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झारखंड जगुआरः नक्सल और विस्फोटक दोनों पर एक साथ प्रहार! जानें, कैसा रहा 18 साल का सफर

आज झारखंड जगुआर का स्थापना दिवस है. ईटीवी की रिपोर्ट से जानें, कैसा रहा विशेष बटालियन का अब तक सफर.

Jharkhand Jaguar Foundation Day Know journey of Special Battalion so far
झारखंड जगुआर के जवान (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 20, 2026 at 4:17 PM IST

7 Min Read
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रांचीः झारखंड में नक्सलवाद दशकों पुराना एक ऐसा घाव है जिस पर अब धीरे धीरे मरहम लग रहा है. साल 2007 के पहले तो नक्सली झारखंड के किसी भी हिस्से में हमला करने का मद्दा रखते थे. लैंड माइंस और आईईडी बम के बल पर नक्सलियों ने पुलिस को भारी क्षति पहुंचाई. लेकिन साल 2008 में झारखंड जगुआर नाम की एक ऐसी फोर्स प्रदेश में बनी जिसकी तुलना ग्रे-हाउंड से हुई. आज यानी 19 फरवरी को झारखंड जगुआर 18 साल का हो चुका है. ऐसा लगता है इसके 19 साल में प्रवेश करते ही झारखंड से नक्सली हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे.

कारगर साबित हुआ जगुआर

झारखंड निर्माण के 25 साल हो गए इन वर्षों में अगर सबसे ज्यादा झारखंड पुलिस को किसी से नुकसान पहुंचा है तो वह है नक्सली. जिस समय आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नक्सलियों का दबदबा था, उस दौरान झारखंड भी लाल आतंक के साए में जी रहा था. नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई के लिए झारखंड पुलिस पूरी तरह से केंद्रीय बलों पर आश्रित थी.

इसी समय झारखंड ने देखा कि आंध्र प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ उनकी अपनी फोर्स ग्रे-हाउंड बेहतरीन काम कर रही है. ग्रे-हाउंड की मारक क्षमता ने आंध्र प्रदेश में नक्सलियों लगभग खात्मा ही कर दिया था. ऐसे में झारखंड पुलिस ने भी नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई के लिए अपनी एक विशेष बटालियन बनाने की ठान ली और फिर 19 फरवरी 2008 को गठन हुआ झारखंड जगुआर का.

Jharkhand Jaguar 18th Foundation Day
झारखंड जगुआर का 18 साल का सफर (ETV Bharat)

ग्रे-हाउंड के तर्ज पर बना झारखंड जगुआर

साल 2000 से लेकर 2007 तक झारखंड में नक्सलवाद अपने चरम पर था. झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ के मदद से नक्सलवाद के खिलाफ एक तरह से एक बेहद खूनी लड़ाई लड़ रही थी. जिसमें जंगल-पहाड़ों पर अक्सर नक्सली पुलिस पार्टी पर भारी पड़ते थे. उस समय झारखंड पुलिस पूरी तरह से अभियान के लिए केंद्रीय बलों पर आश्रित थी. जबकि आंध्र प्रदेश पुलिस की अपनी नक्सल एक्सपर्ट फोर्स ग्रे-हाउंड नक्सलियों के खिलाफ बेहद मारक साबित हो रही थी. इसी के बाद झारखंड पुलिस ने भी नक्सलियों के खिलाफ एक अपनी फोर्स तैयार की जिसका नाम झारखंड जगुआर दिया गया. आंध्र प्रदेश की ग्रे-हाउंड के तर्ज पर नक्सल अभियान में झारखंड जगुआर की भूमिका बेहद कारगर है. गठन के 18 सालों में जगुआर की वजह से माओवादी समेत तमाम उग्रवादी संगठनों पर नकेला कसा है.

40 असॉल्ट ग्रुप और 15 बीडीएस टीम है जगुआर के पास

एक समय था जब अगर कहीं नक्सलियों के द्वारा बिछाया गया लैंडमाइंस या आईईडी मिल जाए तो उसे कैसे नष्ट किया जाए यह एक बड़ी समस्या होती थी. अक्सर इसके लिए सीआरपीएफ और सेना की मदद ली जाती थी लेकिन यह बातें पुराने हो चुकी हैं. झारखंड जगुआर के गठन के बाद सबसे पहले इसकी 15 बीडीएस टीम यानी बम निरोधक दस्ते की टीम तैयार की गई. झारखंड जगुआर के बीडीएस टीम ने पूरे झारखंड से सैकड़ों की संख्या में आईईडी को जमीन से निकालकर उसे नष्ट किया. वर्तमान समय में जगुआर में 40 एसॉल्ट ग्रुप 15 बम स्क्वायड टीम है. झारखंड जगुआर में शामिल अधिकारियों और जवानों को 50% अतिरिक्त भत्ता का लाभ भी मिलता है.

Jharkhand Jaguar 18th Foundation Day
झारखंड जगुआर फोर्स की खासियत (ETV Bharat)

अत्याधुनिक हथियारों से लैस है जगुआर

झारखंड से नक्सलवाद 95% खत्म हो चुका है हालांकि हकीकत यह भी है कि जो नक्सली बचे हैं उनके पास भी अत्यधिक हथियार मौजूद हैं. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी राहत यह है कि नक्सलियों से लोहा ले रहे झारखंड जगुआर के पास अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा है. जगुआर के पास रात में दिखाई देने वाला यंत्र भी मौजूद है इसके अलावा एक-47 के साथ-साथ टेबेरो एक्स 95 हथियार भी है. झारखंड जगुआर के पास एक से एक निशानेबाज भी है जो अपने स्नाइपर राइफल की बदौलत नक्सलियों के छक्के छुड़ा देते हैं.

Jharkhand Jaguar 18th Foundation Day
झारखंड जगुआर के जवान (ETV Bharat)

झारखंड का ग्रे-हाउंड है जगुआर, इस फोर्स से खौफ खाते हैं नक्सली

झारखंड जगुआर यानी भरोसे का दूसरा नाम, अपने गठन के बाद से ही स्पेशल फोर्स झारखंड के नक्सलियों के लिए खौफ का दूसरा नाम है. 18 साल पहले जब झारखंड के लगभग सभी जिलों में नक्सलियों की धमक थी तब इस फोर्स का गठन हुआ. उसके बाद से इस फोर्स ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इस फोर्स ने दर्जन भर नक्सलियो को इनकाउंटर में मार गिराया वहीं सैकड़ों को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया.

अब जगुआर लेता है लोहा

झारखंड में नक्सलियों पर लगाम लगाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा देने के लिए अब केंद्रीय बलों की सहयोग की बहुत कम जरूरत पड़ती है. यह संभव इसलिए हो पाया क्योंकि स्पेशल टास्क फोर्स की झारखंड में गठित स्पेशल यूनिट अब नक्सलियों के साथ लोहा ले रही है जिसे झारखंड जगुआर के नाम से जाना जाता है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों की रोकथाम और उनके आतंक को पूरी तरह से खत्म करने के लिए झारखंड के निर्माण के लगभग 8 साल बाद झारखंड जगुआर की स्थापना की गई थी. वर्तमान में झारखंड जगुआर की टीमें एवं बीडीएस टीम चाईबासा जिला अर्न्तगत सारंडा के दुर्गम क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ सघन अभियान चला रही है. झारखंड जगुआर एवं अन्य संयुक्त बलों के प्रयास से झारखंड राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए प्रयत्नशील है.

Jharkhand Jaguar 18th Foundation Day
झारखंड जगुआर (ETV Bharat)

हमारी बेहतरीन फोर्स है जगुआर

झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे ने बताया कि राज्य पुलिस के विभिन्न इकाइयों से शारीरिक और मानसिक योग्यता के आधार पर योग्य पदाधिकारी और कर्मियों का चयन झारखंड जगुआर के लिए किया जाता है. वर्तमान समय में चाहे पारसनाथ की ऊंची पहाड़ी हो सारंडा के घने जंगल हो चाहे बूढ़ापहाड़ का दुरूह इलाका, हर जगह झारखंड जगुआर की पहुंच में है. पिछले 18 सालों में झारखंड जगुआर ने नक्सलियों के साथ 114 मुठभेड़ में 50 से ज्यादा दुर्दांत उग्रवादियों को मार गिराया है. झारखंड जगुआर ने अब तक 452 हथियार और लगभग 20782 कारतूस के साथ-साथ नक्सलियों के 2295 आईईडी भी बरामद किए हैं. अपनी वीरता को लेकर झारखंड जगुआर ने कई पदक भी जीते हैं.

24 जगुआर हो चुके हैं वीरगति को प्राप्त

अपने बलिदान और शौर्य के बल पर झारखंड जगुआर ने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. साथ ही झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय बलों के प्रति निर्भरता भी कम हुई है. 18 साल के इतिहास में झारखंड जगुआर के जवानों ने कई नक्सलियों को मार गिराया. वहीं कई को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया लेकिन इसमें झारखंड जगुआर के अधिकारियों और जवानों को भी अपनी जान की आहुति देनी पड़ी है. पिछले 18 सालों में 24 जगुआर वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं.

Jharkhand Jaguar 18th Foundation Day
झारखंड जगुआर को पुरस्कार (ETV Bharat)

कई पुरस्कार किए हैं अपने नाम

झारखंड जगुआर के गठन से लेकर अब तक पदाधिकारियों एवं कर्मियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्वारा 68 सराहनीय सेवा पुलिस पदक, 03 विशिष्ट सेवा पुलिस पदक, वीरता के लिये 17 पुलिस पदक तथा गृह मंत्रालय द्वारा 02 अति उत्कृष्ट सेवा पदक, 19 उत्कृष्ट प्रशिक्षण पदक, 53 आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक एवं केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 04 विशिष्ट ऑपरेशन पदक, 07 उत्कृष्ट सेवा पदक तथा झारखण्ड मुख्यमंत्री द्वारा 76 वीरता पदक, सराहनीय सेवा के लिए 78 झारखंड पुलिस पदक एवं 03 झारखंड राज्यपाल पदक से सम्मानित किया जा चुका है.

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