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शेख हसीना को फांसी की सजा देने का फैसला राजनीतिक तमाशा, बोले विशेषज्ञ

भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सुहास चकमा का कहना है कि शेख हसीना पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाना निष्पक्ष सुनवाई के बुनियादी मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है.

Judgement on Sheikh Hasina does not meet basic international standards for fair trial expert
शेख हसीना (AP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 17, 2025 at 6:20 PM IST

3 Min Read
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गौतम देबरॉय

नई दिल्ली: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और एक अन्य को पिछले साल हुए विद्रोह के संबंध में मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है. ढाका के विशेष न्यायाधिकरण के फैसले पर राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (RRAG) ने कहा कि यह फैसला एक राजनीतिक तमाशा है और यह निष्पक्ष सुनवाई के लिए बुनियादी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करता है.

राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप के निदेशक सुहास चकमा ने कहा कि शेख हसीना पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया, जो निष्पक्ष सुनवाई के बुनियादी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन करता है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मामले में भारत के साथ कोई बातचीत नहीं की. अगर बांग्लादेश के पास कोई सबूत होता, तो वह हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता था.

उन्होंने आगे कहा कि कोई भी देश जो कानून के शासन का पालन करता है, उसे निष्पक्ष सुनवाई के मानकों को पूरा करने के लिए अभियुक्तों के प्रत्यर्पण की मांग करनी ही होती है, ठीक उसी तरह जैसे भारत ने पुर्तगाल के सुप्रीम कोर्ट में अबू सलेम के प्रत्यर्पण के लिए लड़ाई लड़ी और वर्तमान में बेल्जियम की अदालतों में मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए लड़ रहा है. चूंकि बांग्लादेश के पास कोई सबूत नहीं है, इसलिए उसने अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना और उनके सहयोगियों को कंगारू कोर्ट में सजा सुनाने का फैसला किया."

राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक है. यह मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के उल्लंघन को रोकने के लिए जोखिम विश्लेषण करता है, विशेष रूप से कानून के शासन और लोकतंत्र के लिए खतरों पर ध्यान केंद्रित करता है. आरआरएजी आसन्न संघर्षों के बारे में पूर्व चेतावनी प्रदान करता है, तथा संघर्षों के प्रसार या निरंतरता में योगदान देने वाले राज्य और गैर-राज्य कर्ताओं की नीतियों और कार्यक्रमों का विश्लेषण करता है.

चकमा ने कहा, "अन्य घटनाओं के अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री हसीना पर रंगपुर में बेगम रुकैया विश्वविद्यालय के पास अबू सईद की हत्या, ढाका के चंखरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या और पिछले साल अशुलिया में छह छात्रों की हत्या का आरोप लगाया गया था. इन अपराधों के असली अपराधियों का नाम आरोपपत्र में दर्ज किए बिना तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना पर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं? पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून इन अपराधों के लिए सरकारी गवाह नहीं हो सकते क्योंकि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे."

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने सोमवार को शेख हसीना के खिलाफ फैसला सुनाया. न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाते समय साक्ष्यों के विवरण के दौरान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय, ह्यूमन राइट्स वॉच, बीबीसी आदि की रिपोर्टों को साक्ष्य के रूप में उद्धृत किया.

चकमा ने कहा, "ओएचसीएचआर, एचआरडब्ल्यू या बीबीसी की रिपोर्ट्स तब तक सबूत नहीं मानी जा सकतीं जब तक कि उनके प्रतिनिधियों द्वारा रिपोर्ट में दिए गए तर्कों को पुष्ट करने के लिए पुष्ट प्रमाण प्रस्तुत न किए जाएं, खासकर मृत्युदंड सुनाते समय. मुकदमे के दौरान इन गवाहों की गवाही या जिरह नहीं हुई. यह मुकदमा पीड़ितों के लिए न्याय का हनन भी है क्योंकि असली अपराधियों को सजा नहीं मिल रही है."

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