कसौली स्थित CRI संस्थान ने बनाई टेटनेस और डिफ़्थीरिया वैक्सीन, जेपी नड्डा ने की लॉन्चिंग
CRI से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने नई वैक्सीन को लॉन्च किया है. ये वैक्सीन टेटनेस और डिफ़्थीरिया जैसे दोनों रोगों से सुरक्षा प्रदान करेगी.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 3:02 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश के कसौली पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने टेटनस एवं डिफ्थीरिया वैक्सीन का शुभारंभ किया. कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान यानी CRI से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस नई वैक्सीन को लॉन्च किया है. इस अवसर पर लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप और हिमाचल भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल भी मौजूद रहे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि दवाओं के निर्माण और वैक्सीनेशन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने वैक्सीन प्रोग्राम के सफल संचालन के लिए सीआरआई की सराहना की.
टेटनेस और डिफ़्थीरिया से सुरक्षा प्रदान करेगी वैक्सीन
केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में बनी ये वैक्सीन टेटनेस और डिफ़्थीरिया जैसे दोनों रोगों से सुरक्षा प्रदान करेगी. CRI ने Td वैक्सीन के निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके बाद आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसकी शुरुआत कर दी है. वैक्सीन अब यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम ल के तहत उपलब्ध होगी। दावा किया जा रहा है कि लॉन्च के बाद अप्रैल 2026 तक 55 लाख खुराकें UIP को उपलब्ध कराई जाएंगी, और भविष्य में आपूर्ति बढ़ती रहेगी.
PM मोदी ने किया देश का भाग्य परिवर्तन-नड्डा
वैक्सीन की लॉचिंग करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि 'नीति निर्माता देश के भाग्य में परिवर्तन लाते हैं और लोकतंत्र में नीति निर्माण की ताकत जनता से मिलती है. इस दौरान जेपी नड्डा ने पीएम मोदी के नेतृत्व में यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से लेकर AI इंपैक्ट सम्मिट का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी सेमीकंडक्टर यूनिट का श्री गणेश कर रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें CRI से टेटनेस और डिफ़्थीरिया वैक्सीन की शुरुआत का मौका मिल रहा है. जेपी नड्डा ने कहा कि देश में टेटनेस और डिफ़्थीरिया जैसी बीमारियों की दवा आने में 25 से 30 साल लग गए. वहीं जापानी इंसेफेलाइटिस की दवा आने में 100 साल लग गए. देश के पॉलिसी मेकर्स ने मान लिया था यह उनका काम नहीं है. जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने पॉलिसी मेकर के रूप में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्य रखा है.'

