जापान ने आम को नकारा, मोदी ने सराहा; कहा- 'ये फल हमारा गौरव', जानिए सुर्खियों में क्यों फलों का राजा
जापान के नकारात्मक रुख के बाद पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में आम किसानों की तारीफ करके फल को भारतीय संस्कृति से जोड़ा.

Published : June 4, 2026 at 4:46 PM IST
|Updated : June 4, 2026 at 6:30 PM IST
US Iran Conflict Effect Mango Export: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस पर फलों के राजा आम पर चर्चा की. उन्होंने आम उत्पादक किसानों की तारीफ की और फलों के राजा को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए गर्मी के मौसम में हर घर का अभिन्न हिस्सा बताया. अब सवाल उठता है कि 'मन की बात' में आम कैसे आया? इसके पीछे की कहानी क्या है?
दरअसल, भारत जितने आम का उत्पादन करता है उसमें ज्यादातर हिस्सा अपने यहां उपयोग करता है और बाकी एक्सपोर्ट कर देता है. इससे किसानों की मोटी कमाई होती है. लेकिन, अमेरिका-ईरान संघर्ष, होर्मुज स्ट्रेट तनाव के कारण इस बार एक्सपोर्ट रुका हुआ है. इस बीच जापान ने भी भारतीय आम पर बैन लगा दिया है. इन परिस्थितियों में आम उत्पादक किसानों की चर्चा मन की बात में करके पीएम मोदी ने उनकी हौसला अफजाई की है.
भारत में आम का उत्पादन कितना: भारत दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. वैश्विक उत्पादन का लगभग 40% से 52% हिस्सा अकेले भारत पैदा करता है. देश में सालाना लगभग 2.0 से 2.8 करोड़ टन आम का उत्पादन होता है. यह भारत का राष्ट्रीय फल है और इसका निर्यात भी बड़े पैमाने पर किया जाता है. लेकिन, ज्यादा घरेलू मांग के कारण भारत अपने कुल उत्पादन का 1% से भी कम हिस्सा विदेश भेजता है.
भारत में आम की कितनी किस्में: भारत में आम की लगभग 1,500 से अधिक किस्में (varieties) पैदा की जाती हैं. इनमें से 1,000 से अधिक व्यावसायिक रूप से उगाई जाती हैं. हर किस्म का स्वाद, रंग और सुगंध अलग-अलग होती है.
- अल्फांसो (Alphonso/हापुस): इसे आमों का राजा भी कहा जाता है. महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ में पैदा होने वाला यह आम बेहद मीठा और खुशबूदार होता है.
- दशहरी (Dussehri): उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद की यह किस्म अपनी अलग मिठास और पतली गुठली के लिए बहुत लोकप्रिय है.
- चौसा (Chausa): यह आम गर्मियों के अंत में आता है और अपनी अत्यधिक मिठास, रसीलेपन और सुनहरे पीले रंग के लिए जाना जाता है.
- केसर (Kesar): गुजरात में विशेष रूप से उगाई जाने वाली यह किस्म केसर जैसी सुगंध और स्वाद देती है. यह आमरस बनाने के लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती है.
- लंगड़ा (Langra): वाराणसी और उत्तर भारत का यह आम पकने के बाद भी हल्का हरा रहता है. यह स्वाद में बहुत मीठा और थोड़ा रेशेदार होता है.
- तोतापुरी (Totapuri): यह आम तोते की चोंच जैसा दिखता है. यह हल्का खट्टा-मीठा होता है और ज्यादातर अचार व सलाद के लिए उपयोग किया जाता है.
- बंगनपल्ली/सफेदा (Banganapalli): आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत का यह आम आकार में बड़ा, अंडाकार और खाने में बहुत मीठा होता है.
- हिमसागर (Himsagar): पश्चिम बंगाल का यह बेहद लोकप्रिय आम है, जो बिना रेशे का और बहुत ही मीठा होता है.
आम के एक्सपोर्ट में कमी की वजह क्या: जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तनाव के चलते बीते 3 वित्तीय वर्ष में आम के एक्सपोर्ट में कमी देखने को मिली है. जैसे, 2026 की कटाई के समय गंभीर रुकावटें आईं. महाराष्ट्र के कुछ मुख्य निर्यात केंद्रों में पैदावार घटकर सामान्य क्षमता के लगभग 10% तक रह गई, जिससे उच्च-मूल्य वाले शिपमेंट पर असर पड़ा.

यही वजह है कि निर्यात की मात्रा में गिरावट देखी गई. जो 32,104 मीट्रिक टन (MT) से घटकर 29,938 MT हो गई. इसका मुख्य कारण मौसमी जलवायु में उतार-चढ़ाव, बेमौसम बारिश और लू (हीटवेव) थे, जिन्होंने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे आम उगाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में फसल की पैदावार पर असर डाला.
हालांकि, कुल मात्रा में गिरावट के बावजूद, प्रीमियम किस्मों (जैसे अल्फांसो और केसर) की मजबूत वैश्विक मांग ने यह सुनिश्चित किया कि कुल निर्यात मूल्य मजबूत बना रहे. नवीनतम चक्र में इससे 471.50 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ.
किन-किन देशों को भारत आम निर्यात करता: भारत अपने आम मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में निर्यात करता है. इनमें संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, कुवैत, कनाडा, नेपाल, कतर, ओमान, सिंगापुर, सऊदी अरब, जर्मनी, भूटान, बहरीन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, आयरलैंड, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड, मालदीव प्रमुख देश हैं.
कौन सा देश भारत से सबसे ज्यादा आम खरीदता है: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की ओर से जारी आधिकारिक व्यापार डेटा के अनुसार, भारतीय आम सबसे ज्यादा संयुक्त अरब अमीरात खरीदता है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भारत अपने कुल निर्यात का 31.16% आम भेजता है. यह भारत का सबसे बड़ा खरीदार है. इसके बाद यूनाइटेड किंगडम (UK) 19.27%, अमेरिका (USA) 17.72%, कुवैत 4.65%, कनाडा 4.19%, नेपाल 4.04%, कतर 3.93%, ओमान 3.04%, सिंगापुर 2.05%, सऊदी अरब 1.26% निर्यात हिस्सेदारी रखते हैं.
जापान ने भारतीय आम पर बैन क्यों लगाया: जापान ने इस सीजन के लिए भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है. जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने इसकी वजह, भारत की वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) सुविधाओं में कीट-नियंत्रण और कीटाणु-नाशक प्रक्रियाओं में कमियों और गंभीर खामियों को बताया है. इसके चलते ही 25 मार्च, 2026 के बाद जापान भारत से भेजी गईं शिपमेंट को अस्वीकार कर रहा है.

जापान ने 1986 में भी बैन किया था भारतीय आम: जापान ने 1986 में भारत के आमों के आयात पर बैन लगा दिया था, क्योंकि उन्हें शक था कि उनमें 'फ्रूट फ्लाई' (फल मक्खी) जैसे कीट हो सकते हैं. इसके बाद भारत ने बड़े पैमाने पर परीक्षण करके वैज्ञानिक सबूत जुटाए, जिनसे यह पता चला कि आम में सचमुच फ्रूट फ्लाई जैसे कीट थे.
इन परीक्षणों के आंकड़े 1998 और 1999 में ही जापान के अधिकारियों को सौंप दिए गए थे. इसके बाद, जापान के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि आमों में कोई कीट न हो, उन्हें जापान भेजने से पहले 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (भाप से गर्मी देने का उपचार) से गुजारने की शर्त रखी.
इस शर्त का भी पालन किया गया. बाद में जापान ने एक नई तरह की फ्रूट फ्लाई के पाए जाने का मुद्दा उठाया. इस पर एक सर्वेक्षण करवाया गया और 3 साल तक आंकड़े जुटाने के बाद यह पुष्टि हो गई कि आमों में किसी भी नई तरह की फ्रूट फ्लाई का कोई संक्रमण नहीं था. इन तमाम कोशिशों के बावजूद, आमों पर लगा बैन नहीं हटाया गया.
जापान का आम अस्वीकार करना क्या बैन है: किसी शिपमेंट का अस्वीकार होना कोई प्रतिबंध नहीं कहलाता. कभी-कभी, आमों के कुछ बैच जापानी कस्टम पर अस्वीकार कर दिए जाते हैं या उन्हें अस्थायी रूप से रोक लिया जाता है. ऐसा तब होता है जब इंस्पेक्टर को उनमें कीटनाशकों के अवशेष, उनकी तय 'अधिकतम अवशेष सीमा' (MRLs) से ज्यादा मिलते हैं, या जब कोई 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (VHT) बैच तय मानकों को पूरा करने में विफल रहता है. ये किसी खास खेप के लिए सीमा पर होने वाली सामान्य अस्वीकृतियां हैं, ना कि पूरे देश पर लगाया गया कोई प्रतिबंध.

US-ईरान संघर्ष का आम के निर्यात पर क्या असर पड़ा: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण स्थिति—खास तौर पर US-ईरान विवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य की व्यावहारिक नाकेबंदी ने एक बड़ा "डोमिनो इफेक्ट" शुरू कर दिया है, जिसने भारतीय आम निर्यात पर बुरा असर डाला है. आम जल्दी खराब हो जाते हैं और इनका मौसम बहुत छोटा होता है. पश्चिम एशिया संकट के कारण आम आर्थिक शिकार बन गए हैं.
आम निर्यात में भारत मेक्सिको, थाईलैंड और वियतनाम को देता टक्कर: भारत दुनिया भर में आम के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है, जो मेक्सिको, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों को टक्कर देता है. US-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने भारतीय बागों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक की सप्लाई लाइन को काट दिया है. परिवहन खर्च बढ़ाकर और शिपिंग में बड़े पैमाने पर देरी करके, इसने आम को वापस घरेलू बाजारों में धकेल दिया, जिससे भारतीय आम उत्पादकों के लिए आर्थिक संकट पैदा हो गया.
माल ढुलाई का खर्च हुआ दोगुना: आम एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी 'श्रीवली एग्रो' के को-फाउंडर श्रीधर पाठक ने रायटर्स को बताया कि माल ढुलाई का खर्च दोगुने से भी ज्यादा हो गया है. दुबई व ओमान समेत खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले माल में देरी या उनके रद होने की वजह से इस साल उनकी शिपमेंट में करीब 40% की कमी आई है.
जिन आमों को शुरू में एक्सपोर्ट के लिए तय किया गया था, उन्हें अब लोकल बाजार में भेज दिया गया है. इसकी वजह से आमों की कीमतें गिर गई हैं. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के आम उगाने वाले किसानों को कीमतों में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक्सपोर्ट शिपमेंट में हो रही रुकावटों की वजह से उन्हें अपने आम जल्दबाजी में बेचने पड़ रहे हैं.
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