भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच होगी, CM सम्राट चौधरी ने दिया निर्देश
जिस प्रकार से भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला तूल पकड़ रहा था, सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. आगे पढ़ें पूरी खबर.

Published : June 20, 2026 at 4:36 PM IST
भोजपुर : बिहार के भोजपुर में हुए एनकाउंटर का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. सरकार के लोगों ने ही पुलिस के इस एनकाउंटर पर सवालिया निशान लगा दिया था. ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा फैसला लिया है. न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अब न्यायिक जांच का रास्ता चुना है.
''भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है. न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है.''- सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) June 20, 2026
'किसी को भी कानून हाथ में लेने की छूट नहीं' : बिहार के उच्च शिक्षा सह विधि विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर ने भरत भूषण हत्याकांड पर कहा कि ''कई बार जो बातें चर्चा में आती हैं, सच कुछ और होता है. सरकार की नजर हर विषय पर है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की छूट नहीं मिलेगी.''

'खून का एक भी कतरा बेकार नहीं जाएगा' : इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भरत तिवारी हत्याकांड को लेकर बड़ा बयान दिया. मुजफ्फरपुर में उन्होंने कहा कि भरत तिवारी एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो समाज और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते थे. उनका खून व्यर्थ नहीं जाएगा.

''यह बिहार सरकार की जिम्मेदारी है कि दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करे. सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार लोगों को निलंबित किया है, लेकिन असली हत्यारों को भी चिन्हित कर सख्त सजा दी जाएगी. सरकार किसी को नहीं छोड़ेगी.''- अश्विनी कुमार चौबे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री
अश्विनी कुमार चौबे ने आगे कहा कि भरत तिवारी ने गरीबों के लिए संघर्ष किया. उनकी हत्या किसी षड्यंत्र के तहत हुई है. हम इस खून को बेकार नहीं जाने देंगे. दोषियों का हथियार छीनकर उन्हें जेल भेजा जाएगा. पुलिसिया जुर्म को बढ़ने नहीं देंगे. मेरी जान जा सकती है, लेकिन मैं लोकतंत्र का सिपाही हूं. लोकतंत्र की हत्या नहीं होने दूंगा.
पिता-भाई पर केस : इधर, भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर लोग आक्रोशित हैं. लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. वहीं पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में युवक के पिता, भाई और पंचायत के मुखिया समेत कई लोगों को नामजद करते हुए केस दर्ज किया है.
क्या हुआ था? : दरअसल, इसी बुधवार को भोजपुर में एक युवक का एनकाउंटर किया गया. कहा गया कि वह मानसिक रूप से बीमार था और पुलिस पर पिस्टल तान खड़ा था. हालांकि वीडियो में दिख रहा है कि उसने सरेंडर किया. इसके कुछ देर बाद पता चलता है कि उसको गोली लगी है. आनन-फानन में उसे पटना के अस्पताल में भर्ती किया गया. जहां उसकी मौत हो जाती है. पोस्टमॉर्टम से पता चलता है कि उसे 5 गोली मारी गई थी. इसके बाद परिवार वालों से लेकर स्थानीय लोग हंगामा करने लगते हैं. पक्ष और विपक्ष इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े करते हैं.
लोगों ने उठाए सवाल : घटना के बाद बिलौटी गांव समेत आसपास के इलाकों में लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए. ग्रामीणों और परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए. इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था और विभिन्न दलों के नेताओं ने भी घटना की जांच कराने की मांग उठाई थी. तेजस्वी यादव से लेकर भाजपा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने भी इस घटना पर प्रश्न खड़े किए और सरकार में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी इस मामले पर प्रशासन को कटघरे में खड़े किए थे.
सरकार के इस फैसले को मामले में बढ़ते जनदबाव और पारदर्शी जांच की मांग के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. न्यायिक जांच के दौरान मुठभेड़ की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है. फिलहाल अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की गुत्थी किस तरह सुलझती है.
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