झारखंड वन विभाग मध्य प्रदेश से लाएगा 50 गौड़, बांधवगढ़ मॉडल पर आधारित योजना
पलामू टाइगर रिजर्व में गौड़ की संख्या बढ़ाने की बड़ी पहल की गई है. यहां मध्य प्रदेश से 50 गौड़ लाए जाने की योजना है.


Published : February 17, 2026 at 5:25 PM IST
पलामू: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में गौड़ (भारतीय बाइसन) की घटती आबादी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं. वन विभाग मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 50 गौड़ों का स्थानांतरण (ट्रांसलोकेशन) करने की तैयारी में है. यह योजना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक लागू किए गए गौड़ ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां कान्हा और सतपुड़ा से लाए गए गौड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है.
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि गौड़ की आनुवंशिक विविधता (जेनेटिक डाइवर्सिटी) बढ़ाने और स्थानीय आबादी को मजबूत करने के लिए यह translocation आवश्यक है. पलामू में गौड़ की संख्या ऐतिहासिक रूप से घट रही है. 1970 के दशक में यहां लगभग 1500 गौड़ थे, लेकिन अब यह संख्या काफी कम हो गई है. मुख्य कारणों में मानव दबाव, आवास क्षरण, अवैध शिकार और घरेलू पशुओं से फैलने वाली बीमारियां शामिल हैं.
बेतला में केवल 68 गौड़ बचे
पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क क्षेत्र में ही गौड़ की आबादी बची हुई है, जो राज्य में गौड़ का अंतिम मजबूत ठिकाना है. हाल के सर्वे (2024-2025) में कुल 68 गौड़ पाए गए, जिनमें 33 मादाएं, 25 नर और 10 बच्चे शामिल हैं. पिछले दो वर्षों से पलामू टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की संयुक्त टीम द्वारा गौड़ के प्रजनन (ब्रीडिंग) और व्यवहार पर सर्वे किया गया, जिसमें पाया गया कि प्रजनन दर कमजोर हो गई है. आनुवंशिक सीमितता के कारण ब्रीडिंग प्रभावित हुई है.

इस कमी को दूर करने के लिए बाहर से गौड़ लाने की योजना बनी. राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और गौड़ इंडिया से चर्चा के बाद यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ा. पलामू की टीम ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का दौरा किया, जहां गौड़ ट्रांसलोकेशन की ट्रेनिंग ली. टीम ने कैप्चर, ट्रांसपोर्ट, सॉफ्ट रिलीज, मॉनिटरिंग और पोस्ट-रिलीज मैनेजमेंट सहित कई तकनीकों का अध्ययन किया.
झारखंड के बेतला नेशनल पार्क में गौड़ का लास्ट सर्वाइविंग पॉपुलेशन मौजूद है. पिछले दो वर्ष से संख्या बढ़ाने के लिए रिकवरी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी गौड़ इंडिया से गौड़ की संख्या बढ़ाने के लिए बातचीत की गई थी. इनकी संख्या बढ़ाने के लिए सॉफ्ट रिलीज सेंटर भी बनाए गए हैं. गौड़ को लेकर पलामू टाइगर रिजर्व की टीम बांधवगढ़ गई थी और ट्रेनिंग ली है, इस दौरान एक टेक्निकल टीम भी साथ में थी. बांधवगढ़ में भी मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गौड़ को लाया गया है. कान्हा एवं सतपुड़ा से गौड़ को लाने की योजना है. - प्रजेशकान्त जेना, उपनिदेशक, पीटीआर
50 गौड़ को लाया जाना है पलामू टाइगर रिजर्व में
पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में कुल 50 गौड़ मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए जाएंगे. यह प्रक्रिया कई चरणों में होगी. पहले चरण में 2-3 गौड़ लाए जाएंगे, ताकि अनुकूलन का अध्ययन किया जा सके. 2026 के अंत तक पूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य. विशेष BOMA ट्रकों से सड़क मार्ग द्वारा, जिसमें 2-3 दिन लग सकते हैं.
छिपादोहर में विशेष इनक्लोजर
पलामू टाइगर रिजर्व के छिपादोहर क्षेत्र में गौड़ों के लिए स्पेशल सॉफ्ट रिलीज इनक्लोजर तैयार किया जा रहा है. यहां घास के मैदान (ग्रासलैंड) का विस्तार किया गया है. इनक्लोजर में भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. गौड़ों को पहले इनक्लोजर में अनुकूलित किया जाएगा, फिर धीरे-धीरे जंगल में रिलीज किया जाएगा.
यह प्रयास न केवल पलामू में गौड़ की आबादी को 5-7 वर्षों में 100-120 तक पहुंचाने की उम्मीद जगाता है, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूत करेगा. बांधवगढ़ में इसी तरह के प्रोजेक्ट से गौड़ों की संख्या सफलतापूर्वक बढ़ी है, जो इस योजना के लिए प्रेरणा स्रोत है.
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