'गुल्लक बैंक' से Bank FD का सफर, पुलिस पाठशाला के बच्चों को मिला आर्थिक सुरक्षा
मुजफ्फरपुर में पुलिस पाठशाला के बच्चों का गुल्लक बैंक का सफर अब बैंक एफडी तक पहुंच गया है, पढ़िए पूरी खबर

Published : May 18, 2026 at 4:18 PM IST
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर के कन्हौली टीओपी में संचालित पुलिस पाठशाला रेड लाइट एरिया और स्लम इलाके के बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है. यहां शिक्षा के साथ बच्चों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है. कभी पुलिस को देखकर डरने और भाग जाने वाले बच्चे अब पुलिसकर्मियों का ‘जय हिंद’ बोलकर स्वागत करते हैं. इसी बदलाव की कहानी अब ‘गुल्लक बैंक’ से आगे बढ़कर बैंक एफडी तक पहुंच गई है.
छात्रों का सफर अब गुल्लक बैंक से आगे बढ़ा : दरअसल, मुजफ्फरपुर के रेड लाइट और स्लम के बच्चों में बचत की आदत विकसित करने के उद्देश्य से पाठशाला में पहले ‘गुल्लक बैंक’ की शुरुआत की गई थी. जिसमें बच्चे अपने अकाउंट में हर महीने 50 रुपये जमा करते है. साथ ही बच्चों के जन्मदिन पर 500 रुपये उनके खाते में जमा कराए जाते है. इस व्यवस्था के तहत हर बच्चे के खाते में सालाना 1100 रुपये जमा हो चुके है.

रेड लाइट-स्लम के छात्रों को मिला बैंक FD का तोहफा : अब इस पहल को आगे बढ़ाते हुए मेधाबी बच्चों के पैसों में पुलिस पाठशाला की ओर से कुछ राशि और जोड़कर बैंक में फिक्स डिपॉपिट किया गया है. इस बच्चों की बैंक की ओर से बच्चों को पासबुक भी उपलब्ध कराया गया. यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
''आज बच्चों को फिक्स डिपॉजिट की पासबुक सौंपते हुए बहुत खुशी हो रही है, यह पहल प्रेरणादायक है और इससे बच्चों की शिक्षा व भविष्य मजबूत होगा. यहां पढ़ने वाले बच्चे आगे चलकर बैंकिंग, प्रशासनिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएंगे.'' - अनुराग जोशी, चीफ जनरल मैनेजर, बैंक
बच्चों के सपनों की नई उड़ान : मुजफ्फरपुर के कन्हौली टीओपी में संचालित यह पुलिस पाठशाला रेड लाइट एरिया के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. समय के साथ यह पहल अब एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है.

पुलिस पाठशाला में आत्मनिर्बर हो रहे बच्चे : यहां बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन के लिए भी तैयार किया जा रहा है. शुरुआत में यहां महज 15 बच्चे पढ़ने आते थे, लेकिन अब डेढ़ सौ से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.
कैसे हुई पुलिस पाठशाला की शुरुआत: साल 2013, दीपावली के बाद मुजफ्फरपुर के कन्हौली पुलिस चौकी परिसर में पुलिस पाठशाला की शुरुआत हुई थी. इलाके की सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा खातून ने इसकी शुरुआत की थी, जिसमें रेड लाइट एरिया और स्लम के बच्चे पढ़ते हैं. शाम साढ़े पांच बजे के बाद एएसपी अवधेश दीक्षित इन बच्चों को रोज पढ़ाने आते हैं. इन सभी बच्चों को मुफ्त में पेन-पेंसिल, किताबें और कॉपी दी जाती है.
नसीमा खातून की पहल : पुलिस पाठशाला से जुड़ी नसीमा खातून ने ईटीवी से बताया कि रविवार को पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चों के लिए खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एसबीआई की ओर से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत बच्चों को कंप्यूटर, ड्रेस, पढ़ाई की सामग्री और शुद्ध पेयजल की सुविधा के लिए आरओ वाटर कूलर उपलब्ध कराया गया. इस दौरान बच्चों को बैंक पासबुक भी सौंपी गई.

''जब पुलिस पाठशाला की शुरुआत हुई थी, तो 10 से 12 बच्चे यहां पढ़ने आते थे, लेकिन अब बच्चों की संख्या 150 से ज्यादा है. लेकिन बच्चों की आर्थिक सुरक्षा बड़ी चुनौती थी. इसलिए शुरुआत में इन बच्चों के लिए गुल्लक बैंक शुरू किया गया था, आज इनमें से कुछ मेधाबी बच्चों का एफडी किया गया है.'' - नसीमा खातून, सामाजिक कार्यकर्ता
वहीं, सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी ने कहा कि ''इस प्रयास से ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है, जिन्हें अक्सर समाज में उचित स्थान नहीं मिल पाता. अब ये बच्चे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं.''
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