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JEE MAIN 2026 - जुड़वा भाइयों में कंपटीशन : लेकर आए बराबर अंक, मां ने बच्चों के लिए छोड़ा लाखों का पैकेज व मेडिकल प्रैक्टिस

भुवनेश्वर के रहने वाले दो भाई मसरूर और महारूफ जुड़वा हैं. उनके पेरेंट्स डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने इंजीनियरिंग करना स्वीकार किया है.

Two Twin Brothers
भुवनेश्वर के रहने वाले जुड़वा भाई मसरूर और महारूफ (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 17, 2026 at 1:51 PM IST

5 Min Read
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कोटा: ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले दो भाई मसरूर और महारूफ जुड़वा हैं, लेकिन एक दूसरे से उनका कंपटीशन भी है. दोनों भाइयों को मैथमेटिक्स में इंटरेस्ट था, इसीलिए उनके माता-पिता को बायोलॉजी की जगह मैथमेटिक्स उन्हें दिलानी पड़ी. दोनों भाइयों में जमकर कंपटीशन बचपन से लेकर अब तक हो रहा है. दोनों एक स्टडी टेबल पर पढ़ते हैं. एक दूसरे की मदद करते हैं, लेकिन जज्बा ऐसा है कि एक दूसरे से कंपटीशन है और इस कंपटीशन में दोनों समान अंक लेकर भी आते रहे हैं.

एक बार फिर उन्होंने जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन (JEE MAIN 2026) में सफलता हासिल की है और टॉपर बने हैं. दोनों के सामान 285 अंक आए हैं. दोनों का एक ही शिफ्ट में एग्जाम था और दोनों के समान अंक होने से परसेंटाइल भी सामान बनी है. जिसमें 99.9984543 परसेंटाइल आए हैं. अब जेईई एडवांस्ड के लिए उन्होंने क्रैक कर लिया है. अब एडवांस की तैयारी में दोनों भाई जुट गए हैं.

जुड़वा भाइयों ने क्या कहा, सुनिए... (ETV Bharat Kota)

खास बात यह है कि बीते 3 सालों से वह कोटा में तैयारी कर रहे हैं. उनके पिता डॉ. मंसूर अहमद खान आईआईटी भुवनेश्वर में मेडिकल यूनिट के प्रभारी हैं और फिजिशियन हैं. जबकि मां डॉ. जीनत बेगम उनके साथ ही रहती हैं. वे गाइनेकोलॉजिस्ट हैं, लेकिन सरकारी जॉब और मेडिकल प्रैक्टिस को छोड़कर कोटा में उनके साथ मेहनत कर रही हैं. लाखों रुपये की सैलरी की नौकरी छोड़ दी.

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माता-पिता डॉक्टर, फिर भी मैथमेटिक्स चुनी : डॉ. मंसूर अहमद खान व उनकी पत्नी डॉ. जीनत बेगम दोनों की इच्छा थी कि बच्चे मेडिकल में ही जाएं, लेकिन बच्चों की इच्छा इंजीनियरिंग के फील्ड में जाने की थी. माता-पिता ने प्रेशर भी नहीं किया और उसके बाद बच्चों ने मैथमेटिक्स चुन लिया. मां-पिता डॉक्टर फिर भी बायोलॉजी नहीं ली. इस पर दोनों भाइयों का कहना है कि मैथमेटिक्स की तरफ ज्यादा झुकाव था. मैथमेटिक्स के प्रॉब्लम को सॉल्व करना ज्यादा अच्छा लगता था. इसलिए हमने यही को चुना है. बायोलॉजी में ज्यादा याद करना होता था. कॉन्सेप्ट काफी कम होते थे. जबकि मैथमेटिक्स में कॉन्सेप्चुअल ज्यादा है. प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी ज्यादा है तो दिमाग खुल जाता है. इसलिए हमने मैथमेटिक्स को चुना.

Two Twin Brothers
अपनी मां के साथ महारूफ और मसरूर (ETV Bharat Kota)

पिता ने की कोटा की तारीफ : कोटा का सिस्टम काफी सपोर्टिव है. यहां के फैकल्टी काफी अच्छी है. अकादमिक ही नहीं सब कुछ ठीक है. यहां पर डाउट क्लियर क्लासेस काफी बढ़िया है. हमें सिस्टम इतना सपोर्ट करता है कि वहां पर बच्चे अकेलापन महसूस नहीं करते हैं, क्योंकि काफी सपोर्ट सिस्टम अच्छा है. हमेशा टीचर्स अवेलेबल रहते हैं. डाउट्स कभी भी उनको भेज सकते हैं और पूछ सकते हैं. ऐसा सिस्टम कहीं भी नहीं मिलेगा. मां डॉ. जीनत बेगम का कहना है कि उनके पिता दो-ढाई महीने में एक बार कोटा आ जाते हैं, जबकि वे परमानेंट यहीं हैं. वह 3 साल से यहां हैं और बहुत कम ओडिशा गई हैं. उन्होंने ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के अस्पताल में बतौर गाइनेकोलॉजिस्ट जॉब से रिजाइन कर दिया है. इसके अलावा प्रैक्टिस भी नहीं कर रही हैं.

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10वीं से कोटा में पढ़ रहे : दोनों बच्चों को 9वीं के बाद हमने कोटा शिफ्ट कर दिया था. बीते तीन साल से उनकी मां के साथ रहकर कोटा में ही पढ़ रहे हैं. इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड (IJSO) 2023 में दोनों बच्चों का ओरिएंटेशन कम सिलेक्शन कैंप (OCSC) में दोनों का चयन हुआ था. भारतीय टीम के साथ महारूफ गोल्ड मेडल भी थाईलैंड से लेकर आया था. इंटरनेशनल कैमेस्ट्री (ICHO) 2025 में ओरिएंटेशन कम सिलेक्शन कैंप (OCSC) में भी गए थे. दोनों आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस से एक साथ पढ़ना चाहते हैं.

हमारी वीकनेस स्ट्रैंथ में कन्वर्ट हो गई : मसरूर ने बताया कि कोटा में 3 साल से हैं और रगड़कर मेहनत यहां पर की है. कोचिंग के मॉड्यूल को पूरा सॉल्व किया. किसी भी तरह का डाउट आते हैं तो टीचर से पूछना. टेस्ट में मिस्टेक को बार-बार प्रैक्टिस कर क्लियर करना, ताकि दोबारा वह क्वेश्चन आ जाए तो मिस्टेक नहीं हो. महारूफ ने बताया कि जिस तरह से डाउट आते थे, तो एक दूसरे की मदद करते थे. हम एक ही स्टडी टेबल पर पढ़ते थे तो मैं उसके डाउट को सॉल्व करता था, वह मेरे डाउट को सॉल्व करता था. हमारी वीकनेस अपने आप ही स्ट्रैंथ में कन्वर्ट हो गई और परफॉर्मेंस अच्छी हो गई. अपने आप ही भाई के साथ हेल्दी कंपटीशन बना रहता था, यह उससे इंप्रूव हो गया.

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एक दूसरे की मदद, मेहनत व सपोर्ट से रिजल्ट : मसरूर का कहना है कि पढ़ाई में दोनों का ही अप एंड डाउन आया है. कभी एक अच्छा करता तो कभी मैं करता था, लेकिन दोनों एक दूसरे को मोटिवेट करते थे. दोनों भाइयों की मेहनत व सपोर्ट से रिजल्ट आया. मसरूर के दसवीं में 97 और महारूफ के 96 प्रतिशत अंक आएं थे. एक परसेंट ज्यादा के सवाल पर मसरूर ने कहा कि दसवीं में भी दोनों ने एक साथ पढ़ाई की और एक साथ ही दोनों के रिजल्ट आए हैं.