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यूपी की कानून व्यवस्था पर झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने उठाए सवाल, राष्ट्रपति को पत्र लिखकर की यूपी में राष्ट्रपति शासन की मांग

झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. साथ ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की.

Minister Irfan Ansari
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 23, 2026 at 4:55 PM IST

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रांची: उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है. झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है. मंत्री इरफान अंसारी ने सवाल उठाया और कहा कि उत्तर प्रदेश में संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर संकट दिखाई दे रहा है.

यूपी की कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

मंत्री इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर साझा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

'गरीबों के घर पर बुलडोजर चलाना बहादुरी नहीं'

अपने बयान में अंसारी ने कहा कि गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाकर ताकत दिखाना शासन की बहादुरी नहीं, बल्कि संवेदनहीनता है. उन्होंने कहा कि किसी का घर केवल ईंट-पत्थर नहीं बनता, बल्कि उसमें परिवार की यादें, बच्चों के सपने और भविष्य की उम्मीदें बसती हैं. ऐसे कदम समाज में भय और विभाजन को बढ़ावा देते हैं.

'लोकतंत्र में जनता करती है अंतिम निर्णय'

मंत्री ने कहा कि “योगी” और “बाबा” जैसे शब्द त्याग, सेवा और समरसता के प्रतीक हैं और इनके साथ समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी होती है, न कि नफरत और वैमनस्य का माहौल बनाने की. उन्होंने जनता से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता ही करती है.

'राष्ट्रपति शासन पर गंभीरता से हो विचार'

अपने पोस्ट में इरफान अंसारी ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड भाजपा को भी टैग किया है. अंसारी ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, तो संविधान में दिए गए प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति शासन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने दो टूक कहा कि अन्याय और भेदभाव ज्यादा समय तक नहीं टिकते और लोकतंत्र में जवाब लोकतांत्रिक तरीके से ही दिया जाता है.

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