकों को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना प्रशासन के लिए बड़ा चेतावनी संकेत थी, जिससे सबक लेते नहीं दिख रहा.

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घना के कोला डहर क्षेत्र में इन दिनों जेसीबी मशीनों से विकास कार्य कराए जा रहे हैं. यह इलाका उद्यान का महत्वपूर्ण ग्रासलैंड क्षेत्र है, जहां कई प्रजातियों के पक्षी नेस्टिंग (घोंसला निर्माण) करते हैं. ऐसे में ब्रीडिंग सीजन के दौरान इस क्षेत्र में भारी मशीनों की मौजूदगी पक्षियों को डिस्टर्ब कर सकती है.

निदेशक चेतन कुमार बीवी का कहना है कि हमें उद्यान के विकास कार्य फरवरी माह तक पूरे करने होते हैं. हम पक्षियों को कम से कम डिस्टर्ब हो इसका ध्यान रखते हैं. साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है.