दुर्लभ सिक्कों-डाक टिकटों का विशाल 'खजाना': प्रदर्शनी लगाकर देते इतिहास की जानकारी
प्रशांत को 15 साल की उम्र में सिक्के इकट्ठा करने का शौक शुरू हुआ 22 साल की उम्र में यह नया जुनून बन गया.

Published : November 25, 2025 at 3:38 PM IST
|Updated : November 25, 2025 at 10:35 PM IST
मंगलुरु (कर्नाटक): मंगलुरु निवासी एम प्रशांत शेट देश में सिक्कों और डाक टिकटों के संग्रह के क्षेत्र में बड़ा नाम हैं. उनके पास भारत और विदेशों से हजारों दुर्लभ सिक्के और डाक टिकट हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. रिश्तेदारों द्वारा विदेश से लाए गए सिक्कों से शुरू करके अब उनके पास भारत और विदेशों के सिक्कों और डाक टिकटों का विशाल संग्रह है.
विदेश यात्रा से मिली नई प्रेरणाः
प्रशांत को पांच साल की उम्र से ही सिक्का इकट्ठा करने का शौक शुरू हुआ. 15 साल की उम्र में सिंगापुर और हांगकांग की यात्रा के दौरान प्रशांत शेट को सिक्का संग्रह का परिचय मिला. 22 साल की उम्र में यह शौक और मजबूत हुआ, जिससे उन्होंने दुर्लभ सिक्के इकट्ठा करने शुरू कर दिए.

गंगा राजवंश के सिक्के:
एम प्रशांत के संग्रह का राष्ट्रीय और शैक्षिक महत्व बहुत बड़ा है. उनके पास गंगा राजवंश के 310 प्रकार के सिक्के हैं. यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी संग्रह है, जो सालार जंग म्यूजियम के 39 प्रकारों से भी ज्यादा है. इसके अलावा, हनगल और गोवा कदंबा के 65 सिक्कों का संयुक्त सेट भी किसी निजी संग्राहक के पास सबसे बड़ा है.
फिलैंथ्रोपिस्ट प्रदर्शनी में विविध संग्रह:
वे फिलैंथ्रोपिस्ट नाम की प्रदर्शनी चलाते हैं, जिसमें फिल्मों से जुड़े डाक टिकट, सौर मंडल, पोप जॉन पॉल द्वितीय और क्वीन एलिजाबेथ जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों, 3डी शीट्स, राशि चिन्ह, ओलंपिक थीम और भूटान-थाईलैंड जैसे देशों के डाक टिकट शामिल हैं. प्रदर्शनी में प्रकृति थीम और कबूतरों से जुड़े डाक टिकट भी हैं.

इतिहास सिखाते सिक्के और डाक टिकट:
डाक टिकटों के साथ-साथ वे गंगा राजवंश, रॉयल आर्म्स, यूनाइटेड किंगडम के रॉयल पैलेस और गुरु नानक देव (नेपाल) के सिक्के प्रदर्शित करते हैं, जो इतिहास के बारे में शिक्षित करते हैं. 2018 से अब तक उन्होंने स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 25 से ज्यादा प्रदर्शनियों में भाग लिया या आयोजित किया है. अपनी उत्कृष्ट प्रदर्शनियों के लिए उन्होंने 112 से ज्यादा मेडल जीते हैं.
दुनिया का पहला डाक टिकट और दुर्लभ वस्तुएंः
प्रदर्शनी में 1840 में जारी दुनिया का पहला डाक टिकट, 60 से ज्यादा प्रकार के कबूतर डाक टिकट और वेटिकन सिटी की गोल्डन सीरीज के 100 से ज्यादा कार्ड प्रदर्शित हैं. उनके संग्रह में काकतीय यूनिफेस, गंगा फ्यूडेटरी, प्राचीन जापानी सिक्का, चाकू आकार का सिक्का, भारतीय सिक्का, चांदी की ठोस शीट पर डाक टिकट, चॉकलेट, आईडी कार्ड और सुपरहीरोज जैसे विभिन्न कॉन्सेप्ट वाले दुर्लभ डाक टिकट शामिल हैं.

इस बारे में बात करते हुए प्रशांत ने कहा, "मैंने छोटी उम्र से ही संग्रह शुरू किया. लेकिन गंभीरता से इकट्ठा करना 25 साल से कर रहा हूं. मैंने इसे विभिन्न प्रकारों में बांटा है जैसे पोस्टकार्ड, एरोग्राम, मिनिएचर पोस्ट आदि. पुराने सिक्कों के संग्रह में गंगा काल के 310 सिक्के हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी संग्रह है. कदंबा काल के 45 छोटे सिक्के हैं. मैंने कॉमिक्स, कार्टून, सेलिब्रिटी आदि के 53 प्रकार इकट्ठा किए हैं."
क्या कहते हैं विशेषज्ञः
कर्नाटक न्यूमिस्मैटिक सोसाइटी के अध्यक्ष राजेंद्र ने कहा, "1966 से मैंने हजारों सिक्का संग्रह और म्यूजियम देखे हैं. प्रशांत का संग्रह अद्भुत है. यह 70 से ज्यादा देशों में देखे गए सिक्का संग्रहों में सबसे कमाल का है."

इसे भी पढ़ेंः
- मध्यप्रदेश राज्य संग्रहालय में पहली बार 33,000 प्राचीन सिक्कों का 3डी डॉक्यूमेंटेशन शुरू होगा
- तमिलनाडु के शिवगंगा में वेनाडु चेरा राजाओं के काल का 400 साल पुराना सिक्का मिला!
- पंजाब के बठिंडा के शख्स का अनोखा शौक, 125 देशों की पुरानी करंसी की इकट्ठा
- कोलकाता में अनोखा 'हॉबी गैलरी': 200 साल पुराने लैंप का संग्रह, रनर से लेकर LED तक की कहानी!

