जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
पांच सितंबर को सीजेपी का प्रोटेस्ट है. सरकार उससे पहले ही मामले को शांत करना चाहती है.

By Sumit Saxena
Published : August 31, 2026 at 6:04 PM IST
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रही है.
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया. उन्होंने यह बातें उस समय रखीं, जब पीठ उठने ही वाली थी. उन्होंने इस मामले का उल्लेख किया और मंगलवार को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया.
जब मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि याचिका किस बारे में है, तो मेहता ने उत्तर दिया कि यह उस विरोध प्रदर्शन और एफआईआर को रद्द करने के संबंध में है. उन्होंने आगे कहा, "हम अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर रहे हैं."
पीठ ने तत्काल सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार कर ली और इसे कल सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की. मुख्य न्यायाधीश ने मेहता से कहा, "चूंकि पक्षकार सुलह कर रहे हैं, इसलिए हमें कोई कठिनाई नहीं है."
पिछली सुनवाई में, सर्वोच्च न्यायालय ने एफआईआर वापस लेने के पक्ष में बात की थी और इसके लिए अनुच्छेद 142 का प्रयोग करने पर भी विचार कर रहा था.सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में आदेश जारी किया कि एक उच्च स्तरीय जांच समिति प्रत्येक मामले की जांच करेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी.
इस महीने की शुरुआत में, कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक विरोध मार्च का आह्वान किया है. पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ 36 दिनों से चल रहे आंदोलन को वापस लेने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया है.
मुख्य न्याय समिति (सीजेपी) ने एक बयान में घोषणा की कि शिक्षक दिवस पर होने वाला यह मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ेगा.मुख्य न्याय समिति का आंदोलन 25 जुलाई को तब समाप्त हुआ जब धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार ने सीजेपी प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद, उनकी अन्य मांगों को मान लिया, जिनमें आत्महत्या करने वाले नीट उम्मीदवारों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना शामिल था. इसके बाद से, पार्टी ने केंद्र सरकार पर एफआईआर वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से बचाने के वादे को पूरा करने में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है.
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