भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले जीतन राम मांझी, 'पुलिस ने नियमों के तहत की कार्रवाई, जांच रिपोर्ट का इंतजार करें'
भरत तिवारी एनकाउंटर पर जीतन राम मांझी ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया, न्यायिक जांच पूरी होने तक मांझी ने की ये अपील, पढ़ें-

Published : July 3, 2026 at 3:40 PM IST
पटना: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गर्म है. विपक्ष जहां पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी खुलकर पुलिस के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपने अधिकार और नियमों के दायरे में रहकर कार्रवाई की है. मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए.
'पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो खुद बन सकती थी निशाना' : पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है. यदि पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती तो पुलिसकर्मी स्वयं भी हमले का शिकार हो सकते थे. उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच चल रही है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी उचित नहीं होगी.
चिराग पासवान के दौरे पर कही यह बात : भरत तिवारी के परिजनों से मिलने भोजपुर पहुंचे चिराग पासवान और प्रस्तावित महापंचायत में उनकी भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर मांझी ने कहा कि हर नेता की अपनी कार्यशैली और सोच होती है. उन्होंने कहा, "चिराग जो करेंगे, क्या वही हम भी करेंगे? हमारा अपना स्पष्ट दृष्टिकोण है और हम उसी के अनुरूप चलते हैं."
'निर्दोष थे तो एससी एसटी एक्ट में केस क्यों?' : केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि भरत तिवारी पूरी तरह निर्दोष थे तो उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज हुआ था. उन्होंने यह भी कहा कि जिस रिवॉल्वर का जिक्र किया जा रहा है, उसकी वैधता और लाइसेंस की भी जांच होनी चाहिए.
'पुलिस की मंशा मारने की नहीं थी' : मांझी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं होता, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखना होता है. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की नीयत मारने की होती तो गोली शरीर के ऊपरी हिस्से में चलाई जाती, जबकि कार्रवाई कमर के नीचे की गई थी. उन्होंने माना कि व्यक्ति की मृत्यु होना दुखद है, लेकिन इसे जानबूझकर की गई हत्या नहीं कहा जा सकता. उन्होंने दोहराया कि न्यायिक जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
प्रमोशन पर भी रखी अपनी राय : एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति दिए जाने के सवाल पर मांझी ने कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना और दोषी सिद्ध होना दो अलग अलग बातें हैं. जब तक न्यायिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए.
''यदि अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो कार्रवाई होगी, लेकिन दोष सिद्ध हुए बिना उन्हें लंबे समय तक निष्क्रिय रखना भी उचित नहीं है. बिहार पहले से पुलिस बल की कमी की चुनौती का सामना कर रहा है.''- जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
महापंचायत से दूरी बनाने की बताई वजह : प्रस्तावित महापंचायत में शामिल नहीं होने के फैसले पर जीतन राम मांझी ने कहा कि कुछ लोग राज्य सरकार और उसके नेतृत्व को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. यदि वे कार्यक्रम में शामिल होते तो बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंचते, जिससे माहौल बिगड़ने और कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी.
''सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से महापंचायत से दूरी बनाई. बिहार में वर्तमान नेतृत्व विकास और सुशासन की दिशा में काम कर रहा है और किसी भी तरह का सामाजिक तनाव राज्यहित में नहीं होगा.'' - जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
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