JEE MAIN 2026: कबीर छिल्लर ने बनाया परफेक्ट स्कोर का रिकॉर्ड, हासिल किए 300 में से 300 अंक
कबीर अमेरिका के कैम्ब्रिज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से पढ़ाई करना चाहते हैं.

Published : February 16, 2026 at 8:52 PM IST
कोटा: देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन (JEE MAIN 2026) के जनवरी सेशन के परिणाम में कबीर छिल्लर ने परफेक्ट स्कोर का रिकॉर्ड बनाया है. कबीर जेईई मेन के जनवरी सेशन में 300 में से 300 अंक लाकर आए हैं.
कबीर का परिवार गुड़गांव रहता है. वे बीते दो साल से कोटा में रहकर ही जेईई की तैयारी कर रहे थे. उनके पिता मोहित छिल्लर भी आईआईटीयन हैं. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था. अब निजी कंपनी में जॉब कर रहे हैं. मां प्रियंका छिल्लर निजी स्कूल में शिक्षक हैं. पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए कबीर आईआईटी मुंबई से सीएस ब्रांच में बीटेक करना चाहते हैं. साथ ही यूएसए के कैम्ब्रिज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से पढ़ाई करना चाहते हैं.
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कोटा आना बना टर्निंग प्वाइंट: कबीर का कहना था कि वे जेईई की तैयारी करना चाहते थे, लेकिन कोटा आना उनके लिए टर्निंग पॉइंट बन गया है. यहां पर उन्होंने कोचिंग में तीनों सब्जेक्ट फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स के कॉन्सेप्ट क्लियर किए. इन्हीं की बदौलत वह एग्जाम क्रैक कर पाए. अब उनका सीधा लक्ष्य जेईई एडवांस्ड क्रैक करना है. उनका कहना था कि कोटा में आने के बाद पढ़ने का सही तरीका सीखा. टॉपिक को रटने की जगह उसके कांसेप्ट को समझाना ज्यादा बेहतर समझा. यह कॉन्सेप्ट क्लीयर होने के बाद ही सफलता मिल पाई है. सभी सब्जेक्ट में टॉपिक को छोटे-छोटे पार्ट में बांटकर नोट्स तैयार किए. इन नोट्स के आधार पर ही लगातार रिवीजन करता रहा हूं.
दोस्तों के साथ जाते थे घूमने: कबीर बताते हैं कि वे पढ़ाई के बाद मन बहलाने या फिर रिफ्रेश होने के लिए दोस्तों के साथ टहलने जाते थे. बाजार में घूमकर वापस आने के बाद मूड रिफ्रेश हो जाता था. इसके बाद फिर पढ़ाई में लग जाता था.कबीर का कहना था कि मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) जाना उनका सपना है. मौका मिला तो वे हायर स्टडीज एमआईटी से ही करेंगे. कबीर ने 10वीं कक्षा 98 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की थी. उनका कहना था कि स्टूडेंट को टाइम मैनेजमेंट और एक्यूरेसी पर भी ध्यान देना चाहिए. अपनी गलतियों को खुद पकड़ने और कारण जानने की कोशिश करेंगे, तब आगे से गलती होने के चांस कम हो जाएंगे. इस एनालिसिस के फंडे को अपना लिया था. इसके बाद ही परफॉर्मेंस बेहतर हुई.
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फैकल्टी का अच्छा मार्गदर्शन मिला: कबीर का कहना था कि सही दिशा में मेहनत करने से ही उन्हें सफलता मिली है. उन्हें कोटा में अच्छी फैकल्टी का मार्गदर्शन मिला. पेरेंट्स ने भी काफी सपोर्ट किया. दोनों की बदौलत ही इस लक्ष्य को हासिल कर पाया हूं. कबीर ने पढ़ाई का पूरा शेड्यूल बना लिया था, जिसे वे रोज फॉलो करते थे. पढ़ाई के शेड्यूल में रिवीजन और मॉक टेस्ट काफी सहायक रहे हैं.

