भारत-फ्रांस मिलकर जिस H 125 हेलीकॉप्टर को बनाएंगे, क्या वह होगा गेम चेंजर?
माउंट एवरेस्ट पर लैंडिंग-टेकऑफ का रिकॉर्ड, एक बार में 630 किमी तक उड़ेगा, खराब मौसम भी नहीं रोक पाएगा रास्ता.

Published : February 18, 2026 at 3:34 PM IST
हैदराबाद : किसी भी देश की सेना की ताकत बढ़ाने में शक्तिशाली हेलीकॉप्टरों का अहम रोल होता है. युद्ध के दौरान ये सैनिकों को ले जाने, विस्फोटक सामग्री पहुंचाने, दुश्मनों पर बम बरसाने का काम करते हैं. भारतीय सेना के पास भी कई घातक हेलीकॉप्टर हैं, लेकिन अब इनमें नया नाम जुड़ने जा रहा है.
कई देशों की सेनाओं की शान H 125 हेलीकॉप्टर अब अपने देश में भी बनेगा. भारत-फ्रांस इसे मिलकर बनाएंगे. यह दुनिया का पहला हेलीकॉप्टर है जो माउंट एवरेस्ट पर लैंडिंग कर सकता है, और वहां से उड़ान भी भर सकता है. खराब मौसम का भी इस पर असर नहीं पड़ता है. उम्मीद है कि यह साल 2027 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएगा.
कर्नाटक के वेमागल में इसका निर्माण होगा. पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को H 125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) का वर्चुअली शुभारंभ किया. इस हेलीकॉप्टर की खासियत क्या है, दुनिया के अन्य कौन-कौन से देशों के पास पहले से इस तरह के हेलीकॉप्टर हैं?. पढ़िए खास रिपोर्ट...
क्या है H 125 हेलीकॉप्टर : H 125 हेलीकॉप्टर एयरबस के मजबूत और भरोसेमंद एक्यूरेइल (Ecureuil family) परिवार का सदस्य है. एक्यूरेइल के 7200 से ज्यादा हेलीकॉप्टर 137 देशों में 2600 से ज्यादा ऑपरेटरों को डिलीवर किए गए हैं. इनमें AS350, AS355, AS550, AS555, H125, H125M, EC130, H130 शामिल हैं. इन हेलीकॉप्टरों ने 4 करोड़ से ज्यादा घंटे की उड़ान भी पूरी कर ली है. पहला मेड इन इंडिया एच 125 हेलीकॉप्टर साल 2027 की शुरुआत से भारतीय सेना को मिलने लगेंगे. यह पूरे साउथ एशिया में एक्सपोर्ट के लिए भी उपलब्ध होगा.
एच 125 के नाम दर्ज हैं कई रिकॉर्ड : H 125 हेलीकॉप्टर विश्व रिकॉर्डधारी हेलीकॉप्टर है. साल 2005 में इसी हेलीकॉप्टर के AS350 B3 ने माउंट एवरेस्ट पर 8848 मीटर (29,029 फीट) की ऊंचाई पर लैंडिंग और टेकऑफ का विश्व रिकॉर्ड बनाया था. इसके बाद मई साल 2013 में AS350 B3 ने हिमालय में 7800 मीटर (25,590 फीट) पर मौजूद दुनिया के चौथे सबसे ऊंचे पहाड़ ल्होत्से पर दुनिया का सबसे ऊंचा लांग लाइन रेस्क्यू किया था. यानी उबड़-खाबड़ जमीन, घने जंगलों या खड़ी पहाड़ियों के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग की थी.
एच 125 हेलीकॉप्टर से क्या होंगे फायदे? : एच 125 भारत सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम UDAN के तहत लॉ एनफोर्समेंट और रीजनल कनेक्टिविटी में भी मदद करेगा. यह टूरिज्म और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए भी काफी उपयोगी साबित होगा. भारतीय सेना के लिए यह कई तरीके से काम आ सकता है. यह दुनिया भर के हेलिपोर्ट, हॉस्पिटल लैंडिंग पैड, पुलिस डिपार्टमेंट, ऑपरेशन सेंटर और एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं दे रहा है, इसे कई तरीके से काम में लाया जा सकता है.
अब 4 प्वाइंट में एच 125 हेलीकॉप्टर की खासियत के बारे में जानेंगे
1-एक बार में कितनी ऊंचाई तक उड़ सकता है?: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एच 125 हेलीकॉप्टर एक बार में 630 किमी तक उड़ सकता है. थोड़ी ऊंचाई तक पहुंचते ही आम हेलीकॉप्टरों को काफी संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने पर भी इसकी क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

2-क्या खराब मौसम में भी उड़ सकता है?: एच 125 हेलीकॉप्टरों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि उन पर खराब मौसम का कम से कम प्रभाव पड़े. यह गर्मी-सर्दी के अलावा लो विजिबिलिटी के दौरान भी उड़ सकता है. इस हेलीकॉप्टर के सैन्य संस्करण को भारतीय सेना के अनुसार तैयार जाएगा. यह काफी कम शोर करता है. इसमें ‘लो थर्मल सिग्नेचर’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इससे यह दुश्मन के रडार में नहीं आता है.
3-कितने लोग बैठ सकते हैं, कितनी होगी स्पीड? : इस हेलीकॉप्टर में पायलट के अलावा 5 से 6 अन्य लोग आराम से बैठ सकते हैं. इसकी अधिकतम स्पीड करीब 252 किमी प्रति घंटा है. एक हेलीकॉप्टर के निर्माण पर लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है. इस हेलीकॉप्टर की हाई-एल्टीट्यूड परफॉर्मेंस काफी बेजोड़ है. यह माउंट एवरेस्ट पर लैंड करने वाला इकलौता हेलीकॉप्टर है. इस हेलीकॉप्टर को रॉकेट, मशीनगन आदि से लैस किया जा सकता है.
4-एच 125 की अन्य अच्छाइयों के बारे में भी जानिए : H 125 अपने टचस्क्रीन ग्लास कॉकपिट इंस्ट्रूमेंट पैनल के साथ पायलटों को बेहतर सुरक्षा देता है. हेलीकॉप्टर में इंजन मल्टीफंक्शन डिस्प्ले (VEMD) लगा रहता है. यह पायलटों को इंजन पैरामीटर्स को मॉनिटर करने में मदद करता है. हेलीकॉप्टर का वायरलेस कनेक्शन हर उड़ान के आखिर में ऑटोमैटिकली उड़ान डेटा ट्रांसफर कर देता है. इस हेलीकॉप्टर की केबिन बड़ी होती है. इससे हर पैसेंजर आराम से बैठ सकता है. पैर के लिए काफी जगह मिल जाती है. इससे पैसेंजर हवा में अपने सफर का पूरा लुत्फ उठा सकते हैं.
दुनिया में किन देशों के पास है H 125?: एच 125 हेलीकॉप्टर मौजूदा समय फ्रांस, ब्राजील, अमेरिका समेत कई अन्य देशों के पास है. इससे वहां कई तरह के काम लिए जाते हैं. वहां की पुलिस भी इनका उपयोग करती है. वहीं इस हेलीकॉप्टर के रख-रखाव की लागत काफी कम है. इसकी वजह से लंबे समय तक चलने वाले युद्ध समेत आदि ऑपरेशनों के दौरान ये काफी किफायती साबित होता है. इसका उपयोग दुर्गम इलाकों में इमरजेंसी के दौरान मेडिकल सुविधाओं को पहुंचाने में भी किया जा सकता है.

प्रोजेक्ट में कितने करोड़ का होगा निवेश?: रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो पर जारी प्रेस रिलीज के अनुसार इस प्रोजेक्ट में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होने के अनुमान है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी एच 125 हेलीकॉप्टरों की तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि यह विश्व स्तर पर सबसे प्रभावी और भरोसेमंद सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टरों में से एक है. इसका असाधारण प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण निर्णायक बढ़त प्रदान कर सकता है.
भारत के पास पहले से कौन-कौन से शक्तिशाली हेलीकॉप्टर?: भारत के पास पहले से ही शक्तिशाली हेलीकॉप्टरों का बेड़ा है. इनमें अपाचे (AH-64), प्रचंड (LCH), रुद्र (ALH-WSI), एमआई-17, CH-47 चिनूक, MIL MI-24 आदि शामिल हैं. कुछ समय पहले ही अमेरिका से भारतीय सेना को अपाचे हेलीकॉप्टरों की अंतिम बैच भी मिली है. इनमें मदद पहुंचाने के साथ ही दुश्मनों के छक्के छुड़ाने की भी काबलियत है. वहीं अब आगामी समय में एच 125 भी सेना की ताकत बढ़ाएगा. फ्रांस की कंपनी एयरबस और भारत की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स इसे बनाएंगे. अब इनमें से कुछ खास हेलीकॉप्टरों के बारे में जानेंगे..
बोइंग AH-64 अपाचे : AH-64 अपाचे क्लासिक अमेरिकन अटैक हेलीकॉप्टर है. इसे साल 1981 में बनाया गया था. इस हेलीकॉप्टर ने US मिलिट्री की सभी ब्रांच को दुश्मन लड़ाकों से निपटने के लिए एक पावरफुल प्लेटफॉर्म दिया. स्टैंडर्ड अपाचे में मेन लैंडिंग गियर के पास 30 mm M230 चेन गन लगी होती है. चॉपर के चार हार्डपॉइंट में AGM-114 हेलफायर या हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स जैसी हवा से हवा या सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें होती हैं.
AH-64 में अटैक मिशन के दौरान इसकी रेंज बढ़ाने के लिए एक बाहरी 230-गैलन फ्यूल टैंक लगाया जा सकता है. इसमें 2 लोगों का स्टैंडर्ड क्रू होता है. इसकी कीमत 3.1 करोड़ है. अपाचे में इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम (IHADSS) भी लगा होता है. इससे पायलटों को सिर्फ अपने सिर की हरकतों को बदलकर लैंडिंग और ऑनबोर्ड हथियारों को टारगेट करने में मदद मिलती है.

CH-47 चिनूक : CH-47 चिनूक 2 इंजन वाला एक ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर है. यह सबसे शक्तिशाली पश्चिमी हेलीकॉप्टरों में से एक है. यह कुल 10,886 किलो वजन अपने साथ ले जा सकता है. इसके अलावा यह 35 सैनिकों को भी ले जा सकता है. भारतीय सेना के पास आधिकारिक तौर पर 15 चिनूक CH-47 हेलीकॉप्टर हैं. ये अलग-अलग तरीके से अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
HAL LCH प्रचंड : यह भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है. इसे खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड ऑप्स, स्टेल्थ फीचर्स, स्वदेशी एवियोनिक्स के लिए डिजाइन किया गया है. यह पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त है. इसकी स्पेशल यूनिट की कीमत 4.55 करोड़ है.
MIL MI-24 हेलीकॉप्टर : Mil Mi-24 भी एक भारतीय अटैक हेलीकॉप्टर है. इसमें 8 लोग बैठ सकते हैं. भारत के अलावा दुनिया के कई अन्य देश भी इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं. यह 1972 से रूस समेत 49 देशों में चल रहा है. भारतीय सेना अभी 15 Mil Mi-24 हेलीकॉप्टर चलाती है. इसमें ईंधन क्षमता 2100 लीटर है.
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