झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्रक ड्राइवर की मौत पर मुआवजा 3.18 गुना बढ़ा
झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रक ड्राइवर की मौत पर मुआवजा बढ़ाने का एक बड़ा फैसला दिया है. राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट.

Published : August 31, 2026 at 8:45 PM IST
रांचीः झारखंड हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले भारी वाहन चालक जहांगीर खान के परिवार को बड़ी राहत दी है.
हाई कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, पाकुड़ की ओर से तय 5 लाख 76 हजार रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 18 लाख 30 हजार रुपये कर दिया. इस तरह मुआवजे की राशि करीब 3.18 गुना बढ़ाई गई है. साथ ही तय की गई राशि पर अतिरिक्त 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा. यह फैसला 28 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक ने एम.ए. नंबर 21/2014 में सुनाया है.
12 साल बाद खत्म हुई कानूनी लड़ाई
इस मामले की अपील साल 2014 में झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल हुई थी. करीब 12 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब मामले का अंतिम रूप से निपटारा हुआ है. कोर्ट के इस फैसले से मृतक जहांगीर खान के परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली है.
आय कम करके मुआवजा नहीं घटाया जा सकता
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एक महत्वपूर्ण बात कही. कोर्ट ने माना कि भारी व्यावसायिक वाहन चलाना एक स्किल्ड यानी कुशल काम है. इसलिए भारी वाहन चालक को कम कुशल या अर्ध-कुशल मजदूर मानकर उसकी आय कम तय करना उचित नहीं है. कोर्ट ने इसी आधार पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के पुराने आकलन को खारिज कर दिया.
4,500 की जगह 10 हजार रु. मानी गई मासिक आय
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल यानी एमएसीटी, पाकुड़ ने साल 2012 में मृतक जहांगीर खान की मासिक आय 4,500 रुपये मानते हुए मुआवजा तय किया था. हाई कोर्ट ने इस आकलन को उचित नहीं माना. कोर्ट ने चालक की आय 10 हजार रुपये प्रति माह तय की और इसके साथ 40 प्रतिशत फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स भी जोड़े. इसी पुनर्गणना के बाद परिवार को मिलने वाली कुल मुआवजा राशि बढ़कर 18 लाख 30 हजार रुपये हो गई.
अमिकस क्यूरी अनिकेत कुमार ओझा की सराहना
इस मामले में हाई कोर्ट ने अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा, जो अमिकस क्यूरी के तौर पर अदालत की सहायता कर रहे थे, उनके काम की विशेष रूप से सराहना की. मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में दर्ज किया कि उन्होंने ग्रामीण और साधनहीन दावेदारों का पक्ष बेहद प्रभावी ढंग से अदालत के सामने रखा. कोर्ट ने उनके सहयोग के लिए औपचारिक रूप से आभार भी व्यक्त किया और JHALSA को उनकी कानूनी फीस का भुगतान करने का निर्देश दिया.
इंश्योरेंस कंपनी को छह हफ्ते में भुगतान का निर्देश
इस फैसले के बाद अब नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बढ़ी हुई मुआवजा राशि का भुगतान करना होगा. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ पूरी राशि छह सप्ताह के भीतर हाई कोर्ट में जमा करना होगा.
JHALSA व DLSA को परिवार की मदद का जिम्मा
हाई कोर्ट ने सिर्फ मुआवजा बढ़ाने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि परिवार को राशि हासिल करने में किसी तरह की परेशानी या शोषण न हो. इसके लिए JHALSA और DLSA साहिबगंज को परिवार के साथ सीधे समन्वय करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि मुआवजे की रकम सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के उनके बैंक खातों तक पहुंच सके.
फैसले से वंचित परिवार को मिली बड़ी राहत
झारखंड हाई कोर्ट के इस फैसले को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने भारी वाहन चालकों के काम की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उनकी आय के आकलन पर स्पष्ट रुख अपनाया है. 5.76 लाख से बढ़ाकर 18.30 लाख रुपये मुआवजा किया जाना, 12 साल पुरानी कानूनी लड़ाई के बाद परिवार के लिए बड़ी राहत है. साथ ही, अमिकस क्यूरी अनिकेत कुमार ओझा की प्रभावी कानूनी सहायता की मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई सराहना इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आई है.
इसे भी पढ़ें- CCTV मामले में हाई कोर्ट सख्त, DGP को अवमानना नोटिस, 30 सितंबर तक सभी थानों में कैमरे लगाने का निर्देश
इसे भी पढ़ें- FRO-ACF नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश पर रोक से हाई कोर्ट का इनकार, सरकार से मांगा जवाब
इसे भी पढ़ें- झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन चुनाव में अजित कुमार बने अध्यक्ष, नवीन कुमार महासचिव निर्वाचित

